जहर खाकर जान देने वाले गैंगस्टर की इनसाइड स्टोरी:झांसी में भतीजा बोला- सल्फास गेहूं में रखने ला रहे थे, पेट्रोल खत्म हुआ तो मजबूरी में चोरी करना पड़ा

झांसी में पेट्रोल चोरी करते हुए पकड़े गए गैंगस्टर उमेश अहिरवार (35) ने जहर खाकर सुसाइड कर लिया था। इसमें सबसे बड़ा सवाल था कि चोरी करते वक्त गैंगस्टर के पास जहर कहां से आया। इसका जवाब तलाशने के लिए दैनिक भास्कर गैंगस्टर के घर पहुंचा।

वहां मृतक के भतीजे धीरज कुमार से बात की। धीरज ने बताया- मेरे चाचा गेहूं में रखने के लिए सल्फास लाने गए थे। जब लोगों ने उनको पेट्रोल निकालते हुए पकड़ा तो वे डर गए। चाचा 3 माह पहले ही जेल से छूटे थे और दोबारा जेल नहीं जाना चाहते थे। जेल जाने के डर से उन्होंने वहीं सल्फास खा ली। उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

सल्फास लाने निकले थे, आई मौत की खबर
मृतक गैंगस्टर उमेश अहिरवार प्रेमनगर थाना क्षेत्र के खातीबाबा में रहता था। उसके भतीजे धीरज कुमार ने बताया कि घर में गेहूं खराब हो रहा था। ऐसे में चाचा उमेश अहिरवार बोले कि सल्फास की गोली रख देंगे तो कीड़े नहीं लगेंगे।

शनिवार सुबह वे घर से बाइक लेकर सल्फास लाने के लिए दुकान पर गए थे। दिनभर वे घर पर नहीं आए। शाम को पुलिस ने बताया कि चाचा ने जहर खा लिया। तब मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां इलाज चल रहा था। फिर शनिवार देर रात चाचा ने दम तोड़ दिया।

बाइक में तेल खत्म हुआ, मजबूरी में निकाला पेट्रोल
भतीजे ने आगे बताया कि चाचा उमेश अहिरवार की मौत के बाद जांच पड़ताल की। तब पता चला कि शाम के वक्त चाचा की बाइक का नंदनपुरा श्मशान घाट के पास पेट्रोल खत्म हो गया था। उनके पास पैसे नहीं थे। लोगों ने मदद नहीं की। मजबूरन वह श्मशान घाट के बाहर खड़ी बाइक से पेट्रोल निकालने लगे। तभी अचानक बाइक का मालिक आ गया और उसने चाचा को पकड़ लिया।

इसके बाद भीड़ एकत्र हो गई और पुलिस को कॉल कर दिया। चाचा 3 माह पहले ही जेल से छूटे थे। जेल जाने के डर से उन्होंने जेब से सल्फास की डिब्बी निकाली और उसमें से एक गोली निगल ली। पुलिस पहुंची तो चाचा को मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया, पर उनकी जान नहीं बच पाई। चाचा के पास से सल्फास की डिब्बी मिली है। हमें चाचा की बाइक मिली तो उसमें पेट्रोल नहीं था।”

9 माह पहले पिता की हुई थी मौत
उमेश के पिता लालाराम अहिरवार की 9 माह पहले जनवरी में मौत हो गई थी। तब उमेश जेल में बंद था। वह पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं आ पाया था। वह करीब दो साल से जेल में बंद था। 3 माह पहले परिवार के लोगों ने किसी तरह उसकी जमानत कराई।

उमेश अहिरवार पर चोरी, गैंगस्टर एक्ट समेत अन्य धाराओं में 15 केस दर्ज थे। घर वाले उसे खूब समझाते थे, लेकिन वो चोरी करने से नहीं मानता था। बड़े भाई प्रीतम का कहना है कि पिता उसको समझाते-समझाते चल बसे, लेकिन उमेश नहीं माना। अब उसने कहा था कि चोरी नहीं करुंगा।

उमेश के 13 और 7 साल का दो बेटा
उमेश अहिरवार शादीशुदा था। उसके दो बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया। 13 साल का बड़ा बेटा कार्तिक और 7 साल का बेटा अभियांस पढ़ते हैं। माैत की खबर से पत्नी शारदा बेहोश हो जा रही। दो भाइयों में उमेश छोटा था। शनिवार देर शाम पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर शव परिजनों के हवाले कर दिया। दो डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने शव का पोस्टमॉर्टम किया। पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी कराई गई है।