जयपुर शहर की सांस्कृतिक धड़कन ‘रवीन्द्र मंच’ की टूटेगी खामोशी:70 पार के कलाकार नाटक ‘जामुन का पेड़’ का करेंगे मंचन; इस धरोहर को बचाने की पहल

कभी शहर की सांस्कृतिक धड़कन माना जाने वाला रवीन्द्र मंच आज अपनी उपेक्षा और बदहाली की कहानी खुद बयां करता नजर आता है। जर्जर दीवारें, छतों की दरार, टपकते छज्जे, बदहाल वॉशरूम और टूटे दरवाजे इस ऐतिहासिक प्रेक्षागृह की दुर्दशा को उजागर कर रहे हैं। ऐसे हालात के बीच जयपुर के वरिष्ठ कलाकार अब इसी मंच की खामोशी तोड़ने के लिए आगे आए हैं।

जयपुर की नाट्य संस्था रंग-शिल्प नाट्य संस्था ने निर्णय लिया है कि वह अपने चर्चित नाटक “जामुन का पेड़” की 13वीं प्रस्तुति रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में करेगी। यह प्रस्तुति 15 मार्च को शाम 7 बजे होगी और इसे पूरी तरह रवीन्द्र मंच को समर्पित किया जाएगा। कलाकारों का कहना है कि यह केवल नाटक का मंचन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की एक प्रतीकात्मक पहल है।

बुजुर्ग कलाकार, कभी इसी मंच पर किया था अभिनय

यह नाटक मशहूर कहानीकार कृष्ण चन्दर की कालजयी कहानी पर आधारित है। इसका नाट्य रूपांतरण नीरज गोस्वामी ने किया है, जबकि निर्देशन गुरमिंदर सिंह पुरी ‘रोमी’ कर रहे हैं।

इस प्रस्तुति की सबसे भावुक और प्रेरक बात यह है कि इसमें अभिनय करने वाले कलाकारों में से लगभग 70 प्रतिशत की उम्र 70 साल से ज्यादा है। यानी जिन कलाकारों ने कभी इस मंच पर अपने अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया था, वहीं वरिष्ठ कलाकार अब इसके पुनर्जीवन की पुकार बनकर मंच पर उतरेंगे।

नाटक में नीरज गोस्वामी, ईश्वर दत्त माथुर, राजेन्द्र शर्मा ‘राजू’, मोइनुद्दीन खान, गुरमिंदर सिंह पुरी ‘रोमी’, अशोक महेश्वरी, आलोक चतुर्वेदी, जीतू, दीपक कथूरिया, धनराज दाधीच, यादवेन्द्र आर्य ‘याद’ और श्रेया गोठवाल सहित कई कलाकार अभिनय करेंगे। इसके अलावा मशहूर शायर लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ भी इस प्रस्तुति में एक छोटे से किरदार में नजर आएंगे।

रवीन्द्र मंच को लेकर भावनात्मक और प्रतीकात्मक संदेश देंगे

लोकेश कुमार सिंह साहिल ने कहा कि रवीन्द्र मंच कभी जयपुर के सांस्कृतिक जीवन का केंद्र हुआ करता था, जहां नाटक, संगीत, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गूंज से शहर की पहचान बनती थी। समय के साथ इसकी देखरेख में आई कमी के कारण आज यह भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। यहां तक कि भवन में लगे तांबे के पाइप तक चोरी हो चुके हैं और कई एसी मशीनें भी खराब पड़ी बताई जाती हैं। ऐसे में यह नाट्य मंचन सभी के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश होगा।

ऐसे में वरिष्ठ कलाकारों की ओर से किया जा रहा यह मंचन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक संदेश भी है। कलाकारों का मानना है कि अगर समय रहते इस ऐतिहासिक प्रेक्षागृह की सुध नहीं ली गई तो जयपुर की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर खो सकती है।

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