मध्य मई तक ऑक्सीजन की मांग के मुताबिक उत्पादन संभव, सरकार ने झोंकी ताकत, जानें क्‍या है तैयारी

महामारी की मार के बीच देश अब भी ऑक्सीजन की कमी से हलकान है। अस्पताल बीमार है लेकिन माना जा रहा है कि पिछले 10 दिनों में हुई चौतरफा कोशिशों की बदौलत भारत मध्य मई तक ऑक्सीजन की जरूरत और आपूर्ति में भी तालमेल बिठा लेगा और बहुत हद तक आत्मनिर्भर भी हो सकता है। अस्पतालों में खुद का ऑक्सीजन प्लांट लगाने की मुहिम जोर पकड़ चुकी है।

बंद पड़ी वेदांता भी देगी सहयोग

कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बंद पड़ी वेदांता को ऑक्सीजन उत्पादन में झोंका जा रहा है। शुक्रवार को विदेश से 1900 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की आपूर्ति भारत को की गई। बड़ी औद्योगिक इकाइयों को मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन में लगाया गया है। शुक्रवार को सरकार ने व्यक्तिगत रूप से भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के आयात की इजाजत दे दी।

उत्पादन में बढ़ोतरी के उपाय

देश की 11 खाद कंपनियों ने ऑक्सीजन उत्पादन यूनिट लगाने का काम शुरू कर दिया है और इसी महीने से कई यूनिट में ऑक्सीजन का उत्पादन भी आरंभ हो जाएगा। रसायन व खाद विभाग के मुताबिक इन यूनिटों की उत्पादन क्षमता 1,064 घन मीटर प्रति घंटा की होगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र व केरल में यूनिट लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

कौन कंपनी कहां लगाएगी यूनिट

  • खाद कंपनी आरसीएफ मुंबई के निगम अस्पताल में पोर्टेबल पीएसए यूनिट लगाएगी जिसकी उत्पादन क्षमता प्रति घंटा 30 क्यूबिक मीटर की होगी। आगामी 10 मई तक इस यूनिट की स्थापना हो जाएगी। आरसीएफ महाराष्ट्र के अलीबाग और उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर में ऑक्सीजन यूनिट लगा रही है।
  • खाद कंपनी सीएफसीएल राजस्थान के कोटा में ऑक्सीजन यूनिट लगा रही है। इसकी क्षमता प्रति घंटा 26 क्यूबिक मीटर की होगी। इस यूनिट की स्थापना के लिए आर्डर दिए जा चुके हैं। अगले डेढ़ महीने में यूनिट की स्थापना हो जाएगी।
  • कृभको गुजरात के सूरत, हजारिया और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में यूनिट लगा रही है। प्रति घंटा 30 क्यूबिक मीटर की इसकी उत्पादन क्षमता होगी। आगामी 10 मई तक इन शहरों के जिला अस्पताल में यह यूनिट स्थापित होने की उम्मीद है।
  • इंडो गल्फ उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में ऑक्सीजन यूनिट लगाएगी। आगामी 31 मई तक यह प्लांट लग जाएगा, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रति घंटा 30 क्यूबिक मीटर होगी।
  • एफएसीटी उत्तर प्रदेश के बस्ती तो केरल के कोच्चि शहर में प्लांट लगाएगी।
  • एनएफएल एक यूनिट लखनऊ में लगाएगी जिसके लिए आर्डर दिए जा चुके हैं।
  • आइपीएल उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दो यूनिट तो बहराइच में एक यूनिट लगाएगी। अगले 4-5 सप्ताह में इसकी स्थापना हो जाएगी।
  • इफको गुजरात के कलोल तो उत्तर प्रदेश के ओनला और फूलपुर में तो ओडिशा के पारादीप में ऑक्सीजन प्लांट लगा रही है। मई से जून के बीच में इन प्लांट के चालू होने की संभावना है। इन चारों प्लांट की उत्पादन क्षमता प्रति घंटा 610 क्यूबिक मीटर की होगी।
  • एचयूआरएल ने गोरखपुर में प्लांट लगाने का फैसला किया है।
  • जीएसएफसी और जीएनएफसी ने गुजरात में चल रहे अपने ऑक्सीजन प्लांट की उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी का फैसला किया है।

अभी क्या है ऑक्सीजन की स्थिति

शुक्रवार को सरकार की तरफ से प्राप्त जानकारी के मुताबिक वर्तमान में देश में 9,000 टन ऑक्सीजन उत्पादन किया जा रहा है। रोजाना 7500 टन मेडिकल आक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी के लिए नए प्लांट शुरू करने के साथ पुराने प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा रही है। औद्योगिक गैस उत्पादकों को मेडिकल आक्सीजन के उत्पादन की इजाजत दे दी गई है। वहीं गैसियस आक्सीजन प्लांट के पास ही कोविड अस्पताल खोलने का फैसला भी किया जा रहा है।

व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए भी ऑक्सीजन का आयात

अब व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का आयात किया जा सकेगा। कूरियर और ई-कामर्स पोर्टल के माध्यम से यह आयात किया जा सकेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने आगामी 31 जुलाई तक इसकी इजाजत दे दी है। कस्टम क्लियरेंस में आसानी के लिए इस आयात को गिफ्ट की श्रेणी में रखा गया है।

आपूर्ति के लिए कदम

ऑक्सीजन की ढुलाई में तेजी लाने के लिए उद्योग विभाग ने देश में उपलब्ध 1,199 नाइट्रोजन व आर्गन टैंकर में से 443 टैंकर को तत्काल रूप से तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की ढुलाई के लायक बनाने का काम शुरू कर दिया है। ऑक्सीजन की ढुलाई करने वाले सभी वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग मशीन भी लगाई जाएगी। सिंगापुर व कई अन्य देशों से क्रायोजेनिक टैंकर का आयात किया जा रहा है। एक लाख ऑक्सीजन सिलेंडर के आयात के लिए भी टेंडर जारी किया गया है।