Wuhan lockdown: कोरोना काल में दुनिया के पहले लॉकडाउन का एक साल पूरा

कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया में पहली बार चीन के वुहान में आज ही के दिन 2020 में लॉकडाउन लगाया गया था। जान बचाने की जद्दोजहद में ज्यादातर देशों में लॉकाउन लगाया गया। इस दौरान सड़कें वीरान, उद्योग-धंधे ठप और हर तरफ कोविड-19 से बचाव के तरीकों की बातें होती रहीं। वैश्विक इतिहास में यह पहला मौका नहीं था, जब दुनिया का सामना ऐसी गंभीर परिस्थितियों से हुआ। लॉकडाउन जैसी स्थितियां पहले भी रही हैं। आइए जानते हैं कि कब रहीं ऐसी स्थितियां और उनका क्या प्रभाव पड़ा?

जस्टिनियन प्लेग से उपजा विचार : जस्टिनियन प्लेग का नाम बाइजेंटाइन साम्राज्य के सम्राट जस्टिनियन (527-565 ईस्वी) के नाम पर रखा गया था। राजा ब्युबोनिक प्लेग से बीमार था और साम्राज्य परेशानी से गुजर रहा था। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि बीमारी से साम्राज्य की राजधानी कांस्टेंटिनोपल में रोजाना करीब पांच हजार लोग मर रहे थे। इसी के बाद तत्कालीन विशेषज्ञों को बीमारी से पीड़ित लोगों को आबादी से दूर रखने का विचार आया।

कई रूपों में मौजूद था लॉकडाउन : दुनिया में प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्पेनिश फ्लू बहुत तेजी से फैला। सैनिकों, कारखाना कर्मियों और अन्य लोगों के सार्वजनिक परिवहन के साधनों का प्रयोग करने के कारण ऐसा हुआ। इस दौरान भले ही लॉकडाउन का कोई औपचारिक रूप नहीं था, लेकिन फिर भी यह कई रूपों में मौजूद था। जहां वायरस फैलने के डर से भीड़भाड़ वाले कई इलाकों को बंद कर दिया गया। थिएटर, सिनेमा और चर्च बंद कर दिए गए और कई मामलों में यह बंद महीनों तक जारी रहा था।

क्वारंटाइन जैसा शब्द ऐसे आया : यूरोप को 14वीं शताब्दी में ब्यूबोनिक प्लेग ने अपनी चपेट में ले लिया था। बीमारी के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार या सत्ता में बैठे लोगों ने अनेक उपाय अपनाए, जिसे पहली बार लॉकडाउन के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसे ब्लैक डेथ के नाम से जाना गया, जिसने 1346 से 1353 के मध्य यूरोप और अन्य जगहों को अपनी चपेट में ले लिया था। प्लेग के डर से समुद्री बंदरगाहों पर दूसरे देशों के जहाजों को अनुमति नहीं दी गई। इसके अलावा, जिन जहाजों को बंदरगाहों पर जाने की अनुमति दी गई थी, उनसे नाविकों को एक महीने के लिए अलग-थलग करने के लिए कहा गया था, जिसके कारण क्वारंटाइन की अवधारणा और शब्द की शुरुआत हुई। इसके लिए इतालवी शब्द मूल रूप से ट्रेंटिनो था। अंग्रेजी शब्द क्वारंटाइन सीधे इतालवी शब्द क्वारंटीनो से प्रभावित था, जिसका अर्थ था 40 दिन का समय।

कोविड-19 के कारण घरों में बंद हो गए थे लोग : कोविड-19 महामारी के कारण अप्रैल 2020 में दुनिया की आधी से अधिक आबादी लॉकडाउन में थी। 90 से अधिक देशों और क्षेत्रों की सरकारों ने 3.9 अरब लोगों को घरों में रहने के आदेश दिए गए थे। स्कूल-कॉलेज बंद होने से दुनिया के 47 फीसद छात्र प्रभावित हुए। भारत में लॉकडाउन के दौरान 1.3 अरब की आबादी घरों में थी। यह एक देश की सबसे बड़ी संख्या थी।

ये पड़ा था आर्थिक प्रभाव : मार्च 2020 में फिक्की के एक सर्वे में सामने आया था कि लॉकडाउन के कारण भारत में 53 फीसद व्यवसाय कोरोना वायरस के प्रभाव के कारण बंद हो गए थे। वहीं लॉकडाउन के कारण 45 फीसद घरों की आय में पिछले साल की अपेक्षा कमी आई। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए और अकेले पर्यटन उद्योग को सिर्फ मार्च और अप्रैल में 15 हजार करोड़ का नुकसान हुआ। वहीं यह अनुमान लगाया गया कि लॉकडाउन के हर दिन भारतीय अर्थव्यवस्था को 32 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि अब धीरे-धीरे भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है और सब कुछ ठीक हो रहा है। साथ ही वैश्विक हालात भी सुधर रहे हैं।

कोविड-19 से निपटने के लिए तीन बार लगाना पड़ा लॉकडाउन : कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया के कई देशों में तीन-तीन बार लॉकडाउन लगाना पड़ा। इनमें ऑस्टिया, आयरलैंड, इजरायल, ब्रिटेन और इटली के कुछ क्षेत्र शामिल रहे। वहीं दुनिया में कई देश ऐसे भी रहे, जब बढ़ते संक्रमण और मौतों के बावजूद भी वहां की सरकारों ने लॉकडाउन नहीं लगाया। कंबोडिया, जापान, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, ताइवान जैसे कई देशों में लॉकडाउन नहीं था। जबकि अमेरिका के कई प्रांतों की सरकारों ने भी लॉकडाउन से परहेज किया। हालांकि अमेरिका जैसे देश को लॉकडाउन के कारण बढ़ते संक्रमण को ङोलना पड़ा।