बसंत पंचमी- वाग्देवी की पूजा पूरे दिन होगी या नहीं?:सुप्रीम कोर्ट में फैसला आज; भोजशाला परिसर में कड़ी सुरक्षा, 8 हजार जवान तैनात

मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला मामले में आज (22 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। बसंत पंचमी पर पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति के लिए हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को याचिका दायर की गई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन ने याचिका में मांग की है कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी है। इस दिन भोजशाला परिसर में केवल हिंदू समाज को दिनभर मां सरस्वती की पूजा करने की अनुमति दी जाए।

याचिका में बताया है कि संयोग से इसी दिन शुक्रवार भी है, इसलिए मुस्लिम समुदाय की जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए।

दरअसल, भोजशाला में हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच पूजा और नमाज को लेकर विवाद की स्थिति बनती है। खासकर तक जब शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी का पर्व आता है।

इससे पहले साल 2006, 2013 और 2016 में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी थी। अब इस बार फिर शुक्रवार को बसंत पंचमी होने के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

भोजशाला परिसर में भी सुरक्षा-‎व्यवस्था बढ़ा दी गई है। परिसर में 24 घंटे पुलिस‎ जवानाें को ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया है। वहीं, ‎वाॅच टावर के साथ चाैकी भी बनाई है। ‎परिसर में जिग-जैग लगाने का काम लगभग ‎पूरा हाे चुका है। बसंत पंचमी पर लाेगाें काे‎ जिग-जैग से गुजरने के बाद भोजशाला में‎ प्रवेश मिलेगा। यहां जगह-जगह पर पुलिस की तैनाती रहेगी।

8 हजार पुलिसकर्मियों का बल रहेगा मौजूद

इधर, धार में 8 हजार का बल तैनात किया गया है। 50 ‎प्रतिशत फोर्स बुधवार रात तक पहुंच चुका है। इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने बताया कि पुलिस की ‎तैयारी पूरी है। फाेर्स ‎डिप्लॉय का प्लान भी बन चुका है। हम ‎सीसीटीवी से लगातार निगरानी रखेंगे। ‎हमने थ्रीडी मैपिंग भी कराई है, जिससे हर ‎परिस्थिति का पता चलेगा। बाइक पार्टी व मोबाइल पार्टी द्वारा भी‎ नजर रखेंगे। सभी मोहल्लों पर पुलिस की‎ नजर है।‎

भोजशाला का 300 मीटर क्षेत्र नो-फ्लाई जोन

भोजशाला क्षेत्र में 300 मीटर के दायरे में नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस दायरे में ड्रोन, यूएवी, पैराग्लाइडिंग, हॉट एयर बैलून सहित किसी भी तरह की उड़ान गतिविधि पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।

सार्वजनिक सड़कों और स्थलों पर भवन निर्माण सामग्री, मलबा, टायर और लावारिस गुमटियां रखने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। उल्लंघन की स्थिति में नगर पालिका सारा सामान जब्त कर सकता है।

ड्रोन और AI से भीड़ पर नजर रख रही पुलिस

इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने बताया कि इस बार ड्रोन कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए भीड़ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। AI सिस्टम भीड़ की संख्या, उसकी दिशा और किसी स्थान पर अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत जैसी जानकारियां रियल टाइम पर उपलब्ध कराएगा।

प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए बनाया डायवर्जन प्लान

  • इंदौर नाका से शहर की ओर आने वाले वाहन श्याम ढाबा-जेतपुरा मार्ग से जाएंगे।
  • गुजरी और नालछा की ओर से आने वाले वाहन भी श्याम ढाबा-जेतपुरा (NH-47) का उपयोग करेंगे।
  • रतलाम नाका से आने वाले वाहनों को पुराना नौगांव थाना क्षेत्र की ओर मोड़ा जाएगा।

शहर के भीतर वैकल्पिक मार्ग तय

  • गुजरी जाने वाले वाहन जेतपुरा-गौतम स्कूल-धरावरा फाटा मार्ग से जाएंगे।
  • मतलबपुरा कट पॉइंट से तिरला की ओर डायवर्जन रहेगा।
  • NH-47 (लबरावदा फाटा) से आने वाले वाहन राजनंदनी पुराना बायपास-मांडव नाका-इंदौर नाका मार्ग से गुजरेंगे।
  • तिरला से आने वाले वाहनों को राजनंदनी तिराहा-दशहरा मैदान-मांडू मार्ग से भेजा जाएगा।

मंगलवार को सुंदरकांड, शुक्रवार को नमाज

धार के भोजशाला परिसर में मंगलवार को ढोल, झांझ, मजीरे के साथ हिंदू समाज के लोग सुंदरकांड का पाठ करते हैं। इसके अलावा शुक्रवार को मुस्लिम समाज जुमे की नमाज पढ़ता है। बता दें, बाकी दिनों में परिसर सभी धर्म के लोगों के लिए खुला है। वहां कोई भी टिकट लेकर अंदर जा सकता है।

विवादों के बाद व्यवस्था में बदलाव किए

1995 में हुए विवाद के बाद से यहां मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई। 12 मई 1997 को कलेक्टर ने भोजशाला में आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया। मंगलवार की पूजा पर रोक लगा दी गई। हिंदुओं को बसंत पंचमी पर और मुसलमानों को शुक्रवार को 1 से 3 बजे तक नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई। ये प्रतिबंध 31 जुलाई 1997 को हटा दिया गया।

6 फरवरी 1998 को केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगामी आदेश तक प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया। 2003 में मंगलवार को फिर से पूजा करने की अनुमति दी गई। बगैर फूल-माला के पूजा करने के लिए कहा गया। पर्यटकों के लिए भी भोजशाला को खोला गया।

18 फरवरी 2003 को भोजशाला परिसर में सांप्रदायिक तनाव के बाद हिंसा फैली। 2003 से हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा की अनुमति और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज की अनुमति दी गई। बाकी पांच दिनों में भोजशाला पर्यटकों के लिए यह खुली रहती है।

2013 में भी बसंत पंचमी और शुक्रवार एक दिन आने पर धार में माहौल बिगड़ गया था। हिंदुओं के जगह छोड़ने से इनकार करने पर पुलिस को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा था। इसके बाद माहौल बिगड़ गया।इसके बाद साल साल 2016 में भी शुक्रवार के दिन वसंत पंचमी पड़ने से यहां तनाव का माहौल बन गया था।

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