कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का नाम जेफ्री एपस्टीन फाइल्स से जुड़े होने के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता इस मामले में झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
खेड़ा ने X पर पोस्ट में लिखा- जिस दस्तावेज का हवाला दिया जा रहा है, वह 59 पन्नों का एक कैलेंडर है, जिसमें न्यूयॉर्क में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों, कॉन्फ्रेंस और फंडरेजर की लिस्ट है। यह दस्तावेज कथित तौर पर 10 सितंबर 2010 को मार्गॉक्स रोजर्स ने एपस्टीन की निजी सहायक लेस्ली ग्रॉफ को भेजा था।
उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल का नाम इस लिस्ट के पेज 55 पर एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां इंटरनेशनल एजुकेशन इंस्टीट्यूट ने वैश्विक शिक्षा सहयोग में योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था।
खेड़ा ने स्पष्ट किया कि इस सम्मान समारोह का एपस्टीन से कोई संबंध नहीं था और सिब्बल की एपस्टीन के साथ किसी बैठक या निजी संपर्क का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
दरअसल, भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी और शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया है कि एपस्टीन से जुड़े फंड वाले संस्थान ने सिब्बल को सम्मानित किया था और कांग्रेस को इस पर जवाब देना चाहिए।
कार्यक्रम का एपस्टीन से कोई लेना-देना नहीं
खेड़ा ने कहा कि एपस्टीन ने इस संस्थान को 2002 से 2006 के बीच दान दिया था, जो सिब्बल को 2010 में दिए गए सम्मान से कई वर्ष पहले की बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता पूरी फाइल पढ़े बिना स्क्रीनशॉट के आधार पर विपक्षी नेताओं को विवाद में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं।
पवन खेड़ा ने कहा है कि भाजपा नेता पूरी फाइल पढ़े बिना केवल स्क्रीनशॉट के आधार पर विपक्षी नेताओं को विवाद में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को उठाकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
एपस्टीन से 3-4 बार मिले थे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 11 फरवरी को बताया था कि वह यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे। यह बातचीत पूरी तरह से प्रोफेशनल थी, जो इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म और दूसरे इंटरनेशनल कामों से जुड़ी थी।
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। पुरी ने कहा,
जब मैंने मई 2009 से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था, तब से लेकर 2017 में मंत्री बनने तक की अवधि के 30 लाख ईमेल जारी किए गए हैं। इस दौरान, केवल तीन या चार बैठकों का ही जिक्र मिलता है और मेरी बातचीत पूरी तरह से पेशेवर थी।
कौन था जेफ्री एपस्टीन?
जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी।
उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली।
उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है।
एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है
इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया।
जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है।
धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई।
मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं।
एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी।
हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था।
मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन
साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं।
इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए।
इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर ‘#MeToo’ लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं।
इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की।