भारत में सबसे ज्यादा आवारा कुत्ते UP में:लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद में रोज डॉग बाइट के 600 केस; साबुन-धूप रेबीज के दुश्मन

बहराइच के हरदी थाने के तीन गांवों में 26 सितंबर मंगलवार को एक पागल कुत्ते ने 13 लोगों को काट लिया। उन्नाव के अखलाक नगर गांव में मंगलवार को कुत्ते ने 3 साल के बच्चे पर हमला कर उसे घायल कर दिया। इस इलाके में हाल ही में कुत्तों ने एक दर्जन से ज्यादा लोगों को काटा है।

उत्तर प्रदेश में एक दिन में कुत्ते के काटने के केवल ये दो मामले नहीं हैं। गाजियाबाद में इसी साल 5 सितंबर को 14 साल के किशोर की रेबीज से मौत हो गई थी। उसे डेढ़ महीने पहले पड़ोसी के पालतू कुत्ते ने काटा था।

बच्चे ने घर में किसी को इस बारे में नहीं बताया था। उसे बचाया नहीं जा सका। पिछले साल लखनऊ में पिटबुल डॉग ने अपनी बुजुर्ग मालकिन को ही मार डाला। गाजियाबाद में पिटबुल डॉग के काटने पर बच्चे के चेहरे पर 150 टांके वाली खबर देशभर में वायरल हुई थी।

प्रदेश के कई जिलों में रोज डॉग बाइट के 200 से लेकर 400 केस तक सामने आ रहे हैं।

लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ में सबसे ज्यादा मामले

राजधानी लखनऊ में पिछले एक साल में करीब 1500 लोगों को कुत्तों ने काटा है। फिलहाल यहां डॉग बाइट के रोजाना लगभग 200 मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, सरकारी विभागों के पास इसका कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है।

लखनऊ के बाद गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ में कुत्ते के काटने की सबसे ज्यादा घटनाएं हो रही हैं। इन तीनों जिलों में शुक्रवार 22 सितंबर को 671 लोगों को कुत्तों के काटने के मामले सामने आए। हापुड़ में 287, गाजियाबाद में 240 और नोएडा में 144 लोगों को कुत्तों ने काटा। गाजियाबाद में हर महीने कुत्ते के काटने के 3000 से ज्यादा मरीज जिला अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। इसमें प्राइवेट क्लीनिक से टीका लगवाने वालों का आंकड़ा शामिल नहीं है।

दुनिया में सबसे ज्यादा आवारा डॉग्स अपने यहां, यूपी सबसे आगे

एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब 3 करोड़ पालतू और 3.5 करोड़ आवारा डॉग्स हैं। दुनिया में आवारा डॉग्स के सबसे ज्यादा हमले के मामले भारत में सामने आते हैं और देश में सबसे ज्यादा आवारा डॉग उत्तर प्रदेश में ही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2022 में महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद यूपी में सबसे ज्यादा डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं।

बहुत कमजोर होता है रेबीज का वायरस, कुछ सेकेंड में हो जाती मौत

रेबीज वायरस जितना खतरनाक है, उतना ही कमजोर भी। यह वायरस शरीर के बाहर आने के बाद खुली हवा में महज कुछ सेकेंड तक ही जिंदा रह सकता है। यानी अगर किसी डॉग की लार में रेबीज वायरस है तो उसकी लार सूखने के बाद वह वायरस मर जाएगा और किसी को संक्रमित नहीं कर सकेगा।

बता दें कि पालतू हों या आवारा सभी कुत्तों में रेबीज का वायरस नहीं होता। किसी भी जानवर में रेबीज का वायरस तभी आएगा जब उसे रेबीज से इन्फेक्टेड कोई जानवर काट ले।

रेबीज वायरस इतना कमजोर कि साबुन और धूप दिखाने पर होता खत्म

कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन से धोने के लिए कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि रेबीज का वायरस इतना कमजोर होता है कि ज्यादातर मामलों में यह साबुन या डिटर्जेंट से धोने पर खत्म हो जाता है। इसके अलावा यह सूरज की रोशनी यानी अल्ट्रावायलेट रेज के संपर्क में आने पर भी जिंदा नहीं रह पाता। वैसे तो किसी जानवर के काटने पर रेबीज का टीका लगवाना सुरक्षित तरीका है।