KGMU के लिंब सेंटर में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (HRF) का सेंट्रल ड्रग स्टोर बनाया जाएगा। इसके लिए सर्वे करा लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि लिंब सेंटर के वुडन हॉल को भी स्टोर में तब्दील किया जाएगा।
मौजूदा समय में KGMU में 22 स्टोर का संचालन हो रहा है। करीब 25 से 30 करोड़ की दवाएं और इंप्लांट स्टोर में रखा जाता है। अभी सेंट्रल ड्रग स्टोर अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में है। वहां से सेंट्रल स्टोर हटाने के निर्देश हैं। इसको लेकर बैठक में स्टोर को लिंब सेंटर में शिफ्ट करने की योजना बनी थी। लिंब सेंटर में DPMR विभाग का संचालन हो रहा है, जिसमें दिव्यांगजनों का इलाज और कृत्रिम अंग बनाए जाते हैं।
1971 में केंद्र ने दिया था बजट
लिंब सेंटर में ही वुडन हाल है। वर्ष 1971 में बंगलादेश से लड़ाई के समय तत्कालीन केंद्र सरकार ने एक करोड़ रुपए से लिंब सेंटर निर्माण के लिए दिए थे। लिंब सेंटर में खास तरह की लकड़ी से हॉल का निर्माण हुआ था। उस समय और वर्तमान में इतना बड़ा और उपयोगी वुडन हाल पूरे भारत के किसी भी दिव्यांगजन संस्थान में नहीं है। इसका उपयोग दिव्यांगजनों को बैडमिंटन, टेबल टेनिस, व्हील चेयर रेस की ट्रेनिंग देने के लिए था।
प्रशिक्षण के लिए होता था इस्तेमाल
वर्ष 1973, वर्ष 1977 व वर्ष 1994 के बर्लिन, टोक्यो में संपन्न हुए पैरा ओलिंपिक खेलों में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, व्हील चेयर रेस तथा एम्पुटेट दौड़ में बनवारी, शाकिर अली, मोहन लाल ने दिव्यांग श्रेणी में तीन गोल्ड मेडल जीत कर भारत का नाम रोशन किया था। इस हॉल में दिव्यांगों को प्रशिक्षण दिया जाता था।
इस हाल की विशेषता ये है कि इसके निर्माण में कोई भी कील नहीं लगाई गई थी। उसका कारण ये था कि पैरापलेजिया मरीजों जिनकी चुभने का एहसास नहीं होता है उनको ट्रेनिंग के समय कोई कील चुभने अब इस हाल का इस्तेमाल बदलने की कवायद चल रही है, जो नियमानुसार नहीं है। शासनादेश में भी स्पष्ट लिखा गया है कि केंद्र का उपयोग केवल दिव्यांग जन के कृत्रिम अंग और दिव्यांगजनों संबंधित कार्यों के लिए ही किया जाएगा।