मथुरा के वृंदावन में सुदामा कुटी में चल रहे शताब्दी महोत्सव में शामिल होने के लिए 11वें दिन मंगलवार को बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहुंचे। इस दौरान उनका अलग ही अंदाज देखने को मिला।
कार्यक्रम के बीच एक ई-रिक्शा ड्राइवर का छोटा बच्चा मंच पर उन्हें सम्मानित करने पहुंचा। बच्चे को धोती-कुर्ता में देखकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री प्रभावित हो गए। उन्होंने बच्चे को अपने सामने रखी टेबल पर खड़ा किया और उसके गले में पटका पहनाया।
इसके बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बच्चे से उसका नाम और पढ़ाई के बारे में पूछा। इस पर बच्चे ने बताया- मेरा नाम वैभव है। मैं गीता और भागवत पढ़ रहा हूं। बच्चे की बात सुनकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और अधिक प्रभावित हो गए।
इसके बाद उन्होंने वैभव से गीता का एक श्लोक सुनाने को कहा। वैभव ने मंच पर गीता का श्लोक सुनाया, जिसे सुनकर मौजूद श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ उसका उत्साह बढ़ाया। इससे खुश होकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बच्चे को 50 हजार रुपए का इनाम दिया।
परिवार की आर्थिक स्थिति सुन की मदद
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वैभव से पूछा कि उसके पिता क्या करते हैं। इस पर वैभव ने बताया- मेरे पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। यह सुनकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कुछ पल के लिए भावुक हो गए।
इसके बाद उन्होंने अपने सेवादारों से कुछ राशि देने को कहा, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने अपने साथ रखी झोली में हाथ डालकर 500 रुपए के नोटों की एक गड्डी निकाल ली और वैभव को सौंप दी। नोटों की गड्डी देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा- यह दक्षिणा है।
अब पढ़िए पंडित धीरेंद्र शास्त्री और बच्चों के बीच की बातचीत
पंडित धीरेंद्र शास्त्री: तुम घर जाओगे नहीं, मेरे साथ चलोगे
बच्चा: पापा-मम्मी के साथ चलेंगे।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री: ना-ना पापा-मम्मी के साथ नहीं जाना है, बाबा के साथ जाना है।
बच्चा: नहीं
पंडित धीरेंद्र शास्त्री:बाबा बनोगे
बच्चा: नहीं
पंडित धीरेंद्र शास्त्री: शादी करोगे बच्चा: नहीं पंडित धीरेंद्र शास्त्री: फिर बाबा बनो बच्चा: भागवत करूंगा।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री: भागवताचार्य दो तरह के होते हैं- एक बैरागी और दूसरे गृहस्थ।
वैभव बोले- मैंने बागेश्वर बाबा को गीता का श्लोक सुनाया
वैभव ने बताया- मैं बागेश्वर बाबा से मिला और उन्हें गीता का श्लोक सुनाया। उन्होंने मुझे अच्छे से पढ़ने की सलाह दी और 500 रुपए के नोटों की एक गड्डी दी।
वृंदावन में रहकर करता है परिवार जीवनयापन
ग्वालियर का रहने वाला वैभव अपने माता-पिता और बहन के साथ वर्तमान में वृंदावन में रहकर जीवनयापन कर रहा है। वैभव के पिता धर्म दुबे ई-रिक्शा चलाते हैं, जबकि मां घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं। उनकी बहन भी धार्मिक कार्यों से जुड़ने के लिए शास्त्रों की पढ़ाई कर रही है।
5 साल का वैभव परिक्रमा मार्ग स्थित एक भागवत विद्यालय में भागवत गीता का अध्ययन कर रहा है। धर्म दुबे ने बताया- हम बच्चों को शास्त्रों की शिक्षा दिलाकर सनातन धर्म की सेवा करना चाहते हैं।