गोली नहीं, पुलिस ने चुना संयम; पन्नू ने दिया भड़काऊ भाषण: दिल्ली पुलिस आयुक्त

दिल्ली पुलिस आयुक्त (सीपी) एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन किसानों द्वारा आयोजित ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा विश्वासघात का नतीजा है। पुलिस की किसान नेताओं के साथ शांतिपूर्ण परेड की बात हुई थी, लेकिन उन्होंने पुलिस की किसी भी शर्त को नहीं माना। उपद्रवी हिंसा पर उतारू हो गए थे। यहां तक कि लाल किला पर केसरिया झंडा फहरा दिया। पुलिस चाहती तो गोलियां चला हड़दंगियों को शांत कर सकती थी। लेकिन पुलिस ने गोली नहीं, संयम का रास्ता चुना। बुधवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि इस घटना में काफी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। वाहन व संपत्ति का भी नुकसान हुआ है। घटना ने सबको शर्मासार कर दिया। इसमें शामिल किसी भी आरोपित को नहीं बक्शा जाएगा। उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि कृषि कानून को लेकर गत दो महीने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। जनवरी के शुरुआत में पुलिस को पता चला कि वे दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने जा रहे हैं। जिसके बाद किसान नेताओं से संपर्क किया गया। नेताओं ने 26 जनवरी के दिन दिल्ली में परेड करने का आह्वान किया था। गणंतत्र दिवस का मुख्य कार्यक्रम के तहत सुरक्षा कारणों से पुलिस ने किसानों से 26 जनवरी की जगह कोई और तारीख में कार्यक्रम रखने का सुझाव दिया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। यहां तक कि पुलिस ने केएमपी एक्सप्रेस वे पर परेड निकालने पर सुरक्षा सहित अन्य सुविधा प्रदान करने का वादा भी किसानों से किया था, लेकिन किसान नेता अपनी बातों पर अड़े रहे। बाद में कई चरणों की वार्ता के बाद ट्रैक्टर परेड के लिए तीन अलग-अलग रूट तय हुए। वहीं, किसान नेताओं ने पुलिस की अन्य शर्तों को भी मानने का वादा किया। लेकिन, गणतंत्र दिवस के दिन उन्होंने पुलिस की सभी शर्तों को तोड़ दिया। दोपहर 12 बजे की जगह टीकरी, सिंघु और गाजीपुर बार्डर से सुबह 8.30 बजे ही किसान ट्रैक्टर लेकर दिल्ली की ओर निकल गए थे। वहीं यह भी तय हुआ था कि परेड के साथ किसान नेता भी साथ चलेंगे और किसी के पास हथियार इत्यादि नहीं होगा, लेकिन इन शर्तों की भी अवहेलना की गई।

पन्नू ने दिया भड़काऊ भाषण: उन्होंने कहा कि परेड के दौरान सिंघु के किसानों के सामने मुकरबा चौक पर किसान नेता सतनाम सिंह पन्नू ने भड़काऊ भाषण दिया। जिसके बाद किसान बैरिकेड तोड़कर लाल किले की ओर बढ़ गए। टीकरी बार्डर के किसान बुट्टा सिंह के साथ नांगलोई में हिंसक प्रदर्शन पर उतारू हो गए।

पुलिस से कहीं कोई चूक नहीं हुई: उन्होंने कहा कि गाजीपुर के किसानों के साथ किसान नेता राकेश टिकेट थे। उपद्रवियों ने जगह-जगह जमकर उत्पात मचाया। रोकने पर उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला किया वहीं, जमकर तोड़फोड़ भी की गई। पुलिस ने संयम बरता और आंसू गैस व लाठी के माध्यम से उपद्रवियों को रोकने की कोशिश की। इसका नतीजा रहा कि इतने बड़े उपद्रव के बावजूद पुलिस की वजह से किसी की भी मौत नहीं हुई। पुलिस ने पूरे मामले को अच्छी तरह हैंडल किया। पुलिस की इंटेलिजेंस मजबूत थी।