घर पर चाय पिलाने की मेहमान नवाजी से फ्रांसीसी दंपती का मन राजस्थान अटक गया। एक महीने तक पाली के सोडावास गांव में रुकने के बाद लौट गए। यादें जहन में थी, लेकिन गांव का नाम, पता भूल चुके थे। बेटी ने गूगल की मदद से गांव को ढूंढा। 30 साल बाद 4700 किलोमीटर दूर गांव में खिंचे चले आए।
यादों को जीने लोगों के बीच पहुंचकर फ्रांसीसी कपल भावुक हो गया। कहा-बहुत कुछ बदल गया, कच्चे मकान अब पक्के हो गए। लेकिन संस्कृति और अपनापन नहीं बदला।
सोडावास पहुंचते ही भावुक हुआ फ्रांसीसी दंपती
15 जनवरी को सोडावास गांव पहुंचते ही फ्रांसीसी दंपती गिरार्ड (85) और उनकी पत्नी सोलेज (73) हो गए। उन्होंने कहा कि बीते 30 सालों में भारत ने खूब तरक्की की है।
जहां पहले कच्चे मकान हुआ करते थे, आज वहां पक्की इमारतें और आधुनिक सुविधाएं नजर आती हैं। गांव का स्वरूप जरूर बदल गया है, लेकिन लोगों का अपनापन और सांस्कृति आज भी पहले जैसे ही हैं।
चाय के लिए रुके, एक महीने तक बन गए गांव के मेहमान
फ्रांस दंपती साल 1995 में अपने तीन बच्चों के साथ भारत घूमने आए थे। इस ट्यूर के लिए सोलेज ने एक रिक्शा खरीदा और उसे अपनी जरूरत के अनुसार तैयार कर भारत की यात्रा की। रणकपुर घूमने के बाद वे परिवार सहित पाली शहर की ओर जा रहे थे।
इसी दौरान सोडावास गांव में रहने वाले भोपाल सिंह ने उन्हें देखा और चाय के लिए अपने घर ले गए। भोपाल सिंह और ग्रामीणों के व्यवहार से प्रभावित होकर परिवार करीब एक महीने तक सोडावास में रुक गया था।इस दौरान उन्होंने गांव की संस्कृति को करीब से जाना, आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया और जाते समय अपना रिक्शा भी यहीं छोड़ गए।
पाली के बाजार देख ताजा हुईं पुरानी यादें
भोपाल सिंह के बेटे ऋषिपाल सिंह ने बताया- विदेशी दंपती ने पाली के बाजारों में घूमकर अपनी यादों को फिर से ताजा किया। पाली के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के दर्शन किए और बाजार से खरीदारी भी की। इसके अलावा दंपती ने उदयपुर और रणकपुर का भी भ्रमण किया।
गूगल और बेटी की मदद से फिर पहुंचे सोडावास
तीन दशक पहले गिरार्ड और उनकी पत्नी सोलेज भारत घूमने आए थे। उस समय गिरार्ड की उम्र 52 वर्ष और सोलेज की 42 वर्ष थी। अब गिरार्ड 85 वर्ष के हैं और सोलेज 73 वर्ष की हैं।
दोनों की लंबे समय से इच्छा थी कि एक बार फिर भारत आएं और उस गांव को देखें, जहां उन्होंने परिवार के साथ करीब एक महीना बिताया था।
हालांकि, समय बीतने के साथ वे गांव का नाम और स्थान भूल चुके थे। ऐसे में उनकी बेटी नाना ने गूगल मैप्स की मदद ली और पाली जिले के छोटे से गांव सोडावास की लोकेशन तलाश की।
बेटी नाना वर्ष 2025 में अपने पति और दो बेटियों के साथ सोडावास आई और इसके बाद जनवरी 2026 में अपने माता-पिता को यहां भेजा। दोनों 15 जनवरी को सोडावास पहुंचे।
बोले कपल – इंडिया के लोग दिल से अच्छे
गिरार्ड ने कहा- इंडिया के लोग दिल से अच्छे हैं और सलीके से पेश आते हैं। यहां आज भी संस्कृति को सहेजकर रखा गया है। सोडावास में रहते हुए कभी नहीं लगा कि हम अपने देश से बाहर हैं। यही वजह है कि वे भारतीय संस्कृति को फिर से देखने यहां आए हैं।
सोलेज ने कहा- भारत से गहरा लगाव है और यहां की मिट्टी में एक अलग ही अपनापन महसूस होता है। शांत माहौल दिल को सुकून देता है। मन करता है कि बची हुई सांसें भी इंडिया में ही लूं।