भोपाल में मंत्रालय में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने कई अहम फैसले लिए। कैबिनेट ने भूमि स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के 46 लाख ग्रामीणों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम” शुरू करने का फैसला भी किया है। योजनाओं का फीडबैक लेने 4865 युवा तैनात होंगे। चयन प्रक्रिया अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से होगी।
कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा
- हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन होगा
- कुल 4865 युवाओं की नियुक्ति होगी
- युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलेगा
एक साल के अनुबंध पर नियुक्ति होगी इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं का फीडबैक और जमीनी रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इस कार्यक्रम पर करीब 170 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
भूमि स्वामित्व योजना क्या है
- भूमि स्वामित्व योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने 2020 में की थी।
- ड्रोन सर्वे के जरिए गांवों की जमीन का सीमांकन किया जाता है।
- ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड (स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं।
- इससे भूमि विवाद कम होते हैं।
- बैंक से लोन लेना आसान होता है।
सात विभागों की योजनाएं 2031 तक जारी
कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इनमें शामिल हैं: महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग, छात्रवृत्ति योजनाएं, आरडीएसएस योजना, दिव्यांगों को प्रोफेशनल टैक्स में छूट, स्टार्टअप के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान।
स्वास्थ्य केंद्रों में 51 पदों पर भर्ती
मैहर, निमरानी और कैमोर में कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय (ESIC) खोलने के लिए डॉक्टर और स्टाफ सहित 51 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। साथ ही सिंगरौली के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय के लिए पद सृजित किए जाएंगे।
‘एक जिला–एक उत्पाद’ को बढ़ावा
स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने के लिए एक जिला–एक उत्पाद योजना के तहत 37.50 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की गई है।
कैबिनेट से पहले इन मुद्दों पर भी चर्चा
- गेहूं खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल (2585 MSP + 40 बोनस) पर करने का निर्णय।
- उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस।
- पचमढ़ी को जर्मनी से ग्रीन डेस्टिनेशन प्रमाणन मिलने पर बधाई
- देश के टॉप-10 आईएएस में चयनित MP के युवाओं को बधाई
कैबिनेट के प्रमुख निर्णय
- मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम: कार्यक्रम के तीन साल के क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। प्रक्रिया तय करने का अधिकार लोक सेवा प्रबंधन विभाग को दिया गया है।
- निःशक्तजनों को वृत्तिकर से छूट: मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम 1995 के तहत निःशक्तजनों को वृत्तिकर (प्रोफेशनल टैक्स) से छूट की व्यवस्था को 31 मार्च 2030 तक जारी रखने की मंजूरी।
- एक जिला–एक उत्पाद परियोजना: प्रदेश के 7 जिलों में पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण, विकास और विपणन के लिए अगले 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रुपए स्वीकृत।
- सिंगरौली में व्यवहार न्यायालय: जिला सिंगरौली के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 नए पदों के सृजन को मंजूरी।
- तीन नए ईएसआईसी औषधालय: मैहर, कैमोर और निमरानी में कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) के 3 नए औषधालय खोलने और 51 पदों के सृजन को स्वीकृति।
- डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम में अंशपूंजी: रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत केंद्रांश पर देय एसजीएसटी राशि को वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में देने का निर्णय।
- लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों की निरंतरता: 16वें केंद्रीय वित्त आयोग (1 अप्रैल 2026–31 मार्च 2031) की अवधि तक लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और योजनाओं की निरंतरता के लिए 63 करोड़ 76 लाख रुपए स्वीकृत।
- खनिज क्षेत्रों के विकास के लिए राशि: ग्रामीण, पिछड़े और खनिज क्षेत्रों में अवसंरचना, पेयजल और सड़क विकास के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रुपए मंजूर।
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास योजनाएं: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के संचालन और निरंतरता के लिए 7,127 करोड़ 38 लाख रुपए स्वीकृत। इसमें पीएम पोषण योजना भी शामिल है।
- योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग: संचालनालय की 10 योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपए मंजूर। इसमें राज्य नीति आयोग और विकास प्राधिकरणों से जुड़े कार्य शामिल हैं।
- जनजातीय क्षेत्र विकास और छात्रवृत्ति: अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित विभिन्न योजनाओं के लिए 1,645 करोड़ रुपए स्वीकृत।
- महिला एवं बाल विकास योजनाएं: महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3,773 करोड़ रुपए मंजूर।
- स्टार्टअप और निवेश संवर्धन: एमएसएमई विभाग की निवेश संवर्धन योजना और स्टार्टअप नीति के क्रियान्वयन के लिए अगले 5 वर्षों में 11,361 करोड़ रुपए स्वीकृत।