चचेरे भाई ने 8 साल पहले कहा था मार डालूंगा:प्रियंका के बहन-भाई ने बताई दहशत की कहानी; गांव के एक घर में छिपकर बचाई अपनी जान

मोना के मन में सिर्फ संपत्ति का लालच था। इसलिए वह प्रियंका और उसकी दत्तक मां मुकेश से नफरत करने लगा था। 8 साल पहले उसने पूरे परिवार के सामने कहा था कि अगर प्रापर्टी किसी और को देने की सोची भी तो बोरे में भरकर जाओगी और टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। अब उसने अपनी कही बात सच करके दिखा दी।

यह बात मृतक प्रियंका की चचेरी बहन खुशी ने बताई। उसने कहा,”लगभग 8 साल पहले उनकी बुआ के घर एक कार्यक्रम था। इसमें वह सभी लोग भी शामिल हुए थे। तब बातचीत के दौरान उनकी बुआ मुकेश ने कहा था कि जो मेरी सेवा करेगा, हम उसे प्रापर्टी देंगे। प्रियंका हमारी बेटी है और हम अपना सब इसके नाम कर देंगे। यह बात हत्या के मुख्य आरोपी मोना को बुरी लगी थी और उसने उसी समय हत्या करने की बात कह दी थी।”

गांव में अपनी बुआ के घर रुकी थी मुकेश

हत्यारोपी मोना 8 साल पहले छोटा था और नाबालिग भी था। उस समय उसकी बातों को लोगों ने बचकाना समझकर नजर अंदाज कर दिया। लेकिन मृतका मुकेश को यह बात काफी चुभी थी और इसके बाद से ही उसने अपने ससुराल जाना कम कर दिया था। वह दिल्ली में ही अपने पति सुरेश और दत्तक पुत्री प्रियंका के साथ रहने लगी थी।

सुरेश चंद्र की हार्ट अटैक से मौत के बाद वह बेमन से अलीगढ़ आई, लेकिन मुकेश को यह डर था कि उन दोनों मां-बेटी के साथ कोई अनहोनी न हो जाए। इसलिए वह अपने ससुराल में रहने के बजाय कैमथल गांव में रहने वाली अपनी बुआ के घर पर ही रुक रहीं थी। घटना के दिन ही वह अपने ससुराल गईं थी, लेकिन अपने पति के ही पुराने मकान में रुकी। यह मकान पूरी तरह से खंडहर हो चुका था, लेकिन वह वहीं पर थीं।

बचपन में मोना को लिया था गोद

डीटीसी ड्राइवर सुरेश चंद्र और उनकी पत्नी मुकेश की कोई संतान नहीं थी। इसलिए 20 साल पहले उन्होंने अपने भाई धर्मवीर के बेटे मोना को ही गोद लेना चाहा था। काफी दिनों तक उन्होंने उसे अपने बेटे की तरह पाला। लेकिन कुछ दिन बाद ही मोना की मां ने मुकेश से अपना बच्चा ले लिया और अपशब्द भी बोले।

अपनी देवरानी की बात से आहत होकर मुकेश अपने मायके गढ़ी सूजरमल आ गई थी। उस समय उनके पिता जिंदा थे। उन्होंने सारी बात अपने पिता को बताई, तब उनके पिता ने अपने बेटे भोला से कहा, अपनी बहन को अपनी बेटी दे दे। इसके बाद भोला ने अपनी दो बेटियों में से बड़ी बेटी प्रियंका अपनी बहन को गोद दे दी थी।

मोना ने किया था ताऊ का अंतिम संस्कार

हत्यारोपी मोना की नजर शुरू से ही अपने ताऊ ताई की संपत्ति पर थी। इसलिए उसने दिल्ली के बजाय अलीगढ़ में अंतिम संस्कार का दबाव बनाया और फिर सुरेश चंद्र के शव को अलीगढ़ लाया। यहां पर मोना ने ही सुरेश चंद्र का अंतिम संस्कार किया और तेरहवीं के दिन उसकी ही पगड़ी रस्म हुई थी। लेकिन उनके मन में लालच था, जिसके बाद उसने इस घटना को अंजाम दिया।

सारी प्लानिंग करके बैठा था मोना

मृतका मुकेश की छोटी भतीजी कृष्णा अपने चचेरे भाई बबलू के साथ तेरहवीं के कार्यक्रम में शामिल हुई थी। लेकिन उन्हें वहां का माहौल बदला हुआ लग रहा था। इसलिए वह जिस घर में तेरहवीं का कार्यक्रम चल रहा था, वहां के बजाय अपनी बुआ के मकान में रूकीं। यह घर पूरी तरह से खंडहर हो गया था।

तेरहवीं संस्कार में भी उसने 13 के बजाय 12 ब्राह्मण ही बैठाए थे। जिन्हें देखकर भी परिवार के लोगों को संदेह हो रहा था। प्रियंका की बहन ने बताया, वह सभी ब्राह्मण युवा थे और उसमें से कोई भी ऐसा नहीं लग रहा था कि वह तेरहवीं भोज में शामिल होने आए हैं। सभी एक-दूसरे से इशारेबाजी कर रहे थे।

बाइक से उतारकर की थी प्रियंका की हत्या

प्रियंका की सगी बहन कृष्णा भी तेरहवीं कार्यक्रम में अपने चचेरे भाई बबलू के साथ शामिल हुई थी। ब्राह्मण भोज के बाद वह तीनों बाइक पर बैठकर दिल्ली के लिए निकलने वाले थे। तभी मोना वहां पर आ गया और उसने प्रियंका को उतरने के लिए कहा। इसके बाद वह खींचकर मोना को अंदर ले गया।

उसने अंदर उसे बाल पकड़कर जमीन पर ढकेल दिया और कुछ ही मिनटों के अंदर गोली की आवाज सुनाई पड़ी। इसके बाद बबलू ने अपनी बहन कृष्णा को वहां से भगाया और खुद भी वहां से भागने की कोशिश की। लेकिन आरोपियों ने उसे भी पकड़ लिया और पीटना शुरू कर दिया। इसके थोड़ी देर बाद ही आरोपियों ने उनकी बुआ मुकेश की भी गोली मारकर हत्या कर दी।

दशहत के वह एक घंटे, छिपकर बचाई जान

कृष्णा और बबलू ने बताया, आरोपी उनकी बुआ और बहन के साथ उन दोनों को भी मारना चाहते थे। गोली की आवाज सुनने के बाद बबलू ने अपनी बहन कृष्णा को वहां से भागने के लिए कहा और खुद भी वहां से भागना शुरू कर दिया। कृष्णा गांव के ही एक मकान में छिप गई और बबलू खेतों से होता हुआ दूसरी तरफ भागा।

लेकिन पीछे से आरोपी दो बाइकों में सवार होकर आए और उसे पकड़ लिया। उन्होंने उसे पीटना शुरू किया और गोली मारनी चाहिए। लेकिन उस समय उनका तमंचा नहीं चला। रास्ते में गोरई के पास उसने बाइक से कूदकर अपनी जान बचाई और वहां मौजूद लोगों से मदद मांगी। इसके बाद वह पुलिस लेकर गांव पहुंचा, तब तक उनकी बहन के साथ बुआ की भी हत्या हो चुकी थी।

संपत्ति सरकार ले-ले, लेकिन फांसी दिलाए

प्रियंका को जन्म देने वाली मां और उसकी चिता को आग देने वाले पिता, इस घटना को याद करके रो पड़ते हैं। उनका कहना है, उन्हें प्रॉपर्टी का मोह नहीं है, जिस प्रॉपर्टी ने उनकी बहन और बेटी की जान ले ली। ऐसी प्रॉपर्टी का वह क्या करेंगे। सरकार इस प्रॉपर्टी को ले ले, बस जल्द से जल्द सभी आरोपियों को फांसी की सजा दिलाई। तभी उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी बहन बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी।

घर के बाहर तैनात है पुलिस

परिवार के लोगों को यह डर है कि आरोपी उनकी बेटियों और बेटे को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में पुलिस की ओर से उनके घर के बाहर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस के दो जवान 24 घंटे हथियार के साथ उनके घर के बाहर तैनात किए गए हैं।