Rajya Sabha Election 2020: यूपी से राज्यसभा चुनाव के लिए सपा प्रत्याशी प्रो. राम गोपाल यादव ने किया नामांकन

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए बुधवार को समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव ने नामांकन पत्र दाखिल किया। राज्यसभा की जिन 10 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं उनमें चार सीटें समाजवादी पार्टी के पास हैं, लेकिन अब विधायकों की संख्या के अनुसार उसे केवल एक सीट से ही संतोष करना होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला द्वाार चुनाव कार्यक्रम जारी करते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रो. राम गोपाल यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था।

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए घोषित कार्यक्रम के अनुसार 20 अक्टूबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद बुधवार से नामांकन शुरू हो गए। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रो. राम गोपाल यादव ने नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता बड़ी संख्या में पहुंचे। नामांकन के वक्त विधानमंडल दल कार्यालय में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, महबूब अली सहित तमाम नेता मौजूद रहे। नामांकन करने के बाद रामगोपाल यादव ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को राज्यसभा के लिए पांचवीं बार उम्मीदवार बनाने के लिए धन्यवाद। देश और प्रदेश की सारी जनता दुखी है। उन्होंने कहा कि आज ऐसी कोई बात नहीं कहना चाहता जो सत्ताधारी दल के मन को दुखे।

नौ नवंबर को होगा मतदान : यूपी से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने 13 अक्टूबर को की थी। इन 10 सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना 20 अक्टूबर को जारी हो गई है। राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। नामांकन 27 अक्टूबर तक भरे जाएंगे। 28 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की होगी। दो नवंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। नौ नवंबर को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा। उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

मतदान की संभावना कम : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए होने वाले चुनाव में मतदान की संभावना कम ही दिख रही है। विपक्ष दलों में एकजुटता न होने व किसी एक दल पर पर्याप्त विधायक नहीं होने के कारण शक्ति प्रदर्शन जैसी स्थिति शायद ही उत्पन्न हो पाए। यह भी माना जा रहा है कि सभी विपक्षी दल अपने बागियों से आहत हैं। बगावत बढ़ने की आशंका से भी वोटिंग से बचने की कोशिश होगी।