केसी त्यागी आज रालोद जॉइन कर सकते हैं:दिल्ली में किसानों की गोष्ठी, जयंत चौधरी भी आएंगे; वेस्ट यूपी में जनाधार जानिए

जदयू से लंबे समय तक जुड़े रहे केसी त्यागी आज रविवार को रालोद जॉइन कर सकते हैं। दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित किसान समृद्धि गोष्ठी में वह शामिल होंगे। इसके मुख्य अतिथि रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय राजयमंत्री जयंत चौधरी होंगे।

केसी त्यागी और जयंत चौधरी दोनों एक साथ मंच पर होंगे। 11 जनवरी 2026 के बाद ये दूसरा अवसर होगा, जब दोनों नेता एक साथ एक मंच पर आ रहे हैं। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, पूर्व सांसद मलूक नागर सहित पश्चिम यूपी के अन्य रालोद नेता भी शामिल होंगे। पश्चिम यूपी की राजनीति को लेकर ये गोष्ठी अहम बदलाव की ओर इशारा करती दिख रही है।

गोष्ठी के निमंत्रण पत्र पर चौधरी परिवार की 3 पीढ़ियों की तस्वीरें

किसान समृद्धि गोष्ठी के जो निमंत्रण पत्र तैयार कर बांटे गए हैं, वो भी इस नए राजनीतिक फेरबदल को संकेत दे रहे हैं। निमंत्रण पत्रों पर केसी त्यागी के साथ जयंत चौधरी की फोटो अगल-बगल लगी है। वहीं एक ओर भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की तस्वीर है। ऊपर जयंत चौधरी के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चौधरी अजीत सिंह की भी फोटो लगी है। इस तरह चौधरी परिवार की तीन पीढ़ियों का समागम इस निमंत्रण पत्र में किया गया है।

1.) जदयू (JDU) में मेंबरशिप रिन्यूअल नहीं कराया

केसी त्यागी नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे हैं। केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। एक सितंबर, 2024 को वह जदयू के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटा दिए गए थे। पार्टी में हाशिए पर चल रहे त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग करते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखा था। इसके बाद जदयू ने उनसे किनारा कर लिया था।

2.) त्यागी ने जयंत चौधरी से किताब का विमोचन कराया

11 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में केसी त्यागी की लिखी किताब ‘संकट में खेती’ का विमोचन भारत मंडपम के पुस्तक मेले में हुआ था। किताब का विमोचन रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने किया था।

इसके बाद से माना जा रहा था कि त्यागी रालोद का रुख कर सकते हैं। ये किताब चौधरी चरण सिंह और स्वामी सहजानंद सरस्वती को समर्पित है, जो किसानों के संघर्ष पर प्रकाश डालती है।

3.) जयंत ने कहा था- हर दल में एक केसी त्यागी जरूरी

जयंत ने केसी त्यागी द्वारा चौधरी चरण सिंह पर लिखी किताब का विमोचन करते हुए न सिर्फ उन्हें चौधरी साहब का सच्चा शिष्य बताया, बल्कि यह भी कहा कि मैं त्यागीजी को मनाने आया हूं। हर दल में एक केसी त्यागी होना चाहिए।

चौधरी चरण सिंह की छत्रछाया में बढ़े केसी त्यागी

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि चौधरी चरण सिंह केसी त्यागी को अपना विचारपुत्र मानते थे, इस बात को वे कहते भी थे। उन्होंने अजित सिंह के सामने भी इस बात को कई बार कहा कि चौधरी साहब के जैविक पुत्र आप हैं, लेकिन मैं वैचारिक पुत्र हूं।

अगर रालोद केसी त्यागी को अपने साथ जोड़ती है तो इसके जरिए एक बड़ा मैसेज वेस्ट यूपी में की त्यागी बिरादरी को जाएगा। इसका इंपैक्ट 2027 के चुनाव में भी देखने को मिलेगा।

गाजियाबाद में किसान परिवार में जन्मे त्यागी

केसी त्यागी का जन्म यूपी के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर स्थित मोरटा गांव में हुआ था। वह साधारण किसान परिवार से थे। उनके पिता जगराम सिंह त्यागी और माता रोहताश त्यागी थीं। उन्होंने मुरादनगर में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद त्यागी ने मेरठ विश्वविद्यालय से B.Sc. की डिग्री ली थी।

गाजियाबाद और मेरठ से सांसद का चुनाव लड़ा

केसी त्यागी 1989 में गाजियाबाद से सांसद का चुनाव जनता दल के टिकट पर लड़कर जीते। तब उन्होंने कांग्रेस के प्रेममोहन, जो मोहन मिकिंस कंपनी के मालिक थे और कांग्रेस के सिटिंग एमपी थे, उनको हराया। हालांकि, 1991 के चुनाव में रामलहर में त्यागी भाजपा के रमेशचंद तोमर से हार गए। इसके बाद जनता दल टूट गया। तब मुलायम सिंह ने अपनी खुद की पार्टी सपा बनाई।

केसी त्यागी सपा में गए, लेकिन वहां उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं मिली। वो आखिरी में समता पार्टी में नीतीश कुमार के साथ चले गए। फिर 2004 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जदयू को मेरठ सीट लड़ने के लिए दी। तब केसी त्यागी ने जदयू से मेरठ सीट से सांसदी का चुनाव लड़ा। लेकिन, इस बार बसपा से मेयर रहे शाहिद अखलाक चुनाव जीत गए।

पांच बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले त्यागी बिहार से 2013 से 2016 तक राज्यसभा सदस्य भी रहे। मुख्य रूप से त्यागी जदयू अध्यक्ष शरद यादव के साथ रहे। मगर बाद में नीतीश के साथ आगे बढ़ते रहे। नीतिश ने ही उन्हें प्रधान महासचिव बनाया।

भाजपा में बेटे को तवज्जो नहीं, त्यागी नाराज

वेस्ट यूपी में त्यागी बिरादरी से जुड़े भाजपा के एक बड़े नेता ने केसी त्यागी के रालोद जॉइनिंग के पीछे की वजह बताई। इसमें कहा- केसी त्यागी बेटे अमरीश को राजनीति की मुख्यधारा में लाना चाह रहे। यूपी के 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान अमरीश ने भाजपा जॉइन की थी।

अमरीश त्यागी भाजपा में पहले दिन से साइडलाइन और उपेक्षा का शिकार रहे। माना जा रहा है कि केसी त्यागी खुद रालोद के नीतिगत और राजनीतिक सलाहकार के तौर पर काम करेंगे। बेटे को वेस्ट यूपी से 2027 के चुनाव में टिकट की दावेदारी कराएंगे।

किठौर या गाजियाबाद से टिकट मांग सकते हैं

सीनियर जर्नलिस्ट अनिल बंसल कहते हैं, मेरठ की किठौर सीट पर भाजपा से सतवीर त्यागी 2017 में विधायक रह चुके हैं। गाजियाबाद का मुरादनगर भी त्यागियों की जीती सीट है। भाजपा से अजीत पाल त्यागी यहां मौजूदा विधायक हैं।

2017, 2022 का चुनाव जीते हैं। इससे पहले उनके पिता स्व. राजपाल त्यागी इस सीट से 7 बार चुनाव जीते और केंद्र में मंत्री रहे। ऐसे में केसी त्यागी रालोद के जरिए NDA में इन सीटों से बेटे अमरीश के लिए टिकट का दावा करेंगे।

  • केसी त्यागी मुख्य पॉलिटिक्स में उभर आएंगे : केसी त्यागी को रालोद संरक्षक या नीतिगत रूप से अपने साथ जोड़ सकता है। मुख्य पॉलिटिक्स की जिस तस्वीर से केसी त्यागी बाहर नजर आ रहे हैं, फेम के उस फ्रेम में रालोद के जरिए वापसी कर सकते हैं। बेटे के लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर सकते हैं। मेरठ मंडल में सपा से ज्यादा प्रभाव रालोद का है। रालोद के जरिए 2027 में त्यागी को सीट मिल सकती है।
  • त्यागी बिरादरी में रालोद की पहुंच बढ़ेगी : रालोद को एक अच्छा संरक्षक मिलेगा। इससे रालोद का थिंकटैंक मजबूत होगा। त्यागी बिरादरी जो भाजपा का कोर वोटर है, उसमें रालोद की पहुंच बढ़ेगी। वेस्ट यूपी में रालोद को अब तक जाटों की पार्टी कहा जाता है, लेकिन त्रिलोक त्यागी के बाद अब केसी त्यागी के जुड़ने से रालोद के पास बिरादरी के दो बड़े चेहरे होंगे। इससे रालोद सर्वसमाज की पार्टी बनकर भाजपा पर टिकट के लिए मनचाहा दबाव बना सकती है।
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