देशभर में जन्माष्टमी का उत्सव:मथुरा में जन्मभूमि रोशन; उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में कान्हा का भुट्‌टे और नींबू से शृंगार

देश के कई शहरों में बुधवार को ही जन्माष्टमी मनाई जा रही है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान रोशनी से सजाया गया है। देश के अन्य कृष्ण मंदिरों में भी जन्मोत्सव की तैयारियां की गई हैं।

उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में भी जन्माष्टमी बुधवार को मनाई गई। इस दौरान कान्हा का नींबू और भुट्‌टे से शृंगार किया गया।

वहीं देशभर में स्कूलों में बच्चे कान्हा की ड्रेस में पहुंचे। कई जगह मटकी फोड़, दही हांडी के प्रोग्राम हुए वहीं केरल में उरियादी मनाई गई।

मथुरा में जन्मस्थान, वृंदावन में बांके बिहारी, द्वारका में द्वारकाधीश सहित बड़े कृष्ण मंदिरों में 7 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। यहां 7 और 8 सितंबर की दरमियानी रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव होगा।

गुजरात के राजकोट में मंगलवार से ही जन्माष्टमी का मेला शुरू हो गया है। ये मेला 9 सितंबर तक जारी रहेगा।

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस साल दही हांडी उत्सव के लिए प्रो गोविंदा नाम से एक कॉम्पिटिशन आयोजित किया है, जिसमें जीतने वाले को कैश प्राइज दिया जाएगा।

बनारस में आज ही मना रहे जन्माष्टमी
बनारस में जन्माष्टमी 6 सितंबर को ही मनाई जा रही है। हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के डीन प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री का कहना है कि व्रत और पर्वों की तारीख तय करने के लिए धर्म सिंधु और निर्णय सिंधु नाम के ग्रंथों की मदद ली जाती है। इन दोनों ही ग्रंथों में जन्माष्टमी के लिए कहा गया है कि जब आधी रात में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र हो, तब कृष्ण जन्मोत्सव मनाएं। 6-7 सितंबर की रात में कृष्ण जन्म पर्व मनाएं।

ज्यादातर त्योहार दो दिन क्यों होते हैं?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हिंदू पंचांग की तिथियां अंग्रेजी कैलंडर के मुताबिक नहीं होतीं। अक्सर तिथियां दोपहर या शाम से शुरू होकर अगले दिन तक होती हैं। जिस तिथि में दिनभर व्रत के बाद पूजन का महत्व होता है, वे ज्यादातर उदया तिथि में मनाई जाती हैं।

जिन तिथियों में रात की पूजा का महत्व ज्यादा होता है, उनमें उदया तिथि का महत्व नहीं देखा जाता। जैसे दीपावली में अगर अमावस्या एक दिन पहले ही शुरू हो गई हो तो अगले दिन उदया तिथि की अमावस्या की बजाय एक दिन पहले की अमावस्या पर रात में लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।