International Day of Zero Tolerance for Female Genital Mutilation 2021: जानें महिला जननांग विकृति के लिए शून्य सहनशीलता दिवस का इतिहास

आज दुनियाभर में महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। इसे पहली बार 6 फरवरी, 2003 ई को मनाया गया था। इसके बाद से हर साल 6 फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य महिला जननांग विकृति कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और लोगों में महिलाओं के प्रति सम्मान और स्नेह पैदा करना है। दुनिया के कई देशों में यह कुप्रथा जारी है। खासकर अफ्रीका महादेश में सबसे अधिक है। इसके लिए यह निर्धारित किया गया है कि 2030 तक महिला जननांग विकृति कुप्रथा को समाप्त किया जाए। आइए, महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस के इतिहास और महत्व को जानते हैं-

क्या है इतिहास

इसकी शुरुआत नाइजीरिया की पूर्व राष्ट्रपति और महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता चलाने वाली प्रवक्ता Stella Obasanjo ने की। जब उन्होंने 6 फरवरी, 2003 को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता दिवस मनाने की घोषणा की। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसे स्वीकार किया। इसके लिए 2007 में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने महिला जननांग विकृति उत्पीड़न के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया था। साथ ही सन 2012 ई में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक प्रस्ताव पारित कर 6 फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित कर दिया।

समाज में महिला और पुरुष दोनों को सामान अधिकार मिलना चाहिए। सदियों से महिलाओं के खिलाफ कई कुप्रथा चली आ रही है, जिन्हें तत्काल समाप्त करने की जरूरत है। महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं। इसके लिए महिलाओं को समाज में सम्मान मिलना चाहिए। इस कुप्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। इस कुप्रथा से महिलाओं का मानसिक और शारीरिक सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है।