लोकसभा चुनाव के बाद MVA की पहली बैठक:कांग्रेस, NCP शरद और शिवसेना उद्धव गुट के नेता शामिल होंगे; 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे

लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन से ज्यादा सीटें लाने के बाद महाविकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं की शनिवार को मुंबई के वाईबी चव्हाण सेंटर में बैठक हो रही है। इसमें कांग्रेस, NCP (SCP) और शिवसेना (UBT) के नेता शामिल होंगे।

दरअसल, लोकसभा चुनाव में गठबंधन ने महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 31 सीटें जीती हैं, जबकि भाजपा गठबंधन को 17 सीटें मिली हैं। इसके बाद गठबंधन एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में एक साथ उतरने पर फैसला कर सकता है।

महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों पर अक्टूबर में चुनाव हो सकते हैं। फिलहाल राज्य में शिवसेना शिंदे गुट, भाजपा और NCP अजित पवार गुट की सरकार है।

लोकसभा चुनाव में MVA को मिली सफलता के बाद अब पार्टी विधानसभा चुनाव में भी यही प्रदर्शन दोहराना चाहती है। मीटिंग के बाद कांग्रेस, NCP (SCP) और शिवसेना (UBT) के नेता 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसमें गठबंधन पर कुछ बड़ा फैसला आ सकता है।

MVA में मतभेद की चर्चा क्यों?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाना पटोले ने दावा किया था कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य में बड़ी ताकत बनकर उभरी है। उन्होंने सहयोगियों से चर्चा के बिना कहा था कि आने वाले चुनाव में कांग्रेस 150 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

उधर, शिवसेना (UBT) ने भी सहयोगियों से चर्चा के बिना विधानपरिषद की 4 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। इन सीटों पर 26 जून को चुनाव होना है।

उद्धव गुट के फैसले पर कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की थी। नाना पटोले ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात के लिए समय भी मांगा था, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया था। हालांकि, शरद पवार की मध्यस्थता से मामला सुलझ गया था।

लोकसभा में 288 विधानसभा क्षेत्रों में से 150 पर इंडिया का वोट ज्यादा
लोकसभा के नतीजाें को देखें तो 288 विधानसभा क्षेत्रों में से 150 पर इंडिया का वोट ज्यादा रहा। सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार ने अजित के 30 विधायकों को टार्गेट करते हुए उनके खिलाफ मजबूत प्रत्याशी तय किए हैं। अजित गुट के कुछ विधायक फिर पवार पास लौटना चाहते हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद अजित की बैठक में 5 विधायक गैरहाजिर भी रहे थे।

एनडीए के घटक दलों में विधानसभा सीटों की शेयरिंग पर विवाद संभव
महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 4 महीने बचा है। सूत्रों के अनुसार शिंदे या अजित गुट के विधायक तुरंत दल नहीं बदलेंगे। वे 4 महीनों में सत्ता मे रहकर क्षेत्र के लिए बड़ा फंड लेंगे। विधानसभा चुनाव करीब आने पर दल-बदल दिख सकता है।