उखड़ती सांसों के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस बनीं संजीवनी, हरियाणा सहित चार राज्यों में पहुंचाई 650 टन

कोरोना की दूसरी लहर में उखड़ रही मरीजों की सांसों के लिए रेलवे की ऑक्सीजन स्पेशल ट्रेन संजीवनी बनकर सामने आई है। देश के विभिन्न राज्यों में ऑक्सीजन स्पेशल ट्रेन के माध्यम से ही टैंकरों को एक राज्य से दूसरे राज्य पहुंचाया जा रहा है। ऑक्सीजन स्पेशल ट्रेन की स्पीड बढ़ाने के लिए दो-दो इंजन लगाए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द इनको गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।

अभी तक पंद्रह से अधिक ऑक्सीजन स्पेशल चलाकर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, दिल्ली ऑक्‍सीजन पहुंचाई गई है। पहली ऑक्सीजन स्पेशल ट्रेन 19 अप्रैल को चली थी, जबकि अब तक करीब 650 मीट्रिक टन (एमटी) से अधिक ऑक्सीजन वि‍भिन्‍न राज्‍यों में पहुंचाई जा चुकी है। सबसे अधिक ऑक्सीजन उत्तर प्रदेश में 202 मीट्रिक टन तथा सबसे कम मध्य प्रदेश में 64 मीट्रिक टन पहुंचाई गई है।

स्पेशल ट्रेन से महाराष्ट्र, उप्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा सहित कई राज्यों में भेजी जा रही ऑक्सीजन

रेलवे के आंकड़ों पर नजर मारें, तो उत्तर प्रदेश में 12 टैंकरों में 202 एमटी ऑक्सीजन पहुंचाई जा चुकी है। इसी प्रकार महाराष्ट्र में दस टैंकरों में 174 एमटी, मध्य प्रदेश में 6 टैंकरों में 64 एमटी, दिल्ली में 4 टैंकरों में 70 एमटी  ऑक्सीजन पहुंचाई गई है। इसी प्रकार हरियाणा को भी जल्द ही 79.11 एमटी ऑक्सीजन की खेप मिलने वाली है। इसके लिए ऑक्सीजन स्पेशल की दो ट्रेन ओडिशा के दो क्षेत्रों से ट्रेन जल्द ही हरियाणा में पहुंचेंगी। पहली ऑक्सीजन स्पेशल ट्रेन ओडिशा के राउरकेला से लिक्विड मेडिकल आक्सीजन (एलएमओ) के तीन टैंकर में 47.11 एमटी ऑक्सीजन लेकर पहुंच रही है। इसी तरह अंगुल से एक अन्य ट्रेन दो टैंकरों में 32 एमटी आक्सीजन लेकर भी हरियाणा में जल्द ही पहुंच रही है, जो हरियाणा में उन जगहों तक पहुंचाई जाएगी, जहां पर इसकी आवश्यकता है।

सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 202, तो सबसे कम मध्य प्रदेश में 64 मीट्रिक टन भेजी गई है ऑक्सीजन

बता दें कि 19 अप्रैल को पहली ऑक्सीजन स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी, जो मुंबई से विशाखापट्टनम पहुंची थी, जहां से ऑक्सीजन लोड कर विभिन्न राज्यों में पहुंची थी। जिस राज्य से डिमांड ज्यादा आ रही है, वहां पर ऑक्सीजन स्पेशल के माध्यम से ही इसे पूरा किया जा रहा है। पिछले दिनों रेलवे के महाप्रबंधकों की वीडियो कांफ्रेंसिंग में भी ऑक्सीजन स्पेशल को लेकर चर्चा की गई थी। इन ट्रेनों की स्पीड 50 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक नहीं आ रही है।