राजस्थान में कुछ दिनों में ही 3 लाख लोग बेरोजगार:800 फैक्ट्रियों पर लटका ताला, बिजनेसमैन बोले- दो महीने में 2 हजार करोड़ डूबे

राजस्थान में बीते दो महीने में 800 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं और करीब 3 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित जिला जोधपुर हैं।

यहां के हैंडीक्राफ्ट, टेक्सटाइल, मसाला और ग्वार गम जैसी इंडस्ट्री को हर साल 2 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दरअसल, मालवाहक जहाजों पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण शिपिंग कंपनियों ने राजस्थान का माल विदेश भेजने का भाड़ा कई गुना बढ़ा दिया है। इस कारण सैकड़ों करोड़ के ऑर्डर कैंसिल कर दिए हैं।

40 फीसदी घटा बिजनेस, लगातार हो रहा नुकसान

राजस्थान में हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्ट सबसे ज्यादा जोधपुर फिर जयपुर, रतनगढ़, सरदारशहर से होता है। यहां बनने वाला लकड़ी-लोहे का फर्नीचर, मार्बल के छोटे आइटम्स, बोन कारीगरी के आइटम्स, पेंटिंग्स, डेकोरेटिव आइटम्स, लेदर फर्नीचर, बैग्स, तकिए और अन्य कपड़ों से बने आइटम्स एक्सपोर्ट होते हैं। सालाना कारोबार 5000 से 6,000 करोड़ के बीच है।

विदेश की कई नामी कंपनियां 2 महीने पहले ऑर्डर देती हैं। माल तैयार होने के बाद पोर्ट पर जाता है, फिर शिपिंग लाइन (मालवाहक जहाजों) के जरिए विदेशों तक पहुंचता है। पिछले 2 महीने में यह कारोबार 40 फीसदी घटा है। केवल 4000 करोड़ का ही कारोबार बचा है।

क्यों विदेशी कंपनियां नहीं खरीद रही राजस्थान का हैंडीक्राफ्ट?
जयपुर के हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर व इंडियन एक्सपोर्ट प्रमोट काउंसिल ऑफ हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) के चेयरमैन दिलीप वैद्य ने बताया कि राजस्थान के 2 हजार एक्सपोर्टर रजिस्टर्ड हैं। हैंडीक्राफ्ट में राजस्थान फर्नीचर का सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता है।

वर्तमान में हूती विद्रोहियों के कारण समस्या खड़ी हो गई है। एशिया को यूरोप और अमेरिका से जोड़ने वाले लाल सागर के समुद्री मार्ग स्वेज कैनाल पर जितने भी मालवाहक जहाज जा रहे हैं, उन पर यमन के विद्रोही यानी हूती लगातार मिसाइलों से हमले कर रहे हैं।

अब मालवाहक जहाजों को रास्ता बदलना पड़ रहा है, इससे फ्रांस-इटली-इंग्लैंड जैसे शहर की राजस्थान से समुद्री दूरी दोगुनी हो गई है। ऐसे में मालवाहक कंपनियों ने अपना भाड़ा (शिपमेंट फ्रेट) भी गई गुना तक बढ़ा दिया है। पहले एक कंटेनर को भेजने के 500 डॉलर लगते थे, अब उसका किराया 4000 डॉलर तक पहुंच गया है।

चीन-वियतनाम-इंडोनेशिया से माल खरीद रही कंपनियां

भाड़ा महंगा होने के कारण यूरोप की जो कंपनियां पहले राजस्थान से माल खरीदती थीं वो वियतनाम, इंडोनेशिया और चीन जैसे देशों से माल खरीद रही हैं। वहां से उन्हें कम रेट में फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट आइटम मिल रहे हैं। इससे बड़ी कंपनियों ने ऑर्डर देने ही बंद कर दिए हैं।

जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष नरेश बोथरा ने बताया कि जोधपुर हैंडीक्राफ्ट प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से तीन लाख लोगों को रोजगार देता है इसमें भारी कमी आ गई है। हालत यह है कि सभी फैक्ट्रियों से लेबर कम हो गई है। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है। अब स्थितियां नहीं संभली तो इस महीने (जुलाई) में 30 प्रतिशत और कमी होगी।

एक्सपोर्टर अजय शर्मा ने बताया कि सप्लायर और एक्सपोर्टर मिलाकर 800 फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। इस बिजनेस में सप्लायर ज्यादा हैं, ऑर्डर नहीं है और माल जा नहीं पा रहा तो सप्लायर माल सप्लाई कहां करें। फैक्ट्रियों में काम बंद होने से प्रदेशभर में 3 लाख वर्कर प्रभावित हो रहे हैं।

जोधपुर की एक हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट कंपनी सैफरोन आर्ट के किशन ने बताया कि अभी लेबर बहुत कम है। पहले मेरे अंडर में 30 लोग काम करते थे, अब केवल 8 लोग ही हैं। सीधे तौर पर 80 फीसदी वर्कर काम छोड़ चुके हैं। उनके लिए काम नहीं है, इसलिए वे घर लौट चुके हैं या फिर कहीं और नौकरी कर रहे हैं।

राजस्थान की टेक्सटाइल, मसाला और ग्वार गम इंडस्ट्री भी हो रही प्रभावित
टेक्स्टाइल व्यवसायी उमेश लीला ने बताया कि जोधपुर में टेक्सटाइल और खादी के कई इनडायरेक्ट एक्सपोर्टर हैं। यानी यहां से जो माल बनता है, वो पहले सूरत, मुंबई या अन्य शहरों में जाता है। वहां की कंपनियां उसे आगे विदेशों में एक्सपोर्ट करती हैं।

लेकिन कंटेनर का भाड़ा बढ़ने से यहां के टेक्सटाइल व्यापारियों का मार्जिन कम हो गया है। टर्नओवर डाउन हो चुका है। जोधपुर से अब मात्र 40 कंटेनर एक्सपोर्ट हो रहे हैं। छोटे व्यापारियों ने तो अपना एक्सपोर्ट बंद कर दिया है।

ग्वार गम एक्सपोर्टर श्याम कमल शर्मा ने बताया कि ग्वार गम एक्सपोर्ट करने के लिए कंटेनर का भाड़ा 700 डॉलर से 3 हजार डॉलर हो गया है। इससे ग्वार के भाव प्रति किलो पर 20 रुपए बढ़ गए हैं। ग्वार गम के फिक्स प्राइज पर बायर होते हैं। सीधे तौर पर हमें एक कंटेनर पर चार लाख का नुकसान हो रहा है।

श्याम कमल के अनुसार असम में पहाड़ी क्षेत्र होने से वहां की राज्य सरकार के एक्सपोर्टर्स को सब्सिडी देती है। राजस्थान के एक्सपोर्टर भी विषम परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, लेकिन हमें सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही।