COVID-19 Vaccination: कोरोना वैक्सीन को लेकर लोगों में बढ़ रही हिचकिचाहट, जानें क्या है एक्सपर्ट्स की राय

COVID-19 Vaccination: पिछले साल शुरू हुई कोरोना वायरस महामारी ने अभी तक दुनिया भर में करोड़ों लोगों को अपना शिकार बना लिया है। ये बीमारी इस तेज़ी से फैली की लोगों के बीच डर और दहशत पैदा हो गई। महामारी के चलते लोग पिछले एक साल से घरों के अंदर बैठे हैं और ज़रूरत पड़ने पर ही बाहर निकल रहे हैं। इसी दौरान वैज्ञानिक और मेडिकल एक्सपर्ट्स इस जानलेवा बीमारी का इलाज और वैक्सीन तैयार करने में दिन रात एक कर रहे थे। आखिरकार, साल 2020 के अंत तक कोरोना की कई सारी वैक्सीन बाज़ार में आ चुकी हैं और लोगों को लगना भी शुरू हो गई हैं। हालांकि, लोग अब वैक्सीन से भी डर रहे हैं और इसे लगवाने से बच रहे हैं।

कई लोग हैं वैक्सीन के खिलाफ 

भारत की बात की जाए तो कई लोग ऐेसे हैं जो कोविड-19 वैक्सीन लगवाने के खिलाफ हैं। लोकल सर्कल द्वारा किए गए सर्वे में पाया गया कि 60 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो केविड-19 वैक्सीन लगवाने में हिचकिचाहट महसूस कर रहे हैं। वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स और प्रभावकारिता की अनिश्चितता के अलावा इसके ट्रायल के दौरान हुई कुछ घटनाओं ने कई लोगों को डरा दिया है।

सर्वेक्षण से पता चला है कि साइड इफेक्ट्स पर अनिश्चितता भारतीय नागरिकों के बीच वैक्सीन के संकोच का सबसे बड़ा कारण है। 59 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “साइड इफेक्ट्स” कोविड-19 वैक्सीन के प्रति उनकी झिझक का प्राथमिक कारण है, वहीं 14 प्रतिशत ने कहा कि वैक्सीन के प्रभाव को लेकर अनिश्चितता उनकी झिझक का कारण है। सिर्फ 4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें वैक्सीन की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कोविड-19 महामारी अब ख़त्म होने जा रही है।

क्या कहते हैं एक्पर्ट्स?

पारस हॉस्पिटल, के पल्मोनोलॉजी/रेस्पिरेटरी मेडिसिन- हेड एंड सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अरुणेश कुमार ने कहा, “दुनियाभर में हेल्थकेयर वर्कर्स द्वारा कोविड वैक्सीन न लगवाने की बढ़ती दर से सामान्य जनता के बीच हिचकिचाहट होने लगी है। इसका सीधा सा मतलब है कि वैक्सीन को न लगवाने की भावना या हिचकिचाहट से कोरोना का प्रकोप शायद 2021, 2022, या फिर 2023 तक भी जारी रह सकता है। खुद एक हेल्थकेयर प्रोफेसनल होने के नाते मैं हेल्थकेयर वर्कर्स को निश्चिन्त करना चाहूंगा कि वैक्सीन सुरक्षित है। मैं चाहूंगा कि वे किसी भी भ्रामक जानकारी को न फैलाएं क्योंकि वैक्सीन को बहुत सारे लोग लगवा रहे हैं। बुखार की तरह साइड इफेक्ट्स, जोड़ों का दर्द किसी भी वैक्सीन को लगवाने से होता है। दरअसल, वैक्सीन लगवाने से हमारा इम्यून रिस्पॉन्स अच्छा होता है। कई टॉउनहॉल में हर एक सवाल का जवाब देने के बाद भी अपने हॉस्पिटल में हमने अपनी हेल्थकेयर टीम के साथ फेस टू फेस इसके बारें में भी चर्चा की है। हम उनके साथ भी सेशन आयोजित कर रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में वैक्सीन लगवाई है ताकि वे वैक्सीन के लाभार्थी होने के नाते अपना पर्सनल अनुभव शेयर कर सकें।”

कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, पालम विहार के क्रिटिकल केयर और पलमोनरी- सीनियर कंसल्टेंट डॉ. पीयूष गोयल ने कहा,  “वैक्सीन लगवाने में हिचकिचाना न केवल कोविड-19 से बचाव के लिए एक गंभीर बाधा है बल्कि कई और संक्रामक बीमारियों के लिए भी यह एक बड़ी परेशानी है। लोग वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद भी वैक्सीन न लगवाना या इसके लाभों को प्राप्त करने में देरी कर कर रहे हैं। हम कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल के स्टाफ मेंबर में ऐसी किसी भी भावना को ख़त्म करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे आकर अपना नाम रजिस्टर कराएं और आने वाले दिनों में वैक्सीन लगवाएं। हमने डाक्टरों के साथ एक सवाल-जवाब का सेशन भी आयोजित किया है जिसमे वे अपने सभी सवालों का जवाब पा सकते हैं। हम उन्हें अफवाहों और भ्रामक समाचारों पर ध्यान न देने की सलाह दे रहें और उन्हें केवल विश्वसनीय सूत्रों जैसे कि सरकारी संस्थानों और सरकारी मीडिया से ही जानकारी लेने के लिए कह रहे हैं।”

उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स के फाउंडर और डायरेक्टर डॉ. शुचिन बजाज ने कहा, “हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक हेल्थ प्रोफेसनल्स होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम समाज को वैक्सीन लगवाने से संकोच न करने में मदद करें। वैक्सीन लगवाने के प्रति हिचकिचाहट दशकों से है। नए और अंजान वायरस के लिए जब वैक्सीन आती है तो हेल्थ प्रोफेसनल्स को वैक्सीन के प्रति आशंका होना लाजमी है क्योंकि वे सामान्य जनता से ज्यादा किसी भी दवा के कॉम्प्लीकेशन्स और साइड इफेक्ट को जानते हैं। इसलिए हम उनके साथ वैक्सीन के निर्माण को लेकर बहुत सारा डाटा और जानकारी शेयर कर रहे हैं।  वैक्सीन कैसे विभिन्न स्टेज में काम करती है और इसके ट्रायल्स का डाटा भी उनके साथ शेयर किया जा रहा हैं। सभी चीजों को उन्हें बताया  गया है और हम उनसे फेस टू फेस के साथ-साथ पब्लिक में भी उनसे चर्चा कर रहे हैं। हम रेडियो तथा अन्य डिजिटल प्लेटफार्म पर कई जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि विशेष रूप से मेडिकल कम्युनिटी और सामान्य जनता वैक्सीन के बारें में ज्यादा जान सके और वे उनमें वैक्सीन के प्रति उपजी आशंका ख़त्म हो सके।”