दिल्ली में 6 जनवरी की रात फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई पत्थरबाजी को लेकर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से पूछताछ की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारियों के बार-बार कहने के बावजूद नदवी घटनास्थल से नहीं गए और आसपास मौजूद रहे।
पुलिस ने पत्थरबाजी की घटना पर CCTV कैमरा फुटेज के आधार पर 30 लोगों की पहचान की है। पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपियों को हिरासत में लेने के लिए छापेमारी कर रही हैं।
उधर सपा नेता एसटी हसन ने पत्थरबाजी की घटना का बचाव करते हुए कहा कि, जब कहीं एक्शन होगा तो रिएक्शन आएगा ही। अतिक्रमण हटाने के नाम पर जुल्म किया जा रहा है।
दरअसल पूरा मामला फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने से जुड़ा है। पुलिस की टीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अतिक्रमण हटाने गई थी। इस बीच कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई कि मस्जिद गिराई जाएगी। जिससे हिंसा भड़की। पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए, 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए।
सपा नेता बोले- अतिक्रमण हटाने के नाम पर जुल्म हो रहा
सपा नेता एस टी हसन ने मस्जिद के पास हुई पत्थरबाजी को लेकर कहा कि यहां 100 साल पुरानी मस्जिद और दुकानें हैं। जब अतिक्रमण के नाम पर ज़ुल्म किया जाएगा तो लोग कब तक विरोध नहीं करेंगे? अगर यही कार्रवाई हर जगह की जाए, तो लोग सब्र करेंगे।
जब धार्मिक जगहों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाती है जो लोगों की भावनाओं और आस्था से जुड़ी हैं, तो कार्रवाई का रिएक्शन तो होगा ही। अगर कोई अवैध अतिक्रमण हुआ है, तो उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी मौजूदगी में यह सब हुआ।
सोशल मीडिया पर लोगों को उकसाया गया था
6 जनवरी की रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया कि अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान मस्जिद को गिराया जा रहा है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक पोस्ट खालिद मलिक नाम के व्यक्ति की थी। वीडियो में उसने लोगों से बड़ी संख्या में अपने घरों से बाहर निकलने की अपील की थी।
इसके तुरंत बाद कई लोग वहां जमा हो गए और कुछ ने पुलिस और MCD कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दूसरे कानूनों के तहत केस दर्ज किया है।
पुलिस ने मंगलवार रात प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। मामले में अब तक एक नाबालिग समेत 5 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है।
यह है पूरा मामला
फैज-ए-इलाही मस्जिद की प्रबंधन समिति ने दिल्ली एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसमें कहा गया कि मस्जिद के बाहर की 0.195 एकड़ जमीन पर बने ढांचे अवैध हैं। उन्हें हटाया जाएगा।
एमसीडी का कहना है कि अतिरिक्त जमीन पर मालिकाना या वैध कब्जे के दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं। एमसीडी का यह आदेश 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्देशों के आधार पर जारी किया गया था।
डिवीजन बेंच के आदेश में तुर्कमान गेट के पास रामलीला ग्राउंड से करीब 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमण हटाने को कहा गया था, जिसमें सड़क, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग और एक निजी क्लिनिक शामिल हैं।
मस्जिद समिति का कहना है कि यह जमीन वक्फ संपत्ति है। वह इसके लिए वक्फ बोर्ड को लीज किराया देती है। हमें अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति नहीं है। बारात घर और क्लिनिक का संचालन बंद किया जा चुका है। मुख्य आपत्ति कब्रिस्तान को लेकर है।
ओवैसी ने कहा- काला वक्फ कानून जिम्मेदार
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा कि दिल्ली की एक मस्जिद की वक्फ की जमीन के एक हिस्से को गिरा दिया गया। इस अपराध के लिए पूरी तरह से काला वक्फ (संशोधन) कानून जिम्मेदार है।
6 जनवरी: हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
6 जनवरी को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन से अतिक्रमण (बारात घर और डायग्नोस्टिक सेंटर) हटाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था।
कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम दिल्ली (MCD), शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली वक्फ बोर्ड समेत अन्य विभागों से जवाब मांगा है।
जस्टिस अमित बंसल ने कहा था कि मामला सुनवाई के योग्य है। सभी पक्षों को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।