New Education Policy 2020: बस्ते का बोझ कम करेगा यूपी बोर्ड, 50 फीसद तक की होगी कटौती

स्कूली बच्चों पर बस्तों का बोझ कम करने की चर्चा कई वर्षों से होती आई है लेकिन अब इस पर अमल की बारी है। देश में नई शिक्षा नीति के साथ कदमताल करने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने कदम बढ़ा दिया है। सभी शैक्षिक संस्थानों को पाठ्यक्रम घटाकर बस्ते का बोझ कम करना है। बोर्ड ने भी पाठ्यक्रम समितियों का गठन करके इस मंथन शुरू कर दिया है कि आखिर आगे चलकर पाठ्यक्रम और कितना कम किया जा सकता है। अटकलें लग रही हैं कि 50 फीसद तक की कटौती की जा सकती है। हालांकि शासन के निर्देश पर बोर्ड प्रशासन कोरोना संक्रमण काल में 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम पहले ही घटा चुका है।

देश में नई शिक्षा नीति लागू होनी है। इसके पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाना है। अहम बोर्डों में शुमार यूपी बोर्ड पर सभी की निगाहें लगी हैं कि वह नीति के तहत क्या बदलाव करता है। वैसे बोर्ड में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। कुछ विषयों का इसी साल तो कुछ की पढ़ाई बदले पाठ्यक्रम के अनुसार अगले साल से शुरू होनी है। ऐसे में संकेत हैं कि बोर्ड प्रशासन एनसीईआरटी की राह पर ही चलेगा। वहीं, बोर्ड सचिव अपने स्तर से भी पाठ्यक्रम में होने वाले संभावित बदलावों पर मंथन करा रहे हैं। इसके लिए पाठ्यक्रम समितियों का गठन किया गया है, समितियां अलग-अलग विषयों में क्या जोड़ा और घटाया जा सकता है इस पर मंथन कर रही हैं।

कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष समय पर स्कूल-कालेज नहीं खुल सके थे। शासन ने पाठ्यक्रम घटाने का आदेश दिया तो 30 प्रतिशत की कटौती इसी वर्ष से लागू की गई है। माना जा रहा था कि कोरोना से निजात मिलने पर पूरा पाठ्यक्रम लागू होगा लेकिन, नई शिक्षा नीति की वजह से पाठ्यक्रम कम करने की कवायद चल रही है। विषय विशेषज्ञ इस पर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेंगे। यह कटौती चालीस से पचास प्रतिशत तक हो सकती है।

यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि उन्हें शासन या एनसीईआरटी से पाठ्यक्रम कम करने का निर्देश नहीं मिला है फिर भी नई नीति को अमल में लाने के लिए बोर्ड स्तर पर समितियां गठित हुई हैं। यदि आगे पाठ्यक्रम कम करने की बारी आती है तो विशेषज्ञों की रिपोर्ट को प्रेषित कर देंगे।