हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी में है। नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए लॉबिंग का दौर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, वर्तमान सीएम नायब सिंह सैनी और संघ (RSS) के पदाधिकारियों के बीच गहन मंथन जारी है। अगले 48 घंटे में पार्टी इसका एलान कर सकती है। भाजपा पार्टी अध्यक्ष के नाम के मामले में चौंका भी सकती है।
रेस में कौन है सबसे आगे?
मोहन लाल बड़ोली: वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में ही भाजपा ने 2024 के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। पार्टी का एक बड़ा वर्ग उन्हें ही जिम्मेदारी जारी रखने के पक्ष में है।
संजय भाटिया: पूर्व सांसद संजय भाटिया का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। उनकी आरएसएस में गहरी पैठ है और वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ निरंतर संपर्क में हैं।
दीपक मंगला: विधायक दीपक मंगला को मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है। गुटीय समीकरणों को साधने में उनका नाम भी लिस्ट में ऊपर है।
तीन साल का होता है कार्यकाल
भाजपा के संविधान के अनुसार भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। बड़ौली को 9 जुलाई 2024 में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। इस हिसाब से मोहन लाल बडौली का करीब डेढ़ साल का कार्यकाल बाकी है।
ऐसे में उन्हें समय से पहले प्रदेश अध्यक्ष के पद से दायित्व मुक्त किया जाएगा, इसकी बिल्कुल भी संभावना राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद नहीं रही। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यदि मोहन लाल बडौली के दायित्व में किसी तरह का बदलाव नहीं किया तो उनके प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बने रहने के लिए अलग से परिपत्र जारी करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
अब यहां पढ़िए कौन कौन चेहरे हैं दावेदार…6 लाइन में
मोहन लाल बड़ौली: वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ अच्छा तालमेल है। लोकसभा, विधानसभा चुनाव अपने नेतृत्व में करा चुके हैं। लोकसभा में पार्टी को पांच सीट, विधानसभा में पूर्ण बहुमत से हरियाणा के इतिहास में पहली बार तीसरी बार सरकार बनाई। केंद्रीय नेताओं में अच्छी पैठ। बड़ौली का सिर्फ एक नेगेटिव पॉइंट है कि कसौली गैंगरेप केस में उनका नाम है। हालांकि उन्हें एक कोर्ट से रिलीफ मिल चुका है, दूसरी कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
संजय भाटिया: पार्टी के बड़े पंजाबी चेहरे हैं। हालांकि अभी ये ग्राउंड पर दिख नहीं रहे हैं, लेकिन इनकी दावेदारी की दो बड़ी वजह बताई जा रही हैं। ये करनाल से सिटी सांसद थे, लेकिन 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान इनकी टिकट काट कर मनोहर लाल खट्टर को टिकट दी गई थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव में इन्हें टिकट नहीं दी गई। इसको देखते हुए पार्टी इन्हें संगठन में एडजस्ट कर सकती है।
दीपक मंगला : दक्षिण हरियाणा में दीपक मंगला भाजपा का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। वह वैश्य समाज से आते हैं और मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाते हैं। वह सांसद कृष्ण पाल गुर्जर के भी खास माने जाते हैं। यही कारण है कि मनोहर लाल और कृष्ण पाल गुर्जर दोनों उनके लिए लॉबिंग कर रहे हैं और मंगला भी प्रदेशाध्यक्ष बनने के लिए अंदर खाते जोर आजमाइश में जुटे हुए हैं। दीपक मंगला एबीवीपी के जरिये राजनीति में आए थे। वह प्रदेश सचिव और प्रदेश महामंत्री का कार्यभार संभाल चुके हैं।
असीम गोयल: अंबाला सिटी से चुनाव लड़ते हैं। नायब सैनी की पहली टर्म की सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि इसके बाद चुनाव हार गए। अब प्रदेश अध्यक्ष के लिए दावेदार हैं। इसकी वजह है कि ये सीएम नायब सैनी के काफी करीबी हैं। हालांकि इनका नाम पहले महामंत्री के लिए चल रहा था, लेकिन अब जो हालात बन रहे हैं उसके अनुसार गोयल प्रदेश अध्यक्ष के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।
डॉ. अर्चना गुप्ता : हरियाणा की एक प्रमुख भाजपा नेत्री हैं, जो वर्तमान में भाजपा हरियाणा की प्रदेश महामंत्री के पद पर कार्यरत हैं। 2016 में वे पानीपत की भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं। वह पेशे से एमबीबीएस, एमडी (रेडियोलॉजिस्ट) हैं और विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से राजनीति में सक्रिय हुईं।
वह मनोहर लाल खट्टर जैसे नेताओं के करीबियों में से एक हैं और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है। अगर महिला प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति पर फैसला होता है तो उनके नाम पर मुहर लग सकती है।
सुरेंद्र पूनिया : हरियाणा संगठन पर सुरेंद्र पूनिया की मजबूत पकड़ है। उन्होंने कई मौकों पर संकट मोचन की भूमिका निभाई है। वह राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं। वह हिसार जिले की बरवाला विधानसभा से चुनाव लड़े थे और महज कुछ वोटों से हार गए थे।
वह आरएसएस के पुराने स्वयंसेवक भी हैं और संघ और भाजपा दोनों में ही अच्छी पकड़ है। मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री नायब सैनी दोनों के वो खास माने जाते हैं। वह भाजपा के बड़े जाट नेताओं में उनकी गिनती होती है।