सूडान में लड़ाई के बीच सेंट्रल बैंक में लगी आग:अब तक 3 हजार भारतीय निकाले गए, 186 लोगों के साथ कोच्चि पहुंचा वायुसेना का विमान

सूडान में सेना और पैरा मिलिट्री फोर्स (RSF) में हो रही लड़ाई की चपेट में वहां का सेंट्रल बैंक भी आ गया है। रविवार को खार्तूम में लड़ाई एकदम से तेज गई थी, जिसकी वजह से सेंट्रल बैंक में आग लग गई। सीजफायर के बीच हो रही लड़ाई का दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

वहीं, भारत ने सूडान से अपने 3,000 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। इनमें से 2,300 को भारत भी लाया जा चुका है। ये काम ऑपरेशन कावेरी के तहत जारी है। वहीं, 186 भारतीयों को लेकर वायुसेना का विमान कोच्चि पहुंचा है।

इसके अलावा, 122 लोगों को पोर्ट सूडान से वायु सेना के विमान C-130J के जरिए सऊदी अरब के जेद्दाह पहुंचाया जा रहा है। जहां से उन्हें भारत लाया जाएगा। पिछले हफ्ते विदेश मंत्रालय ने बताया था कि सूडान में भारत के 3,500 लोग फंसे हैं।

सूडान से अब तक 16 बैच में निकाले गए भारतीय
सूडान में सीज फायर के बावजूद सेना और RSF के हमले जारी हैं। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक लोग सूडान सिर्फ लड़ाई की वजह से ही नहीं बल्कि सड़कों और घरों में घुस कर की जा रही लूटपाट की घटनाओं की वजह से भी छोड़ रहे हैं।

इन सब के बीच भारत का ऑपरेशन कावेरी जारी है। इसके तहत रविवार को दो चरणों में 269 लोगों के समूह को सुरक्षित भारत लाया गया था। इन सभी लोगों को बेंगलुरु और दिल्ली छोड़ा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक अभी तक भारतीयों के 16 बैच को सूडान से सऊदी अरब के जेद्दाह पहुंचाया जा चुका है और 7 बैच में लोगों को भारत लाया जा चुका है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच पोर्ट सूडान पर भीड़
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग सभी देश पोर्ट सूडान के रास्ते अपने लोगों को बाहर निकाल रहे हैं। ऐसे में वहां पर लोगों की भारी भीड़ जमा होने लगी है। पासपोर्ट चेक करवाने के लिए लंबी लाइनें हैं।

रात-रात भर जंगी जहाज लोगों को निकाल रहे हैं। पोर्ट पर मौजूद एक पाकिस्तानी जो चीन के जंगी जहाज से वतन लौटने वाला है उसने बताया कि वो पोर्ट सूडान पहुंच कर खुश है, लेकिन इस बुरे इतिहास का हिस्सा बनने का उसे उम्र भर अफसोस रहेगा।

भारत पोर्ट के जरिए ही लोगों को क्यों रेस्क्यू कर रहा?
सूडान में चल रहे ज्यादातर रेस्क्यू ऑपरेशन में लोगों को पहले पोर्ट तक लाया जा रहा है और वहां से उन्हें जहाजों के जरिए सऊदी अरब के जेद्दाह तक पहुंचा रहे हैं।

अलजजीरा से बात करते हुए खाड़ी और उत्तरी अफ्रीकी देशों में यूरोपीय संघ के राजदूत रहे जेम्स मोरन ने बताया कि लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सबसे अहम एयरपोर्ट होता है, लेकिन खार्तूम में एयरपोर्ट बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।

ऐसे में लोगों को वहां से निकालने का एकमात्र जरिया समुद्री मार्ग है। इसके लिए खार्तूम शहर से पोर्ट की दूरी ज्यादा होने के बावजूद लोगों को वहां से लाया जा रहा है। ये बेहद जोखिम भरा काम है, लेकिन अपने लोगों को बचाने का दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है।

6 पॉइंट्स में समझें सूडान में हिंसा की वजह…

  • सूडान में मिलिट्री और पैरामिलिट्री के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। सबसे पहले 2019 में सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति ओमर अल-बशीर को सत्ता से हटाने के लिए लोगों ने प्रदर्शन किया।
  • फिर अप्रैल 2019 में सेना ने राष्ट्रपति को हटाकर तख्तापलट कर दिया, लेकिन इसके बाद लोग लोकतांत्रिक शासन और सरकार में अपनी भूमिका की मांग करने लगे।
  • इसके बाद सूडान में एक जॉइंट सरकार का गठन हुआ, जिसमें देश के नागरिक और मिलिट्री दोनों का रोल था। 2021 में यहां दोबारा तख्तापलट हुआ और सूडान में मिलिट्री रूल शुरू हो गया।
  • आर्मी चीफ जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान देश के राष्ट्रपति और RSF लीडर मोहम्मद हमदान डागालो उपराष्ट्रपति बन गए। इसके बाद से RSF और सेना के बीच संघर्ष जारी है।
  • सिविलियन रूल लागू करने की डील को लेकर मिलिट्री और RSF आमने-सामने हैं। RSF सिविलियन रूल को 10 साल बाद लागू करना चाहती है, जबकि आर्मी का कहना है कि ये 2 साल में ही लागू हो जाना चाहिए।
  • सिविलियन रूल यानी चुनाव के जरिए सरकार बनाना। आर्मी के मुताबिक 2023 में चुनाव कराकर नई सरकार का गठन किया जाना चाहिए। वहीं, RSF अभी और 8 साल तक देश पर शासन करना चाहती है।