जड़ी-बूटी से इलाज करने वालों को मास्टर ट्रेनर बनाएगी सरकार:मरीजों तक पहुंचने का जरिया बनेंगे, बीमार की AIIMS के डॉक्टर से कराएंगे बात

देश के ऐसे आदिवासी इलाके, जहां डॉक्टर्स का पहुंचना कठिन है, वहां बीमारी के इलाज के लिए ‘जनजाति गुणीजन’ (देसी इलाज करने वाले और जड़ी-बूटी के जानकार) बनाए जाएंगे।

ये खुद इलाज नहीं करेंगे, ये ‘गुणीजन’ मरीज और एम्स के बीच सेतु का काम करेंगे। अगर मरीज इनके पास आता है तो उसे एम्स के जरिए टेलीमेडिसिन (फोन पर बात करके) से इलाज मिलेगा।

इसके लिए AIIMS जोधपुर के सहयोग से सिरोही के आबू रोड में सेटेलाइट ट्राइबल सेंटर के जरिए टेलीमेडिसिन सुविधा प्रदान की जाएगी।

इस प्रोजेक्ट को लेकर अभी प्रदेश में 18 गुणीजन को मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। आगे दूसरे गुणीजनों को भी जोड़ा जा रहा है।

इस प्रक्रिया के जरिए सरकार उन मरीजों तक पहुंचना चाहती है, जो हॉस्पिटल नहीं आते। इन गुणीजनों के पास ही मरीज सबसे पहले इलाज करवाते हैं। अब सरकार इन गुणीजनों के जरिए सीधे मरीज तक पहुंचने जा रही है।

एम्स के डॉक्टर बोले- आदिवासी इलाकों में सेवाएं पहुंचेंगी

एम्स जोधपुर के डॉ. प्रदीप द्विवेदी ने बताया- देश में पहली बार में ऐसा प्रयोग हो रहा है। इन गुणीजनों का मुख्य धारा में संभावित रोल में देखा जा रहा है।

देश में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई काम हुए। देश नई तकनीक से आगे बढ़ रहा है, लेकिन दूरदराज के आदिवासी इलाकों में सभी सेवाएं नहीं पहुंच रही हैं। इसी सोच से गुणीजन के सहयोग से यह काम किया जा रहा है।

पहले उनको जोड़ेंगे, टोकेंगे नहीं

डॉ. प्रदीप द्विवेदी ने बताया- गुणीजनों के काम को लेकर पहले समझेंगे और उनको जोड़ेंगे। उनकी बातों को इग्ननोर नहीं किया जाएगा। हमारी कोशिश है कि वे हमारी चर्चाओं में शामिल हों। ताकि एक बार वे सरकार के इस कार्यक्रम से जुड़ें।

सिरोही में शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सिरोही से इस पर काम शुरू किया गया है। डा. प्रदीप द्विवेदी ने बताया कि राजस्थान के सिरोही जिले को लेकर एक मॉडल तैयार किया गया है।

इसके तहत यहां पर जनजातीय गुणीजन को लेकर मैपिंग की गई। इसमें गुणीजनों की संख्या 1015 आई। इसमें भी 80 प्रतिशत लोग झाड़-फूंक मतलब नॉन साइंटिफिक हैं।

इनमें से 5 प्रतिशत गुणीजन ऐसे हैं, जो ग्रेजुएट या बारहवीं पास हैं। अब सरकार सबसे पहले इन पढ़े-लिखे गुणीजनों से इतना करवा रही है कि मरीज इनके पास आएं तो ये सीधे सिरोही के आबूरोड केंद्र पर जानकारी दें।

जरूरत होने पर जोधपुर एम्स में वीडियो कॉल के जरिए मरीज का पूरा केस समझा जाए। इसके साथ ही इलाज शुरू हो जाएगा। जरूरत होने पर मरीज को एम्स बुला लिया जाएगा।

सिरोही में केंद्र बनाया

सिरोही के आबू रोड में AIIMS जोधपुर के सहयोग से सैटेलाट ट्राइबल सेंटर के जरिए टेलीमेडिसिन सुविधा प्रदान की जा रही है। यह केंद्र आबू रोड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्थित है। दूरदराज के क्षेत्रों के आदिवासियों को टेलीकंसल्टेशन (विशेषज्ञ परामर्श) प्रदान करता है।

हैदराबाद और उदयपुर में हुई ट्रेनिंग

माणिक्यलाल वर्मा आदिमजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRI) उदयपुर के निदेशक ओपी जैन ने बताया- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनजाति गुणीजन को हमने हैदराबाद और उदयपुर में ट्रेनिंग दी है।

इन गुणीजनों की आदिवासी इलाके में पहुंचना आसान होगा। इनके माध्यम से एम्स जोधपुर के डॉक्टर मरीजों को परामर्श देंगे।

गंभीर पीड़ित आदिवासी को गुणीजन के माध्यम से जोधपुर एम्स ले जाकर इलाज करवाया जाएगा। इसमें एम्स के प्रतिष्ठित डॉक्टर्स सेवाएं देंगे।

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