77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ में हुई परेड के दौरान विपक्षी नेताओं की बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हो गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को तीसरी पंक्ति में बैठाकर अपमान किया गया।
कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष के नेताओं को पीछे बैठाना प्रोटोकॉल और परंपरा के खिलाफ है। पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता आगे बैठते हैं, तो विपक्ष को पीछे क्यों रखा गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में खड़गे, राहुल गांधी के साथ तीसरी लाइन में बैठे दिखे। बाद में खड़गे को आगे की लाइन में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पास बैठाया गया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार यह बदलाव बताता है कि शुरुआत में बैठने की व्यवस्था गलत थी।
लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मणिकम टैगोर ने 2014 की फोटो शेयर कर बताया कि उस समय लालकृष्ण आडवाणी, कई केंद्रीय मंत्री व सोनिया गांधी के साथ आगे बैठे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले विपक्षी नेताओं को आगे बैठाया जाता था तो अब प्रोटोकॉल की बात क्यों हो रही है और आरोप लगाया कि मोदी-शाह जानबूझकर खड़गे व राहुल का अपमान कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
- रणदीप सुरजेवाला ने X पर लिखा कि क्या विपक्ष के नेता के साथ किया गया यह व्यवहार शिष्टाचार, परंपरा और प्रोटोकॉल के अनुरूप है। यह सरकार की निराशा और हीन भावना को दिखाता है। लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं लेकिन राहुल गांधी के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी नाराजगी जताई हुए इसे प्रोटोकॉल और शिष्टाचार की खुली अनदेखी बताया। उन्होंने कहा- मुझे याद नहीं कि जब सुषमा स्वराज या अरुण जेटली विपक्ष के नेता थे, तब उनके साथ कभी ऐसा व्यवहार किया गया हो। खड़गे और राहुल गांधी भारतीय राजनीति के बड़े नाम हैं और उन्हें पीछे बैठाना केवल उनका नहीं, बल्कि देश और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान है। मौजूदा राजनीतिक माहौल में सत्ता में बैठी पार्टी से बेहतर व्यवहार की उम्मीद नहीं है। इस तरह की छोटी-छोटी हरकतों से लोकतंत्र कमजोर होता है और संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचती है।
BJP बोली- राहुल जरूरी कार्यक्रमों में क्यों नहीं आते?
BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस एक बार फिर परिवार, पद और अहंकार को देश और जनता से ऊपर रख रही है। BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि बैठने की व्यवस्था टेबल ऑफ प्रिसिडेंस यानी तय सरकारी नियमों के अनुसार होती है।
शहजाद पूनावाला ने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गांधी कई अहम कार्यक्रमों में शामिल क्यों नहीं होते। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी उपराष्ट्रपति और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के शपथ ग्रहण समारोह में कहां थे और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में क्यों नहीं दिखे। उनका कहना था कि राहुल गांधी के आसपास और पीछे कई वरिष्ठ मंत्री भी बैठे थे, लेकिन किसी ने इसे मुद्दा नहीं बनाया।
यह पहली बार नहीं है जब गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी इसी तरह के मुद्दे सामने आ चुके हैं।