भारत में हर साल 1.5 लाख लोग ब्रेन स्ट्रोक के शिकार, एक्सपर्ट से जानें क्या है इसकी वजह, लक्षण एवं बचाव

अब तक ऐसा माना जाता था कि ब्रेन स्ट्रोक सिर्फ बुज़ुर्गों को ही होता है, पर आधुनिक जीवनशैली की जटिलताओं की वजह से मिडिल एज ग्रुप के लोगों में भी यह समस्या देखने को मिलती है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में हर साल 1.5 लाख लोग ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं, लेकिन जागरूकता न होने की वजह से उनकी यह समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है, जो कई बार जानलेवा साबित होती है। इसलिए बेहतर यही होगा कि इस समस्या के कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों को समझते हुए पहले से ही पूरी सजगता बरती जाए।

क्या है मर्ज

सही ढंग से काम करने के लिए हमारे दिमाग को हमेशा पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है और ब्लड सर्कुलेश के ज़रिए ऑक्सीजन मस्तिष्क तक पहुंचता है। उसकी रक्तवाहिका नलियों में ब्लड क्लॉटिंग या उनके फटने की वजह से ब्रेन की कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और वे तेज़ी से नष्ट होने लगती हैं। इसी शारीरिक अवस्था को ब्रेन स्ट्रोक कहा जाता है। लोगों को सरल भाषा में समझाने के लिए नेशनल स्ट्रोक एसोसिएशन ने इसके लिए ‘ब्रेन अटैक’ शब्द का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। ब्रेन स्ट्रोक मुख्यत: दो तरह का होता है, इस्केमिक और हेमरैजिक स्ट्रोक। पहली स्थिति में व्यक्ति के मस्तिष्क की नसों में खून जमने की समस्या होती है, जिससे उसके कुछ हिस्सों को ऑक्सीज़न युक्त रक्त नहीं मिल पाता। स्ट्रोक के लगभग 87 प्रतिशत मामलों में ऐसी ही समस्या देखने को मिलती है। दूसरे तरह के स्ट्रोक में मस्तिष्क की नसें फट जाती हैं, इससे उसके कुछ हिस्सों में अनियंत्रित रक्त प्रवाह शुरू हो जाता है। यह स्थिति भी मरीज़ के लिए बेहद खतरनाक होती है।

कैसे करें पहचान

कुछ लक्षणों की समानता की वजह से अक्सर लोग इसे हार्ट अटैक समझने लगते हैं, पर यह उससे भी ज्य़ादा गंभीर समस्या है। ब्रेन अटैक के प्रमुख लक्षणों को पहचान कर लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाने के लिए विशेषज्ञों ने एक सरल फॉर्मूला तैयार किया है, जिसे फास्ट नाम दिया गया है। इसका मतलब है-

एफ : फेस में टेढ़ापन

ए : आम्र्स में कमज़ोरी, कोशिश करने पर भी व्यक्ति अपने हाथ ऊपर नहीं उठा पाता।

एस : स्पीच में दिक्कत, ऐसे में अधिकतर लोगों की आवाज़ लड़खड़ाने लगती है।

टी : टाइम की कीमत पहचानते हुए स्ट्रोक से प्रभावित व्यक्ति को हॉस्पिटल पहुंचाने में ज़रा भी देर न करें। लगभग 60 प्रतिशत ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में ये प्रमुख लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा ऐसे मरीज़ों में कुछ अन्य लक्षण भी नज़र आते हैं, जो इस प्रकार हैं :

आंखों के आगे अंधेरा छाना

हर चीज़ दो-दो दिखाई देना

शारीरिक संतुलन बिगडऩा

कमज़ोरी महसूस होना

शरीर का कोई एक हिस्सा सुन्न पड़ जाना आदि।

ये लक्षण ज्य़ादा खतरनाक साबित होते हैं क्योंकि अक्सर लोग इन्हें मामूली कमज़ोरी समझ कर नज़रअंदाज़ कर देते हैं और हॉस्पिटल पहुंचने में देर हो जाती है। इसलिए अगर इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आए तो बिना देर किए तत्काल मरीज़ को हॉस्पिटल ले जाना ज़रूरी होता है।

संभव है बचाव

अक्सर लोग यह सोचकर डर जाते हैं  कि ब्रेन स्ट्रोक का हमला अचानक होता है। इसलिए इससे बचाव असंभव है, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। इससे बचने के लिए स्वस्थ संतुलित खानपान और नियमित एक्सरसाइज़ करना चाहिए। शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखना बेहद ज़रूरी है क्योंकि बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल हार्ट के साथ मस्तिष्क की रक्तवाहिका नलिकाओं को भी संकरा बनाने का काम करता है। इससे केवल हार्ट अटैक ही नहीं, बल्कि ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा बढ़ जाता है। साल में एक बार हेल्थ चेकअप अवश्य कराना चाहिए। डायबिटीज़ के मरीज़ों को खास सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि उनके शरीर में रक्तवाहिका नलिकाओं के सिकुडऩे की प्रवृत्ति होती है, जो आगे चलकर ब्रेन को भी प्रभावित कर सकती है।