टिकटों का पैसा वापस करेगी गो फर्स्ट:एयरलाइन का इंजन सप्लायर बोला- गो फर्स्ट का समय पर पेमेंट नहीं करने का लंबा इतिहास

दिवालिया होने की कगार पर पहुंची बजट एयरलाइन गो फर्स्ट को लेकर उसके इंजन सप्लायर प्रैट एंड व्हिटनी (PW) का बयान सामने आया है। PW ने कहा कि गो फर्स्ट का समय पर पेमेंट नहीं करने का लंबा इतिहास रहा है। कंपनी ने कहा कि अब ये मामला कोर्ट तक पहुंच गया है, इसीलिए हम आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

कैश की तंगी से जूझ रही एयरलाइन गो फर्स्ट ने 3, 4 और 5 मई के लिए फ्लाइट सस्पेंड कर दी है। एयरलाइन ने कहा है कि वो टिकटों का पैसा भी वापस करेगी। अचानक फ्लाइट कैंसिल होने के कारण टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

गो फर्स्ट एयरलाइंस से टिकट बुक कराने वाले यात्री हरेंद्र सिंह ने कहा, ‘मैं मेरठ से 3 बजे के आसपास दिल्ली के लिए निकला था, लेकिन यहां पहुंचने के बाद पता चला कि मेरी फ्लाइट कैंसिल हो गई है…कोई भी साफ-साफ कुछ कहने को तैयार नहीं है’।

एयरलाइंस से टिकट बुक करने वाले एक अन्य यात्री ने कहा, ‘हमने लेह जाने के लिए टिकट बुक कराए थे, अब फ्लाइट कैंसिल हो गई है।’ एक यात्री ने ट्वीट किया कि उनकी कनेक्टिंग फ्लाइट थी, जिसके बाद उन्हें ट्रेन पकड़ना था। अब क्या मुझे रिफंड मिलेगा?

DGCA ने नोटिस जारी कर 24 घंटे में मांगा जवाब ​​​​​​
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने भी इस मामले में नाराजगी जाहिर की है। DGCA ने एयरलाइंस को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है और 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। वहीं एविएशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि सरकार हर संभव तरीके से एयरलाइन की मदद कर रही है और स्टेकहोल्डर्स से भी बात की है।

दिवाला समाधान कार्यवाही के लिए भी आवेदन
एयरलाइन ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) दिल्ली के पास स्वैच्छिक दिवाला समाधान कार्यवाही के लिए एक आवेदन भी दायर किया है। एयरलाइन चीफ कौशिक खोना ने कहा- इंजनों की सप्लाई नहीं होने के कारण एयरलाइन ने 28 विमानों को ग्राउंडेड कर दिया।

इससे फंड की किल्लत हो गई और दिवाला कार्यवाही के लिए जाना पड़ा। ये एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है, लेकिन कंपनी के हितों की रक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। एयरलाइन ने इस घटनाक्रम के बारे में सरकार को सूचित कर दिया है और वह डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को एक डिटेल्ड रिपोर्ट भी सौंपेगी।

इंजन की सप्लाई नहीं होने से कैश की समस्या
इंजन की सप्लाई से जुड़ी समस्या के कारण एयरलाइन इस स्थिति में पहुंची है। एयरक्राफ्ट इंजन मैन्युफैक्चरर प्रैट एंड व्हिटनी (PW) को गो फर्स्ट को इंजन की सप्लाई करनी थी, लेकिन उसने समय पर इसकी सप्लाई नहीं की।

ऐसे में गो फर्स्ट को अपनी प्लीट के आधे से ज्यादा एयरक्राफ्ट ग्राउंडेड करने पड़े। फ्लाइट नहीं उड़ने के कारण उसके पास कैश की कमी हो गई और फ्यूल भरने के लिए भी भी पैसे नहीं बचे। एयरलाइन के A20 नियो एयरक्राफ्ट में इन इंजनों का इस्तेमाल होता है।

गो फर्स्ट के साथ PW के कॉन्ट्रैक्ट में तीन बड़ी शर्तें थी:

  • विमान का इंजन खराब हो जाता है तो 48 घंटे के भीतर स्पेयर इंजन देना होगा।
  • फॉल्टी इंजनों की फ्री में रिपेयरिंग करानी होगी क्योंकि सभी इंजन वॉरंटी में है।
  • ग्राउंडेड विमानों के कारण हुए नुकसान का कंपनसेशन भी देना होगा।

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2020 तक, PW ने समय पर स्पेयर इंजन उपलब्ध कराए, फ्री में रिपेयरिंग की और कंपनसेशन भी दिया। हालांकि, उसके बाद एयरलाइन को कुछ भी नहीं मिला। सीरियम के आंकड़ों के अनुसार, एयरलाइन ने पिछले साल मार्च में एक हफ्ते में 2,084 फ्लाइट ऑपरेट की थी। विमानों के ग्राउंडेड होने के साथ इस साल मार्च तक ये आंकड़ा घटकर 1,642 पर आ गया।

एयरलाइन ने अमेरिका की कोर्ट में याचिका लगाई
इंडियन एविएशन रेगुलेटर के आंकड़ों से पता चलता है कि फ्लाइट के ग्राउंडेड होने के कारण मार्च में गो फर्स्ट की बाजार हिस्सेदारी जनवरी में 8.4% से गिरकर 6.9% हो गई। एयरलाइन ने इसे लेकर अमेरिका की डेलावेयर कोर्ट में पिटीशन भी दाखिल की है। एयरलाइन ने दावा किया है कि अगर इंजनों की जल्द सप्लाई नहीं की गई तो वह दिवालिया हो जाएगी।

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सवाल: विमानन क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब:
 गो-फर्स्ट का घरेलू मार्केट में हिस्सा करीब 7% पर है। अभी प्रतिदिन कुल विमान यात्रियों की संख्या 4 लाख है। ऐसे में 28 से 30 हजार विमान यात्रियों का बोझ दूसरी एयरलाइंस पर जाएगा। उन्हें संभालना चुनौती साबित होगा। हालांकि, जब पायलटों की डिमांड बढ़ रही है तो अचानक एक कंपनी के दिवालिया होने से वर्कफोर्स की उपलब्धता बढ़ेगी।

सवाल: ऐसे हालात में केंद्र सरकार क्या करेगी?
जवाब:
 मई 2014 में भाजपा सरकार आने के बाद दिसंबर में स्पाइसजेट संकट में घिर गई थी। हालांकि, जैसे-तैसे वह अपना अस्तित्व बचा सकी। इसी तरह, अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज की हालत खस्ता हो गई थी। मगर सरकार सीधे मदद से बचती रही।

इस बार भी सीधे हस्तक्षेप के आसार कम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अब पूरी सक्रियता के साथ स्थिति संभालनी होगी। प्रैट एंड व्हिटनी की जवाबदेही सुनिश्चित करने के अलावा डीजीसीए को दूसरी एयरलाइंस में नई क्षमता विकसित करने की आपात तैयारी करनी होगी।

सवाल: गो-फर्स्ट क्या कदम उठा रही है?
जवाब:
 कंपनी ने कहा कि वह स्ट्रेटजिक इन्वेस्टर तलाश रही है। कई निवेशकों से बातचीत चल रही है। एयरलाइन की योजना थी कि इन गर्मियों में हर हफ्ते 1,538 फ्लाइट्स ऑपरेट करेगी, जो पिछले साल के मुकाबले 40 कम है।

यह सीजन 26 मार्च से शुरू हो चुका है, 28 अक्टूबर तक चलेगा। एयरलाइंस की खस्ता हालत 31 मार्च को ही सामने आई थी जब वह अपने 10 विमानों का लीज किराया दो महीने से नहीं दे पा रही थी। इसकी शिकायत भी डीजीसीए के पास पहुंच चुकी थी।

2005 में मुंबई से अहमदाबाद के लिए उड़ी थी पहली फ्लाइट
गो फर्स्ट वाडिया ग्रुप की बजट एयरलाइन है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार 29 अप्रैल 2004 को गो फर्स्ट की शुरुआत हुई थी। नवंबर 2005 में मुंबई से अहमदाबाद के लिए पहली फ्लाइट ऑपरेट की। एयरलाइन के बेड़े में 59 विमान शामिल हैं।

इनमें से 54 विमान A320 NEO और 5 विमान A320 CEO हैं। गो फर्स्ट 35 डेस्टिनेशन के लिए अपनी फ्लाइट ऑपरेट करता है। इसमें से 27 डोमेस्टिक और 8 इंटरनेशनल डेस्टिनेशन शामिल हैं। एयरलाइन ने साल 2021 में अपने ब्रांड नाम को गोएयर से बदलकर गो फर्स्ट कर दिया था।