जल जीवन मिशन योजना में 187.33 करोड़ रुपए के घोटाले में PHED के तीन अफसरों पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने FIR दर्ज की है। आरोप है कि फेक डॉक्यूमेंट से हैदराबाद की कंपनी भूरथनोम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को करोड़ों रुपए के टेंडर बांटे गए। वहीं कंपनी काे बचाने के लिए झूठे शपथ पत्र पेश कर अनुचित लाभ पहुंचाया। इन सभी टेंडर की कुल लागत करीब 1493 करोड़ रुपए बताई गई है।
एसीबी ने सोमवार को FIR दर्ज की। इसके मुताबिक- जल जीवन मिशन घोटाला में दिनेश गोयल (तत्कालीन मुख्य अभियंता, विशेष परियोजना, PHED), महेंद्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, परियोजना, अजमेर अतिरिक्त प्रभार, वर्तमान में सेवानिवृत्त) और सिद्धार्थ टांक (अधिशासी अभियंता परियोजना खंड मांडल, भीलवाड़ा) के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि जल जीवन मिशन के काम में कंपनी भूरथनोम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने 187.33 करोड़ के अधूरे काम को पूरा बताकर झूठे शपथ पत्र दिए थे।
डॉक्यूमेंट अधूरे होने पर भी टेंडर दिया
डॉक्यूमेंट अधूरे होने पर भी इन अधिकारियों ने कंपनी के टेंडर में इसे योग्य बताया। आरोपी अफसरों ने फर्जी बोली क्षमता के शपथ पत्रों के जरिए ठेकेदार कंपनी को करोड़ों रुपए के टेंडर जारी कर दिए।
कंपनी की ओर से चंबल-भीलवाड़ा जल आपूर्ति परियोजना के अधूरे काम को पूरा बताकर झूठा शपथ पत्र दिए। मौके पर कई गांवों में अभी तक कमीशनिंग और स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) का काम बाकी था।जून 2023 में कई शिकायतें मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर कंपनी को बचाने का काम किया गया।
बता दें कि स्काडा में पानी की सप्लाई की दूर से निगरानी, नियंत्रण और ऑटोमेशन का काम होता है। इससे लीकेज का तुरंत पता चलता है। वहीं कमीशनिंग में पाइपलाइन की सफाई, टेस्टिंग का काम होता है।
मिलीभगत से किया फर्जीवाड़ा
भूरथनोम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के 5 बड़े प्रोजेक्ट के टेंडर में हिस्सा लिया गया था। एसीबी के अनुसार- फर्म ने सहाड़ा-रायपुर-सुवाणा (भीलवाड़ा), नागौर के खींवसर व मूंडवा खंड, बांसवाड़ा के कुशलगढ़-सज्जनगढ़ खंड, सीकर के फतेहपुर-लक्ष्मणगढ़ पैकेज-दो और ईसरदा पैकेज-चार (बासा–सिकराई) जैसी कुल 5 बड़ी जल आपूर्ति परियोजनाओं में झूठी बोली क्षमता के आधार पर हिस्सा लिया।
आरोप है कि कंपनी ने चंबल-भीलवाड़ा जल आपूर्ति परियोजना के अधूरे काम को पूरा दिखाकर झूठा शपथ पत्र दिया। नवंबर 2023 में ई-मेल के जरिए एक परिवादी ने एसीबी डीजी को शिकायत भेजी थी। जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारियों ने पहले केवल परियोजना के मुख्य काम को पूरा दिखाने वाली तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करवाई। बाद में उसी रिपोर्ट में संशोधन कर पूरे काम को पूरा होना दिखाया। इसी आधार पर कंपनी को ब्लैक लिस्ट में डालने या निविदा से बाहर करने की कार्रवाई से बचाते हुए सभी पांचों परियोजनाओं में योग्य घोषित कर दिया गया।