क्या इंडियन मुजाहिदीन ही है जैश-उल-हिंद? दिल्ली पुलिस जल्द कर सकती है अहम खुलासा

जैश-उल-हिंद आखिर कहां का आतंकी संगठन है और इसे कौन संचालित कर रहा है? इससे कितने खतरनाक आतंकी जुड़े हुए हैं? ऐसे तमाम सवाल देश-दुनिया की खुफिया एजेंसियों के जेहन में पिछले कई माह से कौंध रहे हैं। अब इन सवालों का जल्द जवाब मिल सकता है। दरअसल, मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक मिलने के मामले से इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी तहसीन अख्तर उर्फ मोनू के तार जुड़ रहे हैं। यही नहीं सूत्र बताते हैं कि खुफिया एजेंसियों को अब तक की जांच में जो सबूत मिले हैं, उससे जैश-उल-हिंद का तिलिस्म भी टूटता दिख रहा है। जांच में खुफिया एजेंसियों को ऐसे कई सुबूत मिले हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि इंडियन मुजाहिदीन ही जैश-उल-हिंद के नाम पर दहशत फैलाने की देश में कोशिश कर रहा है।

बता दैं कि तिहाड़ की जेल संख्या आठ से बृहस्पतिवार की रात छापे में आतंकी तहसीन अख्तर की सेल से मोबाइल और सिम बरामद किया गया है। जांच में ये पता चला है कि इसी नंबर से टेलीग्राफ पर अकाउंट बनाकर अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक भरी कार खड़ी करने की जिम्मेदारी ली गई थी। यही नहीं, इजरायली दूतावास के बाहर हुए विस्फोट के मामले में भी इसी नंबर से जिम्मेदारी ली गई थी। खास बात ये है कि इन दोनों ही मामलों में जिम्मेदारी जैश-उल-हिंद नाम के संगठन ने ली थी। यह नंबर जब इंडियन मुजाहिदीन के खतरनाक आतंकी तहसीन अख्तर उर्फ मोनू की सेल से मिला तो खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं। तिहाड़ जेल प्रशासन इस नंबर से तहसीन के लिंक को लेकर चुप्पी साधे है। वहीं स्पेशल सेल मोबाइल व सिम की फोरेंसिक जांच करा सकती है।

सिमी पर प्रतिबंध के बाद बना था इंडियन मुजाहिदीन

वर्ष 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद उसी से जुड़े सदस्यों ने इंडियन मुजाहिदीन को खड़ा किया था। इसके बाद दिल्ली सहित कई राज्यों में ब्लास्ट किए गए थे। स्पेशल सेल ने 40 आतंकियों को दबोच इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ दी थी। इसके बाद देश मे आतंकी हमले बंद हो गए थे।

पटना के गांधी मैदान में किया था विस्फोट

तहसीन अख्तर मूलरूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है। 2010 से 2014 के बीच देश के कई राज्यों में हुए ब्लास्ट के मामले में यह शामिल था। 27 अक्टूबर 2013 को पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री की रैली में जो धमाके हुए थे। उन्हें तहसीन ने ही अंजाम दिया था। इसके अलावा मुंबई, पुणो, हैदराबाद, और बनारस के शीतला घाट पर कुकर बम ब्लास्ट में भी इसका हाथ था।

लिंक मिलने के बाद भी चूक गए

जैश-उल-हिंद ने इजरायली दूतावास के बाहर हुए विस्फोट की जिम्मेदारी 30 जनवरी को टेलीग्राम एप के जरिये ली थी। इसके आइपी एड्रेस से सेल को तिहाड़ का लिंक मिला था। इसके बाद भी सेल चूक गई और इस ओर ध्यान नहीं दिया।