चीन ने LAC पर सैन्य अड्‌डे बनाए:लद्दाख से अरुणाचल तक बॉर्डर पर गांव बसाने के नाम पर चौकियां बनाईं; इनमें 34,400 करोड़ खर्च

चीन की सेना लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक LAC के उस पार गांव बसाने के नाम पर सैन्य अड्‌डे बना रही है। इन गांवों का इन्फ्रास्ट्रक्चर इस तरह से बनाया जा रहा है कि इनका इस्तेमाल सैन्य अड्डों के रूप में किया जा सके। गांवों में बनाए गए वॉच टावर, बड़े वेयर हाउस और कॉन्क्रीट के ढांचे इसी ओर इशारा करते हैं। LAC की रखवाली से जुड़ी सुरक्षा एजेंसियों ने इस बारे में केंद्र सरकार को विस्तृत जानकारी दी है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी के पास चीन ने ‘शियाओकांग’ नाम से 628 गांव बसा लिए हैं। शियाओकांग का मतलब चीनी भाषा में ‘समृद्ध’ होता है। इनमें से ज्यादातर गांव उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगे बॉर्डर के पास हैं। इन गांवों में निगरानी चौकियां, स्टोरेज और हेलीपैड जैसी सुविधाएं बना ली गई हैं।

चीन के जवाब में भारत की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’
भारत ने वाइब्रेट विलेज योजना बनाई है। इसके तहत 2,900 गांवों काे जोड़ा जाएगा। सभी गांव एलएसी पर हैं। वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करना चीनी क्षेत्र के मुकाबले कठिन हैं। इसलिए सरकार उन गांवों को चिह्नित कर चुकी है, जहां से पलायन हुआ है। ऐसे ज्यादातर गांव उत्तराखंड में हैं। इन्हें फिर से बसाना भी वाइब्रेंट विलेज योजना का हिस्सा है।

चीन ने हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ा
भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी सेना शांतिकाल के दौरान इन गांवों को निगरानी चौकियों के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है। जबकि सैन्य टकराव की स्थिति में इन गांवों को अग्रिम छावनियों की तरह इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि इन गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ दिया गया है। उत्तर, मध्य और पूर्वी सेक्टर में सड़कें बनाने का काम तेजी से चल रहा है।

नए गांव बसाने पर खर्च किए 34,400 करोड़ रु.
सुरक्षा एजेंसियों की जानकारी के अनुसार, चीन ने नए गांव बसाने पर 30 अरब युआन यानी करीब 34,400 करोड़ रु. खर्च किए हैं। इसके अलावा इन गांवों में रहने वाले लोगों को विशेष सब्सि​डी भी दी जा रही है, जो 55,000 से 85,000 रु. सालाना है।