सागर के मकरोनिया इलाके के बड़तूमा में 11 एकड़ में आकार लेता भव्य परिसर अब दूर से ही दिखने लगा है। 101 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे संत रविदास मंदिर और कला संग्रहालय का करीब 90 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है।
नागर शैली में तैयार हो रहे इस मंदिर में लोहे या स्टील का इस्तेमाल नहीं किया गया है। अयोध्या के राम मंदिर में इस्तेमाल वंशी पहाड़पुर के पत्थरों से यह निर्माण किया जा रहा है, जिन पर राजस्थान के कारीगर बारीक नक्काशी कर रहे हैं। पिलर खड़े हैं और शिखर निर्माण का काम तेजी से चल रहा है।
मंदिर का निर्माण सितंबर 2023 से शुरू होकर अगस्त 2025 में पूरा होना था, लेकिन बजट के अभाव में अब यह मार्च 2026 तक पूरा हो पाएगा। परिसर में 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में संत रविदास महाराज के मंदिर को बनाया जा रहा है।
चार गैलरी का बनाया जा रहा है म्यूजियम
संत रविदास मंदिर का निर्माण नागर शैली में पत्थरों से किया जा रहा है। साथ ही संस्कृति व रचनात्मक विशेषता के साथ संत रविदास के दर्शन को प्रदर्शित करने वाली एक विशेष शैली के इंटरप्रिटेशन म्यूजियम का निर्माण भी किया जा रहा है। म्यूजियम 20,500 वर्गफीट में बन रहा है, जिसमें चार गैलरी भी बनाई गई हैं।
पहली गैलरी में संत रविदास महाराज के जीवन को प्रदर्शित किया जाएगा। दूसरी गैलरी संत रविदास महाराज के भक्ति मार्ग और निर्गुण पंथ में योगदान पर आधारित होगी। तीसरी गैलरी संत रविदास के दर्शन का विभिन्न मतों पर प्रभाव और रविदासिया पंथ पर केंद्रित रहेगी।
चौथी गैलरी में संत रविदास के काव्योचित, साहित्य व समकालीन विवरण का समावेश रहेगा। इसके अलावा दस हजार वर्ग फीट में लाइब्रेरी और संगत हाल बनाया गया है। इसमें संत रविदास महाराज के भक्ति मार्ग व दार्शनिक विचारों के सभी साहित्य का संकलन उपलब्ध होगा।
सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी भी होगी। कुंड मंदिर परिसर में संत रविदास मंदिर के पास जलकुंड का प्रतिकात्मक रूप से निर्माण किया जा रहा है। कुंड ने आकार ले लिया है।
शिवराज ने की घोषणा, PM ने किया था भूमिपूजन
8 फरवरी 2023 को सागर के कजलीवन मैदान में आयोजित संत रविदास महाकुंभ में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सागर के बड़तूमा में 100 करोड़ रुपए की लागत से संत रविदास महाराज का मंदिर निर्माण कराने की घोषणा की थी।
इसके बाद 12 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सागर आकर मंदिर का भूमिपूजन किया था। 1 सितंबर 2023 से मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया। मंदिर निर्माण की समय-सीमा अगस्त 2025 तय की गई है।
संत रविदास सांस्कृतिक एकता न्यास के अध्यक्ष होंगे सीएम
- सुंदर वाटिका को सजाया जाएगा। वाटिका में वृक्ष-वनस्पतियां रोपे जाएंगे।
- शिखर नुमा मंदिर होगा। संत रविदास की कमल पुष्प पर प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
- मंदिर के पास ही एक मॉडर्न संग्रहालय होगा।
- संत रविदास के जीवन प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा।
- मध्यप्रदेश के संतों के जीवन और वाणियों को भी दर्शाया जाएगा।
- 15 कमरों वाले भक्त निवास का निर्माण किया जाएगा। क्षमता 80 लोगों की होगी।
- मंदिर परिसर में पुस्तकालय और संगीत हॉल का निर्माण किया जाएगा।
- मंदिर परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
लाल पत्थर पर जितना पानी, उतनी चमक आती है
असिस्टेंट इंजीनियर डेहरिया ने बताया कि मंदिर का निर्माण 10 हजार वर्गफीट जगह पर किया जा रहा है। मंदिर की ऊंचाई 66 फीट रहेगी। मंदिर निर्माण में वंशी पहाड़पुर का पिंक और रेड कलर का पत्थर उपयोग किया जा रहा है।
यह पत्थर सेंड स्टोन के नाम से भी पहचाना जाता है। मंदिर बनाने में करीब 70 हजार घन फीट पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा। वंशी पहाड़पुर का सेंड स्टोन आम पत्थरों के मुकाबले काफी मजबूत और अच्छी क्वालिटी का होता है।
इस पत्थर की उम्र करीब 5 हजार साल मानी जाती है। साथ ही इस पर पानी पड़ने से यह और ज्यादा निखर जाता है। हजारों सालों तक एक रूप में ही कायम रहता है। इसमें टूट-फूट नहीं होती है। कारीगर जरूरत के हिसाब से इस पत्थर पर नक्काशी कर लेते हैं।
सिकंदरा और भरतपुर के शिल्पकार कर रहे नक्काशी
संत रविदास मंदिर निर्माण में उपयोग होने वाले सेंड स्टोन पर नक्काशी करने के लिए राजस्थान के सिकंदरा, भरतपुर और उदयपुर से शिल्पकार सागर आए हैं। 150 से अधिक शिल्पकार मंदिर में लगने वाले पत्थरों को आकार देने में लगे हुए हैं। हालांकि कुछ कारीगर लौट गए हैं। सिकंदरा के शिल्पकार पत्थर को मूर्त रूप देने के लिए देश समेत विदेशों में पहचाने जाते हैं।
मंदिर परिसर में भक्त निवास का निर्माण करीब 12500 वर्गफीट में किया गया है। जिसमें आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सर्व सुविधायुक्त वातानकुलित 15 कक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा 80 लोगों के ठहरने के लिए डोरमेट्री (शयन कक्ष) का निर्माण किया गया है।
मंदिर परिसर में आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए 15000 वर्गफीट में सर्व सुविधायुक्त फूड कोर्ट का निर्माण भी किया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार के पास लगभग 1940 वर्गफीट के दो गजीबो निर्मित किए गए हैं। संत रविदास महाराज के जीवन वृतांत का चित्रण सभी परिसर में म्युरल स्कल्प्चर के माध्यम से किया जाएगा।
डोरमेट्री-भक्त निवास का काम पूरा, रविदास कुंड भी बना
मंदिर परिसर में निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। रोजाना 300 से अधिक मजदूर, कारीगर और मिस्त्री काम कर रहे हैं। मप्र टूरिज्म के इंजीनियर विवेक चौबे ने बताया कि मंदिर निर्माण का कार्य लगातार किया जा रहा है। जिसमें अभी तक करीब 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। मार्च 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
विवेक चौबे ने बताया कि मंदिर का फाउंडेशन कार्य पूरा हो चुका है। पिलर खड़े हैं। क्रेन की मदद से शिखर का काम शुरू किया जा रहा है। म्यूजियम फाउंडेशन का कार्य अंतिम चरण में है। डोरमेट्री के दो तल, भक्त निवास, बाउंड्रीवाल, रविदास कुंड का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा टॉयलेट ब्लॉक स्ट्रक्चर, लाईब्रेरी और कैफेटेरिया का भी कार्य पूरा हो गया है।
90 फीसदी काम पूरा, रोजाना 300 मजदूर काम कर रहे
इंजीनियर विवेक चौबे ने बताया कि रविदास मंदिर और संग्रहालय का निर्माण अंतिम चरण में है। 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। मार्च में काम पूरा करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।
रोजाना करीब 300 मजदूर काम कर रहे हैं। मंदिर के शिखर का काम शुरू किया गया है। शेष भक्त निवास, डोरमेट्री, रविदास कुंड समेत अन्य निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं।