अतिपिछड़ों के लिए ‘न्याय का संकल्प’ तैयार करेगा इंडिया गठबंधन:राहुल, तेजस्वी और लेफ्ट के नेता बैठकर बात करेंगे, 38 फीसदी अतिपिछड़ा वोट बैंक पर नजर

बिहार में विधानसभा का चुनाव है और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक पटना में कर रही है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर किन मुद्दों के साथ कांग्रेस आगे बढ़ेगी। इसकी रणनीति से जुड़े प्रस्ताव तो पास होंगे ही साथ ही बिहार का चुनावी महाभारत कैसा जीता जाए इसकी रणनीति भी बनेगी।

राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस महागठबंधन के अंदर आरजेडी के सामने भी अब झुकने वाली नहीं है। तेजस्वी को सीएम फेस घोषित नहीं करने से लेकर पप्पू यादव को नजदीक लाने तक का काम अब तक कांग्रेस कर चुकी है। कांग्रेस की बैठक इतनी महत्वपूर्ण है कि इसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी भी शामिल हो रहे हैं।

सोनिया गांधी तो पहली बार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम आ रही हैं। कांग्रेस की नजर ओबीसी वोट बैंक के साथ ही अति पिछड़ा वोट बैंक पर भी है। कांग्रेस की तैयारी है कि टिकट बंटवारे में भी सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को लागू किया जाए। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से अलग 24 सितंबर को ही दोपहर बाद पटना के होटल चाणक्या में एक आयोजन सिर्फ अति पिछड़ों पर केन्द्रित रखा गया है।

अति पिछड़ों में 112 जातियां

बिहार चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव से पहले प्रियंका गांधी भी बिहार आ रही हैं। 26 सितंबर को वह मोतिहारी में सभा करेंगी। वे वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होने भी आई थीं। कांग्रेस बिहार में बतौर राष्ट्रीय पार्टी, बीजेपी के बराबर ताकत हासिल करना चाहती है।

ऐसा तभी संभव है जब कांग्रेस ठीक-ठाक संख्या की सीटों पर चुनाव लड़े और क्वालिटी की सीटों पर लड़े। एक बड़े वर्ग को अपनी तरफ करके कांग्रेस इस जीत को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए ओबीसी वोट बैंक के साथ ही अति पिछड़ा वोट बैंक को भी अपनी तरफ करने में पार्टी लगी है।

बिहार में ओबीसी आबादी 27 फीसदी है और ईबीसी आबादी 38 फीसदी। कुल मिलाकर यह वोट बैंक 63 फीसदी है। पिछड़ा वर्ग में कुल 30 जातियां हैं जबकि अति पिछड़ों में 112 जातियां। ओबीसी की सहानुभूति हासिल करने के लिए राहुल गांधी पहले ही माफी मांग चुके हैं और कह चुके हैं कि उन्हें ओबीसी की समस्याएं पहले मालूम होती तो बहुत पहले जातिगत जनगणना करवा दी होती। अब राहुल की नजर बिहार के अति पिछड़ा वोट बैंक पर है।

आबादी के अनुरूप पंचायत और निकाय चुनाव में नहीं दी जा रही भागीदारी- मंजीत आनंद साहु

कांग्रेस मेनिफेस्टो कमेटी के सदस्य और अति पिछड़ा नेता मंजीत आनंद साहू ने कहा कि अति पिछड़ी जाति के लोगों के साथ वर्तमान एनडीए सरकार न्याय नहीं कर सकी है। लेकिन इंडिया गठबंधन के नेता राहुल गांधी और तेजस्वी यादव इस बात समझ रहे हैं और उनका हक कैसे आने वाली इंडिया गठबंधन की सरकार करे। अति पिछड़ों के लिए न्याय का संकल्प तैयार करने पर बातचीत होगी। इसका खाका तैयार किया जाएगा। न

गर निकाय और पंचायत चुनाव में इनकी हकमारी एनडीए की सरकार कर रही है और 13 फीसदी आरक्षण की चोरी की जा रही है। अत्यंत पिछड़ी 38 फीसदी जातियों को 20 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। शिक्षा का सवाल, प्रताड़ना का सवाल इन सभी को लेकर पूरी रूपरेखा रखी जाएगी।

विधानसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व का सवाल हो, न्यायपालिका, शिक्षा, निजी क्षेत्र में जहां कहीं भी अति पिछड़ों से जुड़े मुद्दे हैं उस पर विमर्श होगा। बिहार के अतिपिछड़ी जातियों में राहुल गांधी उम्मीद की किरण के रूप में हैं। नीतीश कुमार ने इस जाति को अपना वोट बैंक समझा। हर तीसरा व्यक्ति अति पिछड़ी जाति से आता है।

नीतीश कुमार द्वारा दिए जा रहे आधे-अधूरे अति पिछड़ा आरक्षण के खिलाफ राहुल गांधी की लड़ाई है। जब तमिलनाडु में 69 फीसदी आरक्षण है तो बिहार में 65 फीसदी आरक्षण क्यों नहीं हो सकता। राहुल गांधी का कहना है कि जिसकी जितनी आबादी उसको उतना हक। अति पिछड़ों पर आयोजन के जरिए सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई को तेज किया जाएगा।

50 फीसदी आरक्षण की दीवार तोड़ने की बात कह चुके हैं राहुल

बिहार में अति पिछड़ों का वोट बैंक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक माना जाता है। बिहार की एनडीए सरकार ने दो माह के अंदर इतनी अधिक सरकारी घोषणाएं की हैं कि महागठबंधन के लिए विधानसभा चुनाव चुनौतीपूर्ण हो गया है। इससे कैसे निपटा जाए इसकी रणनीति भी बैठक में बेनेगी।

‘वोट चोर गद्दी छोड़’ का नारा कांग्रेस नहीं छोड़ेगी और इसे चुनाव तक जोर-शोर से लगाया जाएगा। एसआईआर से जुड़ी गड़बडियों को भी पार्टी उठाती रहेगी। जाति जनगणना कराने और 50 फीसदी आरक्षण की दीवार तोड़ने की बात राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं। इस पर भी बैठक में बात होगी।

अति पिछड़ों को मजबूती देने की पहल होगी

कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन में इस बार काफी मेहनत की है। पिछली बार के खराब परफॉर्मेंस को याद रखते हुए कांग्रेस इसमें लगी है। प्रखंड, जिला स्तर से नाम मंगाए गए। उसके बाद वहां ऑबजर्वर भेजे गए। नामों का मिलान किया गया। पार्टी ने सर्वे अलग से कराया। सेंट्रल इलेक्शन कमेटी और सीडब्ल्यूसी तक उम्मीदवारों पर बात होगी।

राहुल गांधी ने बिहार प्रदेश का प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को इसलिए बनाया ही कि चुनाव की रणनीति माइक्रो लेवल पर हो। विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के नेता इस पर विमर्श करेंगे कि कैसे अति पिछड़ा राजनीति को ताकत दी जाए।

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