केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत का खुलासा:मेरी-इलाके की आशा थी CM बनूं; मनोहर के टिकने की नहीं थी उम्मीद, बेटी टिकट से वंचित

हरियाणा के गुरुग्राम से सांसद और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि 2014 में जब हरियाणा में भाजपा की सरकार बनी तो उसमें हमारे इलाके का बड़ा योगदान था। इस समय इलाके के साथ-साथ मेरी भी आशा थी कि मैं CM बन जाऊं, लेकिन पार्टी ने मनोहर लाल को मुख्यमंत्री बना दिया। इससे हमारे इलाके में मायूसी भी हुई। पर ये पार्टी का फैसला था।

पार्टी ने नहीं दी बेटी को टिकट

एक टीवी चैनल के साथ बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने ये भी बताया कि वर्ष 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव में मैंने बेटी आरती राव के लिए रेवाड़ी सीट से टिकट मांगी थी, लेकिन पार्टी ने नहीं दी। पार्टी ने मुझसे किसी और का नाम पूछा तो मैंने 2014 में रणधीर सिंह कापड़ीवास को टिकट दिलाते हुए उनकी मदद की और 2019 में सुनील मुसेपुर को टिकट दिलाई। राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि मेरा मानना है कि अगर 2014 में आरती निर्दलीय भी चुनाव लड़ती तो जीत जाती।

सुनील मुसेपुर की हार को बताया साजिश

केंद्रीय मंत्री ने 2019 में रेवाड़ी सीट पर उनके समर्थित सुनील मुसेपुर की हार पर कहा कि ये सब किसी की शह पर हुआ। मुझे भी ऐसा लगता है। क्योंकि एक नेता को 6 माह तक सस्पेंड किया। इसके बाद उसे किसकी शह पर दोबारा शामिल किया और दो-दो बार चेयरमैन भी बना दिया। जबकि होना ये चाहिए था कम से कम 6 साल के लिए सस्पेंड रखा जाए।

इससे साफ है कि इसमें किसी की शह थी। उनकी इशारा हरियाणा टूरिज्म के चेयरमैन डा. अरविंद यादव की तरफ था। बता दें कि आपसी गुटबाजी के चलते पिछले चुनाव में भाजपा की रेवाड़ी सीट पर हार हुई थी।

मनोहर के कुर्सी पर टिकने की नहीं थी उम्मीद

राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि जब 2019 में मनोहर लाल मुख्यमंत्री बने, उसी दिन से चर्चा शुरू हो गई थी कि ये ज्यादा दिन नहीं रहेंगे। मुख्यमंत्री की रेस में कई बड़े नेताओं के नाम शामिल किए जाने लगे। उनमें एक नाम उनका भी लिया जाने लगा, मेरा मानना है कि ये पार्टी की स्ट्रेटजी थी। ताकि कोई बगावत ना करें।

अहीरवाल के बड़े नेता हैं राव इंद्रजीत सिंह

बता दें कि केंद्रीय राज्यमंत्री राव इन्द्रजीत सिंह दक्षिणी हरियाणा (अहीरवाल) के बड़े नेता है। उनका गुरुग्राम से लेकर नांगल चौधरी तक खुद का प्रभाव है। वे 5 बार सांसद बन चुके है, जबकि 3 बार MLA रहे है। अपने राजनीति जीवन में उन्हें 1987 और 1996 में दो बार विधानसभा चुनाव और एक बार 1999 में लोकसभा चुनाव में हार भी मिली। फिलहाल उनकी बेटी आरती राव अपने पिता की राजनीति विरासत को संभालने के लिए पूरी तरह सक्रिय है।