BHEL का OFS रिटेल निवेशकों के लिए खुला:₹254 फ्लोर प्राइस तय; शेयर गिरने से डिस्काउंट कम हुआ, पैसा लगाना चाहिए या नहीं

केंद्र सरकार की महारत्न कंपनी बीएचईएल का ‘ऑफर फॉर सेल’ आज 12 फरवरी से रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है। सरकार इसके जरिए कंपनी में अपनी 3% हिस्सेदारी बेच रही है। इसमें ग्रीनशू ऑप्शन के जरिए 2% अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया है।

शेयर पर डिस्काउंट 8% से घटकर 2-3% पर आया

इसके लिए ₹254 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। जब सरकार ने इस OFS का ऐलान किया था, तब फ्लोर प्राइस (₹254) बाजार भाव (करीब ₹276) से 8% कम था। लेकिन ऐलान के बाद BHEL के शेयरों में भारी गिरावट आई और यह ₹260 के करीब आ गया।

इस गिरावट की वजह से अब निवेशकों को मिलने वाला डिस्काउंट घटकर 2-3% रह गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिस्काउंट कम होने से निवेशकों के लिए यह सौदा अब उतना आकर्षक नहीं रहा जितना पहले लग रहा था। हालांकि अब भी इसमें निवेश किया जा सकता है।

₹355 का टारगेट और 2.23 लाख करोड़ का ऑर्डर बुक

ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल ने मध्यम अवधि के लिए ₹355 का टारगेट दिया है। तर्क है कि भारत को 2047 तक अपनी थर्मल क्षमता को 340 GW तक ले जाना है। BHEL के पास फिलहाल 2.23 लाख करोड़ रुपए के ऑर्डर हैं, जो भविष्य में अच्छी कमाई का संकेत देते हैं।

थर्मल पावर के अलावा, BHEL न्यूक्लियर एनर्जी और कोल गैसीफिकेशन (कोयले से गैस बनाना) के क्षेत्र में भी काम कर रही है। भारत ने 2047 तक न्यूक्लियर क्षमता को 8.8 GW से बढ़ाकर 100 GW करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें BHEL इकलौती घरेलू टर्बाइन मेकर है।

महंगी वैल्यूएशन और रिस्क से रहें सावधान

बोनन्जा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भले ही कंपनी का ऑर्डर बुक 2 लाख करोड़ रुपए के पार है, लेकिन मुनाफे का अनुपात (ROIC और ROCE) अभी भी कम है।

उनके मुताबिक, बाजार पहले ही भविष्य की रिकवरी को कीमत में शामिल कर चुका है। प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने का रिस्क और पीएसयू शेयरों पर दबाव को देखते हुए नए निवेश के लिए यह थोड़ा रिस्की हो सकता है।

तीसरी तिमाही में मुनाफा 200% से ज्यादा बढ़ा

BHEL का दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 206% बढ़कर ₹382 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹125 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 16% बढ़कर ₹8,473 करोड़ पर पहुंच गया। कामकाज में सुधार और ऑपरेशंस पर बेहतर पकड़ के चलते कंपनी के मुनाफा बढ़ा है।

निवेश से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान:

  • सस्ते का लालच: फ्लोर प्राइस और मार्केट प्राइस का अंतर अब बहुत कम है, इसलिए केवल ‘डिस्काउंट’ के लिए आवेदन न करें।
  • लंबी अवधि: अगर आप 2-3 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो ही थर्मल कैपेक्स साइकिल का फायदा मिल सकता है।
  • रिस्क फैक्टर: रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) की तरफ बढ़ते झुकाव से कोयला आधारित प्रोजेक्ट्स पर लंबी अवधि में असर पड़ सकता है।

सरकार के खाते में जाएगी पूरी रकम

यह एक ‘ऑफर फॉर सेल’ है, जिसमें प्रमोटर यानी भारत सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम सरकार के खाते में जाएगी। इससे कंपनी के कर्ज या बैलेंस शीट पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

सरकार के पास अभी 63% से ज्यादा हिस्सेदारी

वर्तमान में BHEL की प्रमोटर भारत सरकार है। सरकार की कंपनी में कुल 63.17% हिस्सेदारी है। इस 5% हिस्सेदारी की बिक्री के बाद भी कंपनी पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा। विनिवेश के तहत सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास के कामों के लिए फंड जुटा रही है।

नॉलेज बॉक्स: OFS, फ्रेश ऑफर, ग्रीन शू ऑप्शन, फ्लोर प्राइस समझें

  • ऑफर फॉर सेल: यह लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटर्स (यहां सरकार) द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने का एक आसान तरीका है। इसमें शेयर सीधे एक्सचेंज के जरिए बेचे जाते हैं।
  • फ्रेश इश्यू: इसमें कंपनी नए शेयर जारी करती है। इससे मिलने वाला पैसा कंपनी के बैंक खाते में जाता है, जिसका इस्तेमाल कर्ज चुकाने या बिजनेस बढ़ाने में किया जाता है।
  • ग्रीनशू ऑप्शन: यह एक प्रावधान है जिसके तहत अगर शेयरों की मांग ज्यादा होती है, तो प्रमोटर तय हिस्सेदारी से ज्यादा शेयर बेच सकता है। यहां 2% का ग्रीनशू ऑप्शन है।
  • फ्लोर प्राइस: वह न्यूनतम कीमत होती है जिस पर सरकार या प्रमोटर अपने शेयर बेचने को तैयार होते हैं। निवेशक इससे कम कीमत पर बोली नहीं लगा सकते। आमतौर पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इसे बाजार की मौजूदा कीमत से थोड़ा कम रखा जाता है।
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