देवरिया हत्याकांड में अब ब्राह्मण V/S यादव की सियासत:अखिलेश यादव परिवारों से मिलने आ रहे, नेहा राठौर गा रहीं ‘ई पटदारी काहे बाबा…कइसन तोहार लाचारी बा’

देवरिया हत्याकांड अब पूरी तरह से सियासी हो चुका है। रंजिश-मर्डर-सहानुभूति से शुरू हुआ देवरिया कांड अब जुबानी जंग-राजनीति और यादव बनाम ब्राह्मण बन चुका है। सत्यप्रकाश दुबे के परिवार के साथ पूरी BJP दिख रही है, वहीं सपा पार्टी प्रेम चंद के सपोर्ट में आ गई है।

16 अक्टूबर को देवरिया में अखिलेश यादव आ रहे हैं। 3 दिन पहले सपा का डेलिगेशन यहां आकर परिवार से मुलाकात कर चुका है। सपा प्रदेश कार्यालय ने जानकारी सांझा करते हुए बताया कि अखिलेश यादव देवरिया के फतेहपुर में दोनों मृतक परिवारों से मिलकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

दरअसल, BJP इस हत्याकांड के बाद दुबे परिवार के साथ खड़े होकर 2024 लोकसभा चुनाव से पहले नाराज ब्राह्मण वोटों को सहेजने में लगी है। बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी खुद को यूपी में एक बड़े ब्राह्मण चेहरे के रुप में स्थापित करने में लगे हैं। लेकिन, इस बीच अखिलेश यादव ने यहां भी अपना PDA फॉर्मूला अपना लिया। वहीं नेहा राठौर ने भी देवरियां कांड पर एक गाना लॉन्च कर दिया है।

देवेश ने सीएम योगी को ब्रह्मभोज में पहुंचने की अपील की
जबकि, आज यानी कि शुक्रवार को देवरिया कतरारी स्थित इंदिरा मैरिज हाल में दुबे परिवार का ब्रह्मभोज है। इस बीच गुरुवार को सत्यप्रकाश दुबे के बेटे देवेश गर्ग ने सीएम योगी से अपने परिवार के सदस्यों के ब्रह्मभोज में शामिल होने की अपील की है। आज भी इस ब्रह्मभोज सभा में पूर्वांचल के सभी ​जिलों से काफी अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना है।

बीजेपी की प्रेम चंद के परिवार से दूरी
सीएम योगी से लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, गोरखपुर सांसद रवि किशन, देवरिया सांसद रमापति राम त्रिपाठी, विधायक शलभ मणि त्रिपाठी समेत तमाम बीजेपी के मंत्री और नेता मृतक सत्यप्रकाश दुबे के बेटे देवेश गर्ग के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। बीजेपी नेता घटना में घायल सत्यप्रकाश दुबे के बेटे अनमोल को देखने गोरखपुर के बीआरडी भी पहुंचे। लेकिन, अब तक बीजेपी का कोई भी नेता मृतक प्रेम चंद यादव के परिवार से नहीं मिला।

देवरिया रुद्रपुर के लोगों का शुरू से यह आरोप है कि सरकार यानी कि बीजेपी इस मामले में एक तरफा कार्रवाई कर रही है। जबकि, हत्याएं दोनों घरों में हुई हैं। दोनों घरों के बच्चे अनाथ हुए हैं। बावजूद इसके भाजपा के लोगों की संवदेनाएं भी सिर्फ दुबे परिवार के साथ ही देखने को मिल रही हैं।

संवेदनाए जातियों के आधार पर बंटी
रुद्रपुर इलाके के लोगों से लेकर अगर इस मामले को सोशल मीडिया पर देखें तो इस मामले में लोगों की संवेदनाएं भी जातियों के आधार पर बंट गई है। मृतक प्रेम यादव की हत्या के बाद उसके परिवार के सदस्यों समेत 21 आरोपी इस मामले में जेल जा चुके हैं। प्रेम यादव के घर की पैमाइश हो चुकी है। तहसीलदार कोर्ट ने बेदखली का आदेश भी जारी कर दिया है। ऐसे में कभी भी अब प्रेम यादव के घर पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त किया जा सकता है।

चुनाव पर पड़ सकता है असर
हालांकि, इसे लेकर सभी वर्गों के लोगों को काफी नाराजगी भी है। इसका असर प्रेम यादव के घर की पैमाइश के दौरान ही दिख गया। पैमाइश के दौरान पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने गए गए। पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। गांव में अफरा-तफरी मच गई। उसी रात एक महीने के लिए धारा 144 भी लागू कर दी गई।

शाम 5 बजे के बाद गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक है। हत्याकांड के 11 दिन बाद भी फतेहपुर गांव पुलिस छावनी बना हुआ है। ग्रामीण दहशत में हैं। इसे लेकर यादव समाज सहित अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों में प्रशासन और सरकार के प्रति गुस्सा भी है। सोशल मीडिया पर इसका जवाब चुनाव में वोट के जरिए देने की बात कही जा रही है।