NDA का 5-0 प्लान: कुशवाहा, हरिवंश पर संशय:रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा जाना तय, मनीष वर्मा जा सकते हैं दिल्ली, भाजपा का फॉर्मूला जानिए

अप्रैल में बिहार से खाली हो रही राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। इसके लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा और 16 मार्च को वोटिंग होगी और उसी दिन नतीजों का ऐलान भी कर दिया जाएगा। इस बार के चुनाव में RJD को 2 सीटों का नुकसान और BJP को 2 सीटों का फायदा होना तय है।

इन सब के बीच 3 बातों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है

  1. क्या उपेंद्र कुशवाहा किसी सदन का मेंबर नहीं रहेंगे या BJP में सम्राट चौधरी का कद घटेगा?
  2. क्या हरिवंश नारायण सिंह किंग महेंद्र और वशिष्ठ नारायण सिंह के क्लब में शामिल होंगे?
  3. क्या चिराग पासवान अपने पिता के बाद मां को राज्यसभा तक पहुंचा पाएंगे?

NDA की पार्टी के बड़े नेताओं, पॉलिटिकल एक्सपर्ट से हमने राज्यसभा के समीकरण को समझा। पढ़िए, 2010 के बाद 200 से ज्यादा सीटें जीतने वाली NDA सवर्ण पर दांव लगाएगी या पिछड़ा कार्ड को ही मजबूती से आगे बढ़ाएगी…

9 अप्रैल 2026 को जिन 5 नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें RJD के प्रेमचंद गुप्ता, ऐडी सिंह, JDU के हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।

‌BJP-JDU के हिस्से में 2-2 सीटें आनी तय

राज्यसभा चुनाव में 1 सीट के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। दरअसल इसके लिए फॉर्मूला यह है कि जितनी सीटों पर चुनाव होना है, उनमें एक जोड़कर इसे विधानसभा की कुल सीटों से डिवाइड किया जाता है। इस लिहाज से विधानसभा की कुल 243 सीटों को 6 से भाग दिया जाए तो 40.5 आता है यानी 41 विधायक।

इस नंबर के लिहाज से RJD के लिए अपने एक नेता को भी राज्यसभा भेजना मुश्किल होगा। जदयू के पास 85 विधायक हैं, यानी वो अपनी दो सीटें बचा लेगी। ‌BJP के पास 89 विधायक हैं, ऐसे में राजद की 2 सीटों पर बीजेपी अपने प्रत्याशी को जिताने में सफल रहेगी।

अब उन चेहरों को जानिए जिनकी एंट्री हो सकती है

रामनाथ ठाकुर– रामनाथ ठाकुर अभी केंद्र सरकार में मंत्री हैं। JDU में EBC का सबसे बड़ा चेहरा हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं। ऐसे में इनका नाम कटना मुश्किल लग रहा है। नीतीश कुमार कर्पूरी ठाकुर को अपना आइडियल मानते हैं। EBC उनके कोर एजेंडे में शामिल रहा है। ऐसे में इनका नाम काटने से न केवल EBC के बीच गलत मैसेज जाएगा बल्कि नया सेंट्रल मिनिस्टर भी तय करना होगा।

हरिवंश नारायण सिंह– हरिवंश नारायण सिंह JDU कोटे से लगातार 2 टर्म राज्यसभा जा चुके हैं। अगस्त 2018 से लगातार राज्यसभा के उपसभापति बने हुए हैं। नीतीश कुमार के करीबी हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के साथ बेहतर रिश्ते हैं। इनके नाम पर संशय बरकरार है। नीतीश कुमार 2 बार से ज्यादा अभी तक मात्र 3 नेता (किंग महेंद्र, वशिष्ठ नारायण सिंह और शरद यादव) को राज्यसभा भेजे हैं।

मनीष वर्मा– जदयू कोटे से एक नाम जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो हैं मनीष वर्मा। अगर हरिवंश का नाम कटता है तो नीतीश कुमार इन्हें राज्यसभा भेज सकते हैं। मनीष वर्मा नीतीश कुमार के काफी करीबी माने जाते हैं। उनके सलाहकार रह चुके हैं। फिलहाल जदयू के राष्ट्रीय महासचिव हैं। IAS की नौकरी छोड़कर नीतीश कुमार के साथ जुड़े हैं। संगठन विस्तार के लिहाज से भी इन्हें राज्यसभा भेजने की चर्चा है।

BJP से एक अगड़ा और एक पिछड़ा को भेजने की चर्चा

BJP के कोई नेता फिलहाल इस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। प्रदेश स्तर के एक नेता ने भास्कर को बताया, ’इस पर अंतिम निर्णय सेंट्रल लीडरशीप की तरफ से लिया जाएगा। हालांकि, समीकरण के लिहाज से देखें तो एक अगड़ा और एक पिछड़ा को पार्टी की तरफ से राज्यसभा भेजा जा सकता है।

राज्यसभा में पार्टी का सवर्ण कोटे से भूमिहार का कोटा खाली है। 2024 में विवेक ठाकुर के लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद ये सीट उपेंद्र कुशवाहा को दे दी गई थी। इसके बाद से वहां ये कोटा खाली है। ऐसे में इस बार इस जाति को मौका मिल सकता है। इसके अलावा OBC कैटेगरी के एक नेता को भी मौका मिल सकता है।

पांचवीं सीट चिराग या कुशवाहा के हिस्से आ सकती है

सीटों के गणित के लिहाज से देखें तो JDU और BJP के दो-दो सांसद की जीत के बाद भी 10 विधायक एक्स्ट्रा बचते हैं। इनके अलावा LJP(R) के 19, HAM के 5 और RLM के 4 को मिला दें तो 38 विधायक हो जाते हैं।

यानी जीतने के लिए मात्र 3 विधायक की जरूरत पड़ेगी। विपक्ष में शामिल AIMIM पहले ही इस बात की घोषणा कर चुका है कि विकास के मुद्दे पर वो NDA को सपोर्ट करेगा। यानी 5वीं सीट भी NDA आसानी से जीत सकता है।

इस सीट पर फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा सांसद हैं। उनके मात्र 4 विधायक हैं। बिहार में सरकार गठन के दौरान आखिरी समय में बेटे को मंत्री बनाकर पहले ही उन्होंने अपनी दावेदारी कमजोर कर ली है। बेटा मंत्री, पत्नी विधायक और अब BJP उन्हें राज्यसभा नहीं भेजना चाहेगी।

वहीं, चिराग अपनी मां के लिए राज्यसभा के एक सीट की लगातार डिमांड करते रहे हैं। उनका ये दावा अब भी बरकरार है। ऐसे में उन्हें अगर पांचवीं सीट ऑफर की जाती है तो न केवल एनडीए के साथियों को मनाना होगा, बल्कि विपक्षी खेमे से भी 3 विधायकों का जुगाड़ करना पड़ेगा। अगर उनकी मां को राज्यसभा भेजा जाता है तो बिहार कैबिनेट में तीसरे मंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी कमजोर हो सकती है।

ओवैसी के सहारे खुल सकता है तेजस्वी का खाता

तेजस्वी यादव एक सीट जीत सकते हैं, लेकिन उसके लिए पूरे महागठबंधन को एकजुट होना होगा। साथ में असदुद्दीन ओवैसी की मदद लेनी होगी। इसे ऐसे समझिए…

  • NDA के पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए।
  • महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। 25 विधायक राजद के हैं। इसके बाद 6 विधायक कांग्रेस के हैं। लेफ्ट के 3, आईआईपी के 1 हैं। 5 विधायक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और 1 BSP के विधायक हैं। सबको जोड़ने पर 41 विधायक होते हैं। अगर सब एकजुट हुए तो एक सीट मिल सकती है।
  • ओवैसी की पार्टी किंगमेकर है। वह जिसे समर्थन करेगी, उसकी जीत पक्की है। NDA को जीतने के लिए ओवैसी की पार्टी का समर्थन या विपक्ष के दूसरे दल को तोड़ना होगा।
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