रेमडेसिविर इंजेक्शन हर कोरोना संक्रमित के लिए जरूरी नहीं, जानें क्‍या कहते हैं हरियाणा के प्रमुख डॉक्‍टर

Remdesivir Injection: कोरोना संक्रमितों के लिए रामबाण माने जाने वाली दवा रेमडेसिविर के इंजेक्शन की कमी सभी जगह हो गई है। केंद्र सरकार ने बेशक इसे बनाने वाली सात कंपनियों के दाम घटा दिए हैं मगर फिलहाल इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके चलते संक्रमित मरीज के परिजन इंजेक्शन के लिए डाक्टरों व अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बना रहे हैं। विभिन्न अस्पतालों के अनुभवी डाक्टरों का कहना है कि हर कोरोना मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाना जरूरी नहीं है। सबसे जरूरी कोरोना संक्रमण के शुरूआती लक्षण के दौरान ही मरीज को इलाज मुहैया कराया जाना है।

रेमडेसिविर इंजेक्शन से ज्यादा प्रभावी है प्लाज्मा थैरेपी

हरियाणा के प्रमुख डाक्‍टरों का कहना है कि यदि मरीज शुरूआती लक्षण के दौरान अस्पताल या डाक्टर तक पहुंच जाता है तो फिर कोरोना संक्रमण का इलाज संभव है। जो मरीज खुद ही घर पर परंपरागत दवा लेकर इसका इलाज कराते हैं, उनके लिए स्थिति भयाभय हो रही है। डाक्टरों के पास रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा भी कई तरह है इलाज मौजूद हैं।

मरीजों को दे रहे प्‍लाज्‍मा थेरेपी’

कोरोना संक्रमण में रेमडेसिविर इंजेक्शन के फायदे शुरूआती दौर में ही ज्यादा हैं मगर अब इसकी कमी के चलते हम मरीज को प्लाज्मा थैरेपी भी दे रहे हैं। दवा क्या और किसी मरीज को देनी है, यह मरीज फिलहाल डाक्टर पर ही छोड़ दे। ऐसा भी देखने में आया है कि लोग रेमडेसिविर के इंजेक्शन घर पर रहते हुए ही किसी सामान्य डाक्टरी सलाह पर ले लेते हैं। यह गलत है। कोरोना से बचने का फिलहाल एक ही उपाय है कि अपने को कुछ समय के लिए सीमित रखें। बाहरी लोगों से दो गज की दूरी बनाकर रखें। मास्क को अपनी नाक से नीचे न होने दें। हमारी सलाह तो यह भी है कि यदि घर में किसी एक व्यक्ति को कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत डाक्टर से दवा दिलवाएं और घर के अन्य सदस्य खुद को एकांतवास में रखें।

– डा. लवलीन मंगला, सीनियर कंसलटेंट, मेडिसिन, मेट्रो हर्ट एंड मल्टीस्पेशियलिटी हास्पिटल, फरीदाबाद ।

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‘रेमडेसिविर का फायदा कोरोना संक्रमण के शुरूआती दिनों में ही बेहतर’

” रेमडेसिविर एक एंटीवायरल दवा है। इसका इस्तेमाल माडरेट से सीवियर कैटेगरी के लक्षण वाले मरीजों में ही किया जाता है। इसका फायदा संक्रमण के पहले हफ्ते में ही सबसे अधिक देखा जाता है। यदि संक्रमण को एक हफ्ते से अधिक समय हो जाता है तो इसके इस्तेमाल के बाद भी मरीज को कोई ज्यादा फायदा नहीं होता। इसके जैसे ही प्लाज्मा थैरेपी भी संक्रमण के शुरूआती दौर में देना अधिक कारगर नतीजे देती है। अधिकतर मामलों में संक्रमण के दो-तीन हफ्ते में मरीज के अंदर रोग प्रतिरोघक क्षमता विकसित हो जाती है या स्वयं बन जाती है। यदि संक्रमण को अधिक समय हो जाता है तो हमारे पास स्टेराइड देने और लक्षणों के परंपरागत इलाज का ही विकल्प बचता है।