Madhya Pradesh By-Elections : चुनाव आयोग और भाजपा प्रत्याशियों ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

राजनीतिक रैलियों में कोविड गाइडलाइन के उल्लंघन को लेकर दिए गए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के आदेश के खिलाफ चुनाव आयोग और भाजपा के दो प्रत्याशी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं मुन्नालाल गोयल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर इस आदेश पर रोक लगाने की मांग की।

ग्वालियर के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने चुनाव आयोग द्वारा भी सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने की पुष्टि की है। ग्वालियर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर और ग्वालियर पूर्व विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी मुन्नालाल गोयल की ओर से याचिका में तर्क दिया गया है कि वर्चुअल सभा का आदेश देकर हाई कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर काम किया है।

याचिका में कहा गया है कि ऐसा आदेश देने का कोर्ट के पास अधिकार नहीं है। यह कार्य चुनाव आयोग को करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट से इस याचिका पर 23 अक्टूबर को तत्काल सुनवाई की मांग की गई है। दरअसल, मध्य प्रदेश के 28 विधानसभा क्षेत्रों में हो रहे उपचुनाव में मात्र ग्वालियर-चंबल अंचल में सभाओं के लिए कड़ी शर्तों के साथ चुनाव आयोग की अनुमति की अनिवार्यता से संबंधित हाई कोर्ट के बुधवार को जारी इस आदेश ने तूल पकड़ लिया था।

इसी वजह से गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया की दो-दो सभाएं रद कर दी गई थीं। शिवराज सिंह ने गुरुवार दोपहर कहा था कि हम न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन इस फैसले के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय जा रहे हैं, क्योंकि एक देश में दो विधान जैसी स्थिति हो गई है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के एक हिस्से में रैली एवं सभा हो सकती है, दूसरे हिस्से में नहीं हो सकती।

उन्‍होंने कहा कि बिहार में सभाएं हो रही हैं लेकिन मध्य प्रदेश के एक हिस्से में सभाएं नहीं हो सकतीं। ताजा शर्तों की वजह से मुख्यमंत्री की अशोक नगर के शाढोरा और भांडेर के बराच में सभाएं रद हो गई थीं। गौरतलब है कि अधिवक्ता आशीष प्रताप सिंह ने हाई कोर्ट में राजनीतिक कार्यक्रमों में हो रही भीड़ को प्रतिबंधित करने के लिए जनहित याचिका दायर की है। हाई कोर्ट ने बुधवार को राजनीतिक सभाओं के लिए नियम बनाए थे और शर्तें भी कड़ी कर दी थीं।