जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों के छिपे होने की खबर मिलने के बाद सेना ने रविवार को तलाशी अभियान चलाया। इसे ऑपरेशन त्राशी-1 नाम दिया गया है। रात भर तलाशी रोके जाने के बाद, सुरक्षा बलों ने सोमवार सुबह एक बार फिर सर्चिंग शुरू कर दी है।
घनी हरियाली और खड़ी ढलानों वाले मुश्किल इलाके के कारण देर रात ऑपरेशन रोक दिया गया था। सर्दी के मौसम के चलते यहां विजिबिलिटी और मूवमेंट भी कम हो गया था।
यह ऑपरेशन रविवार को चतरू बेल्ट में मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव में शुरू किया गया था। गोलाबारी में 8 जवान घायल हो गए थे। आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया था, जिसके छर्रे जवानों को लगे हैं।
सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टीमें, ड्रोन और स्निफर कुत्तों की मदद से, इलाके की तलाशी ले रही हैं, साथ ही डोडा, किश्तवाड़ और कठुआ को जोड़ने वाले जंगल के रास्तों को घेर लिया है ताकि आतंकवादी भाग न सकें।
अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े दो-तीन आतंकवादियों का एक ग्रुप जंगलों में छिपा हुआ है।
जनवरी में आतंकियों से तीसरी बार मुठभेड़
यह मुठभेड़ इस साल जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच तीसरी झड़प है। पिछली मुठभेड़ें 7 जनवरी और 13 जनवरी को कठुआ जिले के बिलावर इलाके के कहोग और नजोत जंगलों में हुई थीं।
पिछले साल 15 दिसंबर को, उधमपुर ज़िले के मजालता इलाके के सोआन गांव में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में एक पुलिस अधिकारी मारा गया था। आतंकवादी घने पत्तों और अंधेरे का फ़ायदा उठाकर भागने में कामयाब हो गए।
ये मुठभेड़ें पिछले साल दिसंबर में जम्मू क्षेत्र के जंगल वाले इलाकों में लगभग तीन दर्जन छिपे हुए आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए शुरू किए गए एक बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान के बाद हुईं।
अधिकारियों ने बताया कि गणतंत्र दिवस से पहले ऑपरेशन और तेज कर दिए गए हैं ताकि समारोह शांतिपूर्ण मनाया जा सके।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि खुफिया जानकारी मिली है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर ज़्यादा आतंकवादियों को इस क्षेत्र में भेजने की कोशिश कर रहे हैं।