शेख हसीना पर बांग्लादेश कोर्ट का फैसला आज:चार दिन की हिंसा के बाद हाई अलर्ट जारी; हिंसक प्रदर्शनकारियों को देखते गोली मारने का आदेश

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (77) के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में विशेष ट्रिब्यूनल आज फैसला सुनाएगा। इसका लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा।

सरकारी वकील ने हसीना के खिलाफ पांच गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें हत्या, अपराध रोकने में नाकामी और मानवता के खिलाफ अपराध सबसे अहम हैं। इसे लेकर देशभर में हिंसा भड़क उठी है। सरकार ने हाई अलर्ट की घोषणा कर दी है।

पिछले 4 दिनों में कई जगहों पर गाड़ियों में आगजनी, धमाके, पथराव और सड़क जाम की घटनाएं हुई हैं। लोगों ने पेड़ गिराकर हाईवे जाम कर दिया। अंतरिम सरकार ने सेना और पुलिस के अलावा सीमा रक्षकों को तैनात किया है।

ढाका में पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया है। शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक ढाका में दो बसों को आग लगा दी गई। फैसले के बाद हिंसा और बढ़ने की आशंका को देखते हुए देशभर में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

प्रॉसीक्यूशन ने हसीना के लिए मौत की सजा मांगी

हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और तत्कालीन आईजीपी चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर लगे पांच गंभीर आरोपों पर बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल फैसला देगा। इन पर 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास, मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं।

हसीना 5 अगस्त 2024 को सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत में हैं। हसीना और कमाल को फरार घोषित कर ट्रायल किया गया, जबकि मामून सरकारी गवाह बन गए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2023 में सुरक्षा कार्रवाई में 1,400 लोग मारे गए थे।

इधर, चीफ प्रॉसीक्यूशन (मुख्य अभियोजक) ने हसीना को मास्टरमाइंड बताते हुए मौत की सजा की मांग की है। दूसरी ओर, हसीना के समर्थक इस केस को झूठा और राजनीतिक बदला बता रहे हैं। 14 नवंबर को हसीना की अवामी लीग पार्टी के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ भी झड़पें हुईं।

बांग्लादेश की इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में कोई इंटरनेशनल जज नहीं

बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल एक स्पेशल कोर्ट है। इसकी 2010 में स्थापना की गई थी। इसे इंटरनेशनल क्राइम्स एक्ट 1973 के तहत बयाना गया था, जो नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध की सजा देने का अधिकार देता है।

यहां उन लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाते हैं जिन पर आरोप है कि उन्होंने 1971 में पाकिस्तान की सेना का साथ देकर बांग्लादेशियों पर हिंसा, हत्या, बलात्कार, आगजनी या अन्य गंभीर अपराध किए थे।

इसके नाम में इंटरनेशनल शब्द है, लेकिन यह पूरी तरह बांग्लादेश की अपनी अदालत है। इसमें संयुक्त राष्ट्र या अंतरराष्ट्रीय जज शामिल नहीं होते।

हिंसा-आगजनी के बाद हुए शेख हसीना का तख्तापलट

घटना की शुरुआत 5 अगस्त 2024 को हुई, जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हो गया। इससे पहले और बाद में देशभर में भारी प्रदर्शन, आगजनी और हिंसा देखी गई।

सरकार पर आरोप लगे कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को गिरफ्तार कर टॉर्चर किया गया और फायरिंग की गई। हिंसा बढ़ने के बाद शेख हसीना ने देश छोड़कर भारत में शरण ली।

इसके बाद बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। कोर्ट ने उन्हें देश लौटकर केस में पेश होने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने यह आदेश नहीं माना।

हसीना ने आरोपों को मनगढ़ंत बताया

हसीना की तरफ से कहा गया कि यह पूरा केस राजनीतिक साजिश है। उनका कहना है कि ट्रिब्यूनल निष्पक्ष नहीं है और सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं।

हसीना ने इस कानूनी प्रक्रिया पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। कहा कि मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

यूनुस सरकार ने हसीना पर हत्या, अपहरण से लेकर देशद्रोह के 225 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं। बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना का पासपोर्ट भी रद्द कर दिया है।

वहीं, बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। ट्रिब्यूनल ने हसीना को 12 फरवरी 2025 तक पेश होने का निर्देश दिया था।

बांग्लादेश भारत से हसीना को डिपोर्ट करने की अपील भी कर चुका है। हालांकि, भारत सरकार उनका वीजा बढ़ा चुकी है, जिससे यह साफ हो गया कि उन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट नहीं किया जाएगा।

आरक्षण के खिलाफ आंदोलन ने किया था तख्तापलट

बांग्लादेश में पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। भीड़ ने 5 अगस्त, 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के आवास पर हमला कर दिया था। भीड़ के पहुंचने से पहले हसीना बांग्लादेश से भागकर भारत आ गई थीं। वे तब से भारत में रह रही हैं।

इसी के साथ बांग्लादेश में अवामी लीग की 20 साल पुरानी सरकार भी गिर गई। इसके बाद मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार की स्थापना की गई। हसीना के खिलाफ देशभर में छात्र कोटा सिस्टम को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

दरअसल, बांग्लादेश में 5 जून, 2024 को हाईकोर्ट ने जॉब में 30% कोटा सिस्टम लागू किया था। यह आरक्षण स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को दिया जा रहा था, लेकिन हसीना सरकार ने यह आरक्षण बाद में खत्म कर दिया था। इसके बाद छात्रों ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किया।

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