राजस्थान सरकार सामान्य प्रशासनिक खर्च के लिए भी उधार ले रही है। विधानसभा में 3 फरवरी को पेश हुई कैग रिपोर्ट के अनुसार इस उधार के लिए सरकार भारी-भरकम ब्याज चुका रही है।
वहीं, इस रिपोर्ट में सरकार ने कहां-कहां निवेश किया है इसकी भी जानकारी है। सरकार ने आम आदमी के 62 हजार करोड़ रुपए भी अलग-अलग सरकारी कंपनियों व अन्य जगह निवेश कर रखा है।
इस निवेश पर साल 2024-25 में सरकार को केवल 6 करोड़ का लाभांश (डिवडेंड) मिला। वहीं, भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में राजस्थान के आर्थिक प्रबंधन की तारीफ की गई है।
खर्चे चलाने के लिए सरकार ने लिया भारी कर्ज
कैग रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान सरकार ने 133 मौकों पर 271 दिनों के लिए रिजर्व बैंक से 91,251 करोड़ रुपए का विशेष एडवांस लिया, जिस पर उसे 161 करोड़ रुपए का ब्याज देना पड़ा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 57 मौके ऐसे आए जब सरकार ने 100 दिनों के लिए एडवांस लिया। इन 57 मौकों पर सरकार ने 31,029 करोड़ रुपये एडवांस लिए और इसके लिए 19 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में चुकाए।
विकास और संपत्तियां बनाने में कर्ज का आधे से कम खर्च
कैग रिपोर्ट के अनुसार साल 2020- 21 से लेकर 2024-25 में सरकार ने हर साल कर्ज लिया, लेकिन ठोस विकास और भविष्य की संपत्तियां बनाने में उसका आधा भी खर्च नहीं किया।
कर्ज का आधा हिस्सा प्रशासनिक और दूसरे खर्चों में चला गया। सरकार ने 2024-25 में 59,098 करोड़ का कर्ज लिया और उसमें से पूंजीगत खर्च 30,777 करोड़ ही किया। साल 2020- 21 में सरकार ने 48,941 करोड़ का कर्ज लिया, लेकिन पूंजीगत खर्च 15,271 करोड़ ही रहा।
सरकार ने 2024- 25 में 65 बार में लिया 75 हजार करोड़ के लॉन्ग टर्म कर्ज
कैग रिपोर्ट के अनुसार साल 2024-25 में सरकार ने 65 अलग अलग कर्ज लिए। करीब 75185 करोड़ 7.4% से लेकर 7.65% की अलग-अलग ब्याज दर पर लिए गए हैं। यह कर्ज 2032 से लेकर 2051 के बीच में चुकाए जाएंगे।
अनुदान में 15000 करोड़ की बढ़ोतरी
पिछले पांच साल के दौरान स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान के पैसे में करीब 15, 000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
साल 2020-21 में 39,745 करोड़ रुपए दिए गए थे जो 2024- 25 में बढ़कर 54,819 करोड रुपए हो गए। जिला परिषद, पंचायत समितियों और नगर पालिकाओं को 2024-25 में 4819 करोड़ रुपए दिए गए।
जिला परिषदों को 7940 करोड़, नगर पालिका और नगर निगम को सजा 7355 करोड़, ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां को 12,313 करोड़ का अनुदान दिया गया।