पाकिस्तानी फौज से बेहतर हथियार आतंकियों के पास:16 दिन में 21 सैनिक मारे गए; अब अमेरिकी वेपन्स से हमला कर रहा तालिबान

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य के खुर्रम जिले में शनिवार को आतंकी हमले की दो घटनाएं हुईं। इसके पहले गुरुवार को 8 टीचर्स के अलावा 7 फौजी मारे गए थे। 16 दिन में अकेले इस राज्य में कुल 21 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं। जवाब में सिर्फ दो ही आतंकी मारे गए हैं।

पाकिस्तानी फौज अफगानिस्तान बॉर्डर से लगे इस राज्य में दो महीने से ऑपरेशन चला रही है। अब तक तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का पलड़ा ही भारी नजर आ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि TTP के पास पाकिस्तानी फौज से बेहतर वेपन्स और सर्पोटिंग हथियार मौजूद हैं। ये वही हथियार हैं जो अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से लौटते वक्त अमेरिकी फौज छोड़कर गई थी।

सऊदी अरब के अखबार की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

  • सऊदी अरब के अखबार ‘द नेशनल’ की एक इन्वेस्टिगेशन में कुछ अहम बातों का खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक पाकिस्तान के सिक्योरिटी ऑफिशियल्स अब ये मानने पर मजबूर हो गए हैं कि तालिबान (अफगान और पाकिस्तान) के मामले में उनकी हर चाल उल्टी साबित हो रही है।
  • TTP और अफगान तालिबान कंधे से कंधा मिलाकर पाकिस्तान की फौज पर हमले कर रहे हैं। हर रोज पुलिस और फौज के लोग मारे जा रहे हैं। इतना ही नहीं बलूचिस्तान के विद्रोही संगठन भी इनके साथ हाथ मिला चुके हैं। लिहाजा, अब फौज को जबरदस्त नुकसान हो रहा है।
  • पाकिस्तान के सिक्योरिटी एक्सपर्ट रफीकउल्लाह काकर ने कहा- तालिबान को हवाई हमलों का खतरा नहीं रहा, क्योंकि अमेरिका यहां से वापस जा चुका है। ट्रैडीशनल वॉर फेयर में हथियारों की क्वॉलिटी बेहद अहम होती है, इस मामले में अब दहशतगर्द बाजी मार चुके हैं। आप बताइए जो हथियार, इक्विपमेंट्स और टेक्नोलॉजी उनके पास हैं, वो पाकिस्तान की आर्मी के पास कहां है? वो आए दिन हमला करते हैं और पाकिस्तान के फौजी मारे जाते हैं।

आतंकी नहीं, फौज भाग रही है

  • काकर ने आगे कहा- तालिबान अब जहां चाहे, वहां हमले कर रहे हैं। गुरुवार को ही उन्होंने 7 सैनिक मार डाले। अब आतंकियों के बजाय फौज को जान के लाले पड़ गए हैं। फरवरी में मस्जिद पर हमला हुआ। 107 पुलिसवाले मारे गए। हर रोज सैनिक मारे जा रहे हैं। एक साल में 37% आतंकी हमले बढ़ गए। इस दौरान 419 लोग मारे गए। इनमें 65% सैनिक या पुलिसवाले थे।
  • रिपोर्ट के मुताबिक दावा किया जाता है कि अमेरिका करीब 7.2 अरब डॉलर के हथियार और इक्विपमेंट्स अफगानिस्तान में छोड़कर गया। हकीकत में यह अमाउंट करीब दोगुना है। जरा सोचिए, पाकिस्तान का सालाना डिफेंस बजट भी इतना नहीं है। तालिबान अगर फौज को निशाना बना रहे हैं तो बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) उन जगहों को निशाना बना रही है, जहां चीन ने इन्वेस्टमेंट किया है। चीनी भी मारे जा रहे हैं। पाकिस्तानी फौज बेबस है।
  • हमलों की वजह से चीन और पाकिस्तान के रिश्ते भी बिगड़ते जा रहे हैं। दो साल में 23 चीनी नागरिक आतंकी हमलों में मारे जा चुके हैं।

एक साल में 118 पुलिसवाले मारे गए

  • पाकिस्तान की होम मिनिस्ट्री के मुताबिक अकेले खैबर पख्तूनख्वा में 2022 में आतंकी हमलों में 118 पुलिसकर्मी मारे गए। दो मिलिट्री बेस पर हमले हुए। 29 सैनिक मारे गए।
  • रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी फौज के पास वैसे छोटे हथियार नहीं हैं, जो अब आतंकियों के पास हैं। उनके पास नाइट विजन गॉगल्स, हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और दूसरे हाईटेक इक्विपमेंट्स हैं। उन्हें दूसरे देशों से सीक्रेट ट्रेनिंग मिली। पाकिस्तान के पास इतना बजट ही नहीं कि वो बराबरी कर सके। बजट मिलता भी है तो वो अब सिर्फ चीन से हथियार खरीद सकता है, भारत के दबाव की वजह से इजराइल या अमेरिका उसे वेपन्स बेचेंगे नहीं।
  • काकर कहते हैं- जरा सोचिए आतंकियों के पास इस वक्त M24 स्नाइपर राइफल्स, M4 कार्बाइन विथ ट्राइजोकोन विजन स्कोप और M-16A4 राइफल्स हैं। पाकिस्तान के पास हैवी मशीनगन हैं, लेकिन इन्हें शिफ्ट करने में ही बहुत वक्त और मैन पॉवर लगता है। इस तरह के करीब 6 लाख वेपन्स तालिबान के पास हैं। पिछले दिनों फौज को आतंकियों की एक जगह पर मौजूदगी की खबर मिल गई थी। फौज हमले के लिए निकली, इस दौरान आतंकियों ने अटैक कर दिया, कितने सैनिक मारे गए? आज तक नहीं बताया गया। खबर ही गायब कर दी गई।

रूसी और अमेरिकी हथियारों से लैस
1989 में रूसी सेना की वापसी के बाद पहले मुजाहिद्दीन और बाद में तालिबानी रूसी AK 47 के साथ T-55 टैंकों पर सवार नजर आते थे और अब यही तालिबानी लड़ाके अमेरिकी बख्तरबंद फौजी गाड़ी हमवी (humvee) पर अमेरिका में ही बनी M16 राइफल के साथ नजर आ रहे हैं।

पिछले साल जारी फोर्ब्स मैगजीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अफगानिस्तान में 8,84,311 लेटेस्ट मिलिट्री इक्विपमेंट्स छोड़कर गया है। इनमें M16 राइफल, M4 कार्बाइन, 82 mm मोर्टार लॉन्चर जैसे इंफेंट्री हथियारों के साथ humvee जैसे सैन्य वाहन, ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर, A29 लड़ाकू विमान, नाइट विजन, कम्युनिकेशन और सर्विलांस में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस भी शामिल हैं।

तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ जंग छेड़ने वाले अमेरिका ने 2003 के बाद से अफगान सेना और पुलिस को हथियार और ट्रेनिंग पर 83 अरब डॉलर, यानी 6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे। अफगानिस्तान में छूटे सैनिक साजो-सामान में 5.99 लाख से ज्यादा खालिस हथियार, 76 हजार से ज्यादा सैन्य वाहन और 208 सैन्य विमान शामिल हैं। अब इनका इस्तेमाल अफगान और पाकिस्तान तालिबान कर रहे हैं।

सच छिपा रहा बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन
खास बात यह है कि जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन अफगानिस्तान के लिए खरीदे गए हथियार और सैन्य उपकरणों की ऑडिट रिपोर्ट्स को छिपा रहा है। फोर्ब्स डॉट कॉम के मुताबिक-इस संबंध में दो अहम रिपोर्ट्स को पिछले साल की शुरुआत में ही सरकारी वेबसाइट्स से गायब कर दिया गया था।

अमेरिका में सरकारी खर्च से जुड़े वॉच डॉग ओपन द बुक्स डॉट कॉम (openthebooks.com) ने यह दोनों रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर पोस्ट की हैं।

ब्लैक मार्केट में हेलिकॉप्टर और फाइटर जेट्स के पार्ट्स

  • अमेरिकी लड़ाकू विमानों को लेकर विशेषज्ञों की दो राय रही हैं। पहली-तालिबान इन अमेरिकी एयरक्राफ्ट्स और हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल नहीं जानता, लेकिन इसके पार्ट्स को चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को काफी महंगे दामों में बेच सकता है। सच्चाई ये है कि ऐसा चोरी-छिपे ही सही, हो भी रहा है। अफगान सेना को दिए गए कुछ विमानों का फ्यूल टैंक ही 35 हजार डॉलर, यानी करीब 25 लाख रुपए में बेचा जा सकता है।
  • कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि PC-12 टोही और निगरानी विमान लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। इन विमानों का तालिबान के कब्जे में होना बेहद परेशान करने वाला है। जनवरी में जब पाकिस्तान और अफगान फौज आमने-सामने थीं, तो दो दिन की झड़प में 16 पाकिस्तानी फौजी मारे गए थे। तब पाकिस्तान को पता लगा था कि तालिबान अब उन पर कितने भारी पड़ने वाले हैं और ऐसा क्यों हो रहा है।
  • 2017 में अमेरिकी सेना को 1250 करोड़ रुपए के स्कैन ईगल ड्रोन गंवाने पड़े। ये ड्रोन अफगान नेशनल आर्मी को अपनी रक्षा के लिए दिए गए थे। अफगान सेना ने इनका फौरन इस्तेमाल तो नहीं किया, लेकिन कुछ महीनों बाद पता चला कि अफगान सेना को दिए गए ड्रोन लापता हैं।

तालिबान ने राज छिपाया भी नहीं
पिछले साल यानी 2022 के मार्च महीने में तालिबान ने काबुल में अमेरिकी गाड़ियों और रूसी हेलिकॉप्टरों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया था। परेड के जरिए तालिबान ने दिखाया था कि कैसे उसने खुद को आतंकी संगठन से एक परमानेंट आर्मी में तब्दील किया है।

इस परेड में 250 नए ट्रेंड फौजी भी शामिल हुए थे। ये ट्रेंड पायलट भी हैं। परेड में अमेरिकी M117 बख्तरबंद (M117 armoured security vehicles) शामिल थे। तालिबानी लड़ाकों के हाथ में एम4 असॉल्ट राइफल्स थीं। ऊपर MI-17 हेलिकॉप्टर गश्त कर रहे थे।