ममता बनर्जी जिन अल्पसंख्यकों की रक्षा करने का दावा करती हैं, वे उनका असली वोट बैंक है। सबसे ज्यादा घुसपैठिए पश्चिम बंगाल में हैं और वहां से पूरे देश में फैलते हैं। अब कुछ दिन और ममता बनर्जी उनकी रक्षा कर लें। यह कहना है मथुरा के राज्यसभा सांंसद चौधरी तेजवीर सिंह का। वह शनिवार देर शाम वीर बाल दिवस बलिदानी सप्ताह के तहत गुरुद्वारा वैकुंठ नगला ताड़ पर आए हुए थे।
घुसपैठ केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं आंतरिक सुरक्षा का मामला
टीएमसी सांसद सौगत रॉय के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि बांग्लादेशी भी ममता बनर्जी पर भरोसा करते हैं। इस पर चौधरी तेजवीर सिंह ने कहा कि ममता कुछ दिन और इन्हें संरक्षण दे लें, क्योंकि अब बंगाल और ममता की बारी बहुत जल्द आने वाली है। यह खेल अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा। घुसपैठ केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर राजनीतिक तुष्टिकरण खतरनाक साबित हो सकता है।
साहिबजादों के बलिदान से राष्ट्र को सीख
चौधरी तेजवीर सिंह ने भारत के गौरवशाली इतिहास को भी याद किया। उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों के अमर बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका शौर्य आज भी देश को धर्म, सत्य और राष्ट्र की रक्षा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इन वीर गाथाओं को इतिहास के हाशिये पर रखा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वीर बाल दिवस’ के माध्यम से साहिबजादों के बलिदान को हर घर तक पहुंचाने का काम किया।
वीर बाल दिवस बलिदानी सप्ताह के तहत गुरुद्वारा में आयोजित विचार संगोष्ठी में साहिबजादों को श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने कहा कि 9 वर्षीय बाबा जोरावर सिंह और 6 वर्षीय बाबा फतेह सिंह का बलिदान भारतीय इतिहास की आत्मा को झकझोर देने वाला अध्याय है।
अल्पायु में भी उन्होंने धर्म परिवर्तन से इनकार किया और दीवारों में जीवित चुनवाए जाते समय भी उनके चेहरे पर भय नहीं, बल्कि राष्ट्र और धर्म के प्रति अडिग समर्पण था। यह बलिदान आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।