अली फजल के साथ श्वेता की है स्ट्रॉन्ग बॉन्डिंग:बोलीं- मिर्जापुर के किरदार गोलू से बाहर निकलने के लिए थेरेपी का सहारा लिया

सीरीज मिर्जापुर का तीसरा सीजन 5 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम कर दिया गया है। पिछले सीजन की तरह इस सीजन में भी गोलू गुप्ता के रोल में श्वेता त्रिपाठी खूब जची हैं। सीरीज में उनके साथ पंकज त्रिपाठी, अली फजल, विजय वर्मा जैसे कलाकार भी दिखाई दिए हैं।

सवाल- आपने खुद को मिर्जापुर के रोल के लिए कैसे तैयार किया?
जवाब- 
सीरीज में गजगामीनी (गोलू गुप्ता) का किरदार बहुत ही कॉम्प्लेक्स है। सीजन 1 में गोलू के अपने कुछ सपने थे, जिसे वो पूरा करना चाहती थी। लेकिन उससे वो सपने छीन लिए जाते हैं। उन्हीं सपनों के छिन जाने का बदला लेते हुए गोलू को दूसरे सीजन में देखा गया है।

जब सीजन में मैं और अली ने मुन्ना को मारने वाला सीन किया था, तो वो सीन करने के बाद हम दोनों गले लगकर रोने लगे थे। मुझे ये देखकर खुशी होती है कि कैसे दर्शक हमारे किरदारों से इतना कनेक्ट हो जाते हैं कि हमारी फीलिंग्स को समझने लगते हैं।

सीजन 3 में गोलू के किरदार को लेकर मेरे कुछ अलग सपने थे। मैं बिस्तर पर लेटे हुए गोलू की जर्नी और उसके रिश्तों के बारे में सोचती रहती थी।

सीजन 1 की शूटिंग के शुरुआत में कोविड का दौर था। मेरा टेस्ट निगेटिव आया था, लेकिन मैं श्योर थी कि मुझे कोविड है। मैं बीमार अवस्था में शूट नहीं करना चाहती थी, क्योंकि सीरीज में गोलू बीमार नहीं है। मैं प्रॉपर फिट होकर शूट करना चाहती थी। इस तरह की मेहनत मैंने रोल में ढलने के लिए किया था।

सवाल- पहले गोलू शांत स्वभाव की थी। लेकिन पिछले और इस सीजन में वो सर्वाइव करने के लिए किसी भी हद जाने को तैयार है। इस पर क्या कहना है?
जवाब-
 हां, बिल्कुल ऐसा ही है। गोलू को हालात ने मजबूर किया है। इस वजह से वो ऐसा कर रही है। गोलू शुरुआत में ऐसी नहीं थी। लेकिन उसकी जिंदगी में ऐसे इवेंट्स हुए, जिसने उसको पूरी तरह से बदल दिया। इसलिए हमें किसी इंसान को जज करने से पहले सोचना चाहिए कि इंसान जैसा बिहेव कर रहा है, तो क्यों कर रहा है।

मिर्जापुर से मुझे यह सीखने को मिला है कि हमें किसी को पहले जज नहीं कर लेना चाहिए।

OTT की ही देन है कि किरदार का हर रंग चाहे वो कितना भी खुंखार क्यों ना हो, दर्शकों को जरूर पसंद आता है।

सवाल- शूटिंग के वक्त सेट पर माहौल कैसा रहता था?
जवाब- 
इस शो में बहुत शानदार एक्टर्स हैं। सीरीज का डायरेक्शन भी कमाल का है। सेट पर बहुत अच्छा माहौल रहता था। यहां हर एक्टर्स अपने को-एक्टर्स को सपोर्ट करते हैं। सब मिलकर इस सीरीज को परफेक्ट बनाने के लिए काम करते हैं। एक्टिंग के पूरे प्रोसेस में विजय वर्मा ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है।

सीरीज में जितना खून-खराबा देखने को मिला है, रियल लाइफ में हम सब के मन में एक दूसरे के लिए उतना ही प्यार है। दूसरे सीजन की शूटिंग के वक्त को-एक्टर्स ने मेरा बर्थडे सेलिब्रेट किया था। पहले दिव्येंदु केक लेकर पहुंचा था, फिर अली केक लेकर आया था। रियल लाइफ में हमारा रिश्ता बहुत खूबसूरत है। हम सब एक परिवार के जैसे हैं।

सवाल- सेट पर आपकी बॉन्डिंग सबसे ज्यादा किसके साथ स्ट्रॉन्ग है?
जवाब- 
सीरीज में मेरे अधिकतर सीन्स अली फजल और विजय वर्मा के साथ हैं। इस वजह से सेट पर इन्हीं दोनों के साथ सबसे ज्यादा टाइम बिताती हूं।

मैं अली को पिछले 13 साल से जानती हूं। मैंने उसे ग्रो करते हुए देखा है। वहीं, विजय के साथ मैंने मिर्जापुर से पहले भी कई प्रोजेक्ट में साथ काम किया है। विजय एक बहुत ही अच्छे इंसान हैं। मेरी ख्वाहिश है कि मैं आने वाले से समय में विजय के साथ और भी काम कर सकूं।

सवाल- गोलू जैसे किरदार को करने के बाद उस किरदार से निकलने में कितना टाइम लगता है?
जवाब-
 मैं सीजन 2 के वक्त बिल्कुल गोलू की दुनिया में चली गई थी। वहां से निकल ही नहीं पा रही थी। समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे साथ हो क्या रहा है। कुछ अच्छा नहीं लगता था। गोलू के जैसे ही कपड़े पहनने लगी थी। सजना-संवरना भूल गई थी।

इस दौरान मैं और दिव्येंदु एक बाबा के घर पर थे। उस वक्त दिव्येंदु ने एक किस्सा बताया कि वो भी मुन्ना के जैसे रियल लाइफ में बिहेव करने लगा था। तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे साथ भी यही हुआ है। मैं भी रियल लाइफ में गोलू के जैसे बिहेव करने लगी हूं।

एक दिन मैं बनारस में थी। वहां पर मैं सोच रही थी कि सब कुछ लाइफ में परफेक्ट है, फिर क्यों अच्छा नहीं लग रहा था। तभी एहसास हुआ कि मैं श्वेता नहीं बल्कि गोलू के जैसी जिंदगी जी रही हूं।

चीजें इतनी बढ़ गई थीं कि मुझे थेरेपी का सहारा लेना पड़ा। थेरेपिस्ट ने इतनी अच्छी ट्रिक बताई जिसकी बदौलत मैं गोलू के किरदार से बाहर निकल पाई।

वहीं, सीजन 3 की शूटिंग के दौरान मैंने किरदार में से IN और OUT करना सीख लिया था।