ज्ञानवापी में 54वें दिन ASI परखेगी पत्थरों की नक्काशी:तहखाना-दीवार-गुंबद और छतों में मिले साक्ष्यों की बनाएंगे सूची, 6 को ASI पेश करेगी रिपोर्ट

ज्ञानवापी में 54 दिन सर्वे के दौरान मिले साक्ष्यों और स्मृतियों को ASI संरक्षित करेगा। संरक्षण के लिए परिसर के स्थाई निर्माण के अलावा बरामद वस्तुओं को सूचीबद्ध करेगा। इस सूची को जिलाधिकारी कार्यालय और जिला न्यायालय को सौंपेगा। ASI को अभी जिला जज के आदेश की प्रति नहीं मिली है लेकिन उस दिशा में अधिकारियों ने काम शुरू कर दिया है। ASI की ओर 6 अक्तूबर को रिपोर्ट जिला जज की अदालत में सौंपी जाएगी। सूत्रों की माने तो ASI के अधिकारी 28 दिन बढ़ाने की अपील भी दाखिल करेंगे।

शुक्रवार को ASI की टीम 54वें दिन ज्ञानवापी परिसर में सर्वे की कार्रवाई में पत्थरों की नक्काशी पर फोकस करेगी। इन पत्थरों पर अंकित कलाकृतियों और उनके अनुमानित वर्ष का आकलन लगाया जाएगा। पिछले 50 दिनों में लगातार जांच के बाद कई पत्थरों पर निशान अंकित मिले हैं। पश्चिमी दीवार की ओर एक रास्ता सा भी समझ आया है। वहीं दीवारों की डिजाइन में कुछ अंदरखाने लिखा भी है। हालांकि अब लगातार कुछ दिन तक ASI कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी।

एक टीम अंदर और दूसरी लैब में जुटी

ऐतिहासिक साक्ष्य जुटाने में लगी ASI सुबह 9 बजे से मशीनों के अलावा कई उपकरण लेकर टीम के सदस्य अंदर हैं और जांच जारी है। एक टीम परिसर के अंदर ऐतिहासिक साक्ष्य संकलन में जुटी है तो बाहर दूसरी टीम भवन की दीवारों और कारीगरी के अनुसार निर्मित वर्ष का पता लगा रही है। भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) की टीम 54वें दिन अहम साक्ष्य जुटाने के लिए सर्वे का आगाज कर रही है। जिला न्यायालय की ओर से चार सप्ताह का समय मिलने के बाद एएसआई ने सर्वे की रफ्तार बढ़ा दी है और दस्तावेजी काम भी प्रगति पर है। ज्ञानवापी में वजू-स्थल को छोड़कर संपूर्ण परिसर का सर्वे के लिए कोर्ट से निर्धारित अब महज 7 दिन बचे हैं। इन दिनों में सर्वे को पूरा कर ASI अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। परिसर के अंदर एएसआई प्रथम चरण का सर्वे लगभग पूरा हो गया है। साक्ष्य जुटाना, अवशेष सहेजना और सैंपल लेकर उन्हें लैब भेजने का काम टीम कर चुकी है। फिर भी एक सप्ताह में सर्वे पूरा करना एएसआई के लिए बड़ी चुनौती है, जिसके लिए टीम के सदस्य बढ़ाए गए हैं।

एएसआई फिर मांगेगी एक महीने का समय

वहीं सूत्रों की माने तो एएसआई फिर सर्वे के दिन बढ़ाने की गुहार करेगी। कोर्ट में 6 अक्तूबर को रिपोर्ट पेश करने के साथ एएसआई लगभग एक महीने के समय का अप्लीकेशन देगी। बताया जाएगा कि अभी तक इसकी दीवारों की कारीगरी और भित्तिचित्रों को काशी विश्वनाथ मंदिर के पुराने परिसर से भी मिलाया जा रहा है।

वहीं सर्वे के मिलने वाले ऐतिहासिक साक्ष्यों पर एएसआई की मुहर के बाद जिला प्रशासन संरक्षण करेगा। साक्ष्य अभी ज्ञानवापी परिसर में जरूर रहेंगे लेकिन इस पर जिला प्रशासन का मालिकाना हक होगा। डीएम की निगरानी में इन साक्ष्यों को सूची बनाकर एएसआई की टीम सुपुर्दगी देगी। साक्ष्य की सुपुर्दगी मिलने के बाद डीएम की गठित टीम इसकी हर दिन निगरानी करेगी और न्यायालय के आदेश पर साक्ष्य पटल पर पेश करेगी।

अब 7 दिन बाद कोर्ट में पेश करेंगे रिपोर्ट

त्रिस्तरीय सुरक्षा के बीच टीम परिसर में ऐतिहासिक संभावनाएं तलाश करने उतरी टीम का सर्वे जारी है। वजूस्थल को छोड़कर संपूर्ण परिसर के सर्वे में जुटी टीम अब तक 330 घंटे से अधिक का सर्वे पूरा कर चुकी है। सर्वे में वाराणसी, पटना, कानपुर, दिल्ली और हैदराबाद की टीमें शामिल हैं। अगले 7 दिनों में टीम को सर्वे पूरा करने का लक्ष्य लेकर टीम विभिन्न पहलुओं पर जांच करेगी। टीम ने सर्वे की रफ्तार बढ़ाने के साथ माह के अंत तक पूरा सर्वे करने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञ तहखाने के अंदर साक्ष्य खंगालने के साथ उसकी सूची भी तैयार करेगा। परिसर के अंदर मिलने वाले साक्ष्य और सर्वे की अलग रिपोर्ट बनेगी, जिसकी एक कापी जिला प्रशासन को भी दी जाएगी।

सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक सर्वे

ज्ञानवापी में साइंटिफिक सर्वे के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम कड़ी सुरक्षा और पुख्ता इंतजाम के बीच ज्ञानवापी परिसर में छह घंटे सर्वे करेगी। गुरुवार को सुबह 8.00 बजे दाखिल टीम के सदस्य वादी-प्रतिवादी वकीलों और पक्षकारों की मौजूदगी में सर्वे शुरू करेंगे। सर्वे लगभग 8:00 बजे शुरू होकर 12.30 बजे तक चलेगा। इसके बाद लंच और नमाज के लिए रोककर फिर 2.30 बजे से दोबारा शुरू करेंगे। सर्वे शाम पांच बजे पूरा होगा, इसके बाद टीम के सदस्य गेस्ट हाउस रवाना होंगे। अब तक ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) सर्वे के लिए स्थानों का निर्धारण हो चुका है।

अब तक टीम ने किया इतना काम

ज्ञानवापी परिसर को 4 सेक्टर में बांटकर चारों तरफ कैमरे लगाए हैं, वीडियोग्राफी की जा रही है। ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार पर सबसे ज्यादा फोकस करते हुए बारीक स्कैनिंग जारी है। पूरे परिसर की पैमाइश, अंदर मिलने वाली आकृतियों और दीवारों की कलाकृतियों की फोटो और वीडियोग्राफी हो चुकी है। दो टीमें तहखाने और दो टीमें बाहरी परिसर में लगी है। सदस्यों ने यूनिट के अनुसार बाहरी दीवार, पश्चिमी दीवार, व्यासजी तहखाना समेत अन्य तहखाने, गुंबद और छतों का गहन अध्ययन किया है। इन जगहों से सैंपल जुटाकर लैब में भेजे और प्राचीनता के लिए पुरातन दस्तावेजों से साक्ष्यों का मिलान जारी है।

जिला कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक अपील

  • 21 जुलाई को वाराणसी की स्थानीय कोर्ट ने ASI को सर्वे करके 4 अगस्त को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था।
  • 24 जुलाई को सुबह 7 बजे सर्वे शुरू हुआ। मुस्लिम पक्ष रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने 26 जुलाई की शाम तक सर्वे पर रोक लगा दी और हाईकोर्ट जाने को कहा।
  • 25, 26, 27 जुलाई को मुस्लिम पक्ष की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। 27 जुलाई को कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया और 3 अगस्त को आदेश देने की बात कही।
  • 3 अगस्त को हाईकोर्ट के जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर ने अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा, ‘न्यायहित में सर्वे जरूरी है। मुझे इस तर्क में कोई दम नहीं दिखता कि बिना दीवार खोदे ASI नतीजे पर नहीं पहुंच सकता।’
  • 3 अगस्त को इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट चला गया। 4 अगस्त को मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज हो गई तब से 29 सितंबर तक सर्वे जारी है।