Depression Treatment: खाने की ये हेल्दी चीज़ आपको दिला सकती है डिप्रेशन से छुटकारा!

 Depression Treatment: अवसाद यानी डिप्रेशन पिछले कुछ समय में एक आम बीमारी बन गया है। खासतौर पर पिछले साल शुरू हुई महामारी से लगे लॉकडाउन और फिर शारीरिक दूरी बनाने की वजह से कई लोग बिल्कुल अकेले पड़ गए और डिप्रेशन का शिकार हो गए। साथ ही कोरोना वायरस संक्रमण से गंभीर बीमारी और मौत के डर ने भी दुनियाभर में कई लोगों को डिप्रेशन की ओर धकेल दिया।

आंकड़े बताते हैं कि कोरोना वायरस की तरह डिप्रेशन भी 2020 में तेज़ी से बढ़ा है। इसमें कोई शक़ नहीं कि अवसाद एक महत्वपूर्ण मानसिक स्थिति है, जिसके लिए दवा के साथ निरंतर परामर्श की ज़रूरत पड़ती है। हालांकि, कई रिसर्च ये साबित कर चुकी हैं कि कुछ ऐसी भी खाने की चीज़ें हैं, जिनसे दिमाग़ पर सकारात्मक असर पड़ता है और जल्द ही मूड ठीक हो जाता है।

सुबह-सुबह खाएं ये एक चीज़

दही एक ऐसी चीज़ है जो न सिर्फ आपके सुबह के नाश्ते को परफेक्ट बनाता है, बल्कि अवसाद में भी मददगार साबित होता है। शोधकर्ताओं ने एक स्टडी में पाया कि सुबह नाश्ते में दही खाने से आपको अवसाद से लड़ने में मदद मिलती है।

दही सेहत के लिए कितना अच्छा है ये हम सब जानते हैं। दही खाने से आप जंक या फिर अस्वस्थ खाना खाने से भी बचते हैं। इस प्रोबायोटिक खाने को नाश्ते में खाने का एक और कारण यह भी है कि दही कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित एक शोध बताता है कि यह प्रोबायोटिक डिप्रेशन से छुटकारा पाने में भी मदद कर सकता है।

इस शोध के लीड प्रोफेसर अलबान गॉलटियर ने बताया कि अवसाद के लक्षणों से राहत के लिए उपलब्ध इलाज बहुत अच्छे नहीं हैं और उनसे कई तरह के साइडइफेक्ट्स भी होते हैं। इसलिए इसका वैकल्पिक उपचार होना भी ज़रूरी है।

चूहों पर की रिसर्च

अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने चूहों को तनाव के उच्च स्तर तक उजागर किया जब तक कि उन्होंने अवसाद के लक्षण दिखाना शुरू नहीं कर दिए। फिर उन्होंने चूहों में पहले और बाद में आंत के बैक्टीरिया के स्तर की तुलना की। जिसमें आंत के बैक्टीरिया और मानसिक स्वास्थ्य के स्तर के बीच एक स्पष्ट संबंध पाया गया।

इसमें दिखा गया कि लैक्टोबैसिलस, यानि जो बैक्टीरिया आंत के लिए अच्छा माना जाता है कि तुलना क्यूनुरेनाइन (वो बैक्टीरिया जो अवसाद को बढ़ावा देता है) की मात्रा बढ़ती जाती है। ऐसे में जब इन चूहों की डाइट में लैक्टोबैसिलस की मात्रा बढ़ाई गई तो उनमें फौरन सुधार देखा गया। लैक्टोबैसिलस रक्त में क्यूनुरेनाइन के स्तर को संतुलित करने में मदद करता है। जैसे ही आंत में लैक्टोबैसिलस का स्तर गिरना शुरू होता है, आप अवसाद के लक्षण महसूस कर सकते हैं।

हालांकि, इस रिसर्च में अब भी अधिक विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है। साथ ही इसे अभी तक सिर्फ चूहों पर ही आज़माया गया है, जिससे सिर्फ ये पता चल सका कि वे अवसाद में हैं, लेकिन चूहे क्या महसूस कर रहे थे ये साफ नहीं है।