‘राम-राम जपना, पराया माल अपना’ सूचना विभाग का मंत्र:योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए पैसा नहीं, मगर सरकार का चेहरा चमकाने और ब्रांडिंग पर करोड़ों खर्च

यूपी सरकार जनता के काम का पैसा खर्च नहीं कर पाती है। जनता के लिए आए 9000 करोड़ केंद्र को वापस कर दिए जाते हैं। लेकिन, सीएम योगी की छवि चमकाने के लिए कुबेर का खजाना भी कम पड़ता जा रहा है। योगी की सरकार में सूचना विभाग से सक्षम फिलहाल कोई भी विभाग नहीं है। जितना भी पैसा आता है, सूचना विभाग न सिर्फ सब कुछ उसको खपा लेता है, बल्कि उसे आया हुआ धन भी कम पड़ जाता है।

मजे की बात ये है कि प्रचार-प्रसार के लिए धन की कोई कमी नहीं, लेकिन उससे जितना योगी की छवि चमकी नहीं, उससे ज्यादा सूचना विभाग के कर्ताओं-धर्ताओं ने मुख्यमंत्री की फजीहत जरूर करा दी। दूसरे प्रदेशों की योजनाओं को यूपी का दिखाकर उन्होंने ‘महाराज’ को तो थोड़ी देर के लिए भले ही खुश कर दिया, लेकिन झूठ के पांव कहां होते हैं। असलियत खुल ही जाती है और यूपी के सीएम की छवि पर उल्टा प्रभाव पड़ता है।

जैसे सूचना विभाग ने ही गोवंश संरक्षण के लिए प्रेस रिलीज के जरिए बड़े बड़े आंकड़े पेश किए थे मगर हकीकत ये है कि बांदा जिले की डीएम को मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए जनता से आर्थिक सहायता की गुहार लगानी पड़ रही है।

सूचना के ‘सुपारीबाज’ अफसर

एक बड़े अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सूचना विभाग हर साल बजट पर बजट बढ़ाए जा रहा है लेकिन, जिस तरह से ये विभाग काम कर रहा है। इससे मुख्यमंत्री की छवि चमकी तो नहीं बल्कि ऐसा लग रहा है कि सूचना विभाग अपने मुख्यमंत्री की इमेज खराब करने की ‘सुपारी’ लेकर बैठा है।

कई बार विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इमेज ब्रांडिंग तो नहीं हो पाई उल्टा, सरकार की ग्लोबल जगहंसाई जरूर हो गई। केन्द्र और हर राज्य की सरकार अपने काम काज को जनता के बीच पहुंचाने का काम करती हैं ताकि चुनाव में जनता को बता सकें कि सरकार ने क्या क्या काम किया है।

मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट पैसे की कमी से जूझ रहा

ऐसे प्रचार-प्रसार का क्या फायदा जब मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए जनता से पैसा मांगना पड़े। बांदा डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने ट्वीट (X) करके बताया कि जनपद के अधिकारियों व कर्मचारियों के एक दिन के वेतन और बांदा के निवासियों के जन सहयोग से ‘गौ संरक्षण एवं संवर्धन कोष’ में एक करोड़ से अधिक की धनराशि जमा की है। साथ ही कोष का ‘क्यूआर कोड’ जारी कर आम जनता से स्वेच्छा से कोष में दान करने की अपील की है।

‘राम राम जपना, पराया माल अपना’ को सूक्त वाक्य बना चुका है सूचना विभाग

किसान हरनाम सिंह की तस्वीर लगाकर उत्तर प्रदेश की सरकार का चेहरा चमकाने की यूपी सूचना विभाग की कोशिश पर घड़ों पानी फिर गया जब किसान ने ही सामने आकर सच बता दिया कि उनका काफी पैसा सरकार के पास बकाया है। उनके साथी किसानों का भी सरकार ने भुगतान नहीं किया है। इतना ही नहीं किसान हरनाम सिंह छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार की योजनाओं के भी पोस्टर बॉय थे।

मुख्यमंत्री समीक्षा बैठकों और अपने दौरों के जरिए ये साबित करने में लगे हैं कि प्रदेश में सब कुछ बढ़िया है मगर अफसरों ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर रखा है। लगभग हर विभाग के ऐसे ही हालात हैं, यूपी के इतिहास में पहली बार लोक निर्माण विभाग के काम ना कर पाने की वजह से 9000 करोड़ रूपए केन्द्र को वापस चले गए। जबकि सूचना विभाग अनुपूरक पर अनुपूरक बजट मांगता रहता है।