निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल यानी निषाद पार्टी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए रविवार से चुनाव प्रचार का आगाज करने जा रही है। गोरखपुर में इस पार्टी की नींव रखी गई, इसलिए यहीं से शंख्ननाद भी होने जा रहा है। प्रदेश के 4 बड़े शहरों में विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश की लगभग 160 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता प्रभावी भूमिका में हैं। इसलिए 5 अप्रैल तक होने वाली इन 4 रैलियों के जरिए इन सीटों को साधने का प्रयास किया जाएगा।
मंच पर सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, अपना दल के आशीष पटेल उपस्थित रहेंगे। देश के कोने-कोने से निषाद नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही गठबंधन दलों की एकता का संदेश भी निषाद पार्टी के मंच से दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सहित प्रदेश मंत्रिमंडल के कई साथियों को भी डा. संजय निषाद ने आमंत्रित किया। हालांकि कुछ व्यस्तताओं के कारण मुख्यमंत्री का आना मुश्किल है।
जानिए गोरखपुर से क्यों शुरू हो रही रैली
डा. संजय निषाद कहते हैं कि गोरखपुर में हमारी जड़ें हैं। 2007 में यहां रामगढ़ताल का पानी और प्रयागराज में निषादराज के किले की मिट्टी लेकर मैंने यात्रा शुरू की थी। उस यात्रा को 19 साल पूरे हो गए हैं और निषाद पार्टी को 10 साल। वह मिट्टी व पानी प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों के साथ 20 राज्यों तक पहुंच चुकी है। सबसे पहली जीत भी यहीं मिली थी। प्रवीण निषाद ने 2018 लोकसभा उपचुनाव जीता था। गोरखपुर में भाजपा को यह बड़ी चुनौती थी।
इसके बाद प्रयागराज के श्रृगवेरपुर में रैली होग। यहां निषादराज की भव्य प्रतिमा लगी है और उनके नाम पर बड़ा पार्क भी बना है। यहीं निषादराज का किला भी है। तीसरी रैली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से होगी। वहां से बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है। यह रैली सफल हुई तो मैसेज सीधा प्रधानमंत्री तक जाएगा। इसके साथ ही मेरठ व आसपास के क्षेत्र कश्यप बहुतायत में हैं। उन्हें साधने के लिए मेरठ में रैली होने जा रही है।
4 मंडलों के बूथ अध्यक्ष शामिल होंगे
ड. संजय निषाद ने भारी भीड़ की भूमिका तैयार की है। उनक कहना है कि उनकी पार्टी के 8 जोनल अध्यक्ष, 18 मंडल अध्यक्ष, 40 सेक्टर अध्यक्ष, प्रदेश के 88 संगठनात्मक जिलों के प्रभारी एवं गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती व अजमगढ़, 4 मंडलों के बूथ अध्यक्ष भी इस रैली में शामिल होंगे। डा. संजय का दावा है कि 50 से अधिक विधायकों ने पार्टी के आरक्षण के मुद्दे को उठाया है। निषाद पार्टी ने निषाद समाज के लोगों को उनका खोया सम्मान दिलाया है। आज हर राजनीतिक दलों में उन्हें सम्मान मिल रहा है।
3000 बाइकों की रैली निकालेंगे
निषाद पार्टी की इस रैली में शामिल होने के लिए संजय निषाद 3000 बाइकों की रैली निकालेंगे। पादरी बाजार स्थित निषाद पार्टी के कार्यालय से यह बाइक रैली सुबह 11 बजे शुरू होगी। उसके बाद पादरी बाजार पुलिस चौकी, जेल तिराहा, असुरन चौक, गोलघर काली मंदिर, शास्त्री चौक होते हुए अंबेडकर चौक पहुंचेगी। यहां से यात्रा पैडलेगंज होते हुए महंत दिग्विजयनाथ पार्क पहुंचेगी।
जानिए क्या हैं प्रमुख मांगें
मझवार/तुरैहा को अनुसूचित जाति में परिभाषित करना
केवट, मल्लाह, बिंद, मांझी, कहार, धीवर, बाथम और कश्यप जैसी जातियों को पूर्व से अंकित मझवार और तुरैहा श्रेणी के अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की मांग उठाई जाएगी। पार्टी का तर्क है कि ये सभी समुदाय सामाजिक, आर्थिक और पारंपरिक रूप से एक ही वर्ग से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें समान संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए।
खनन, बालू और पुश्तैनी घाटों पर अधिकार बहाली
मछुआ समाज को पहले नदी, बालू खनन और पुश्तैनी घाटों पर आसामी दर्ज के साथ अधिकार प्राप्त थे। किन्तु पूर्व की सरकारों द्वारा इन पारंपरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया, जिससे समाज की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। पार्टी इन अधिकारों की पुनः बहाली की मांग कर रही है।
वर्ग-3 की भूमि को मछुआ समाज के लिए पुनः आरक्षित करना
उत्तर प्रदेश में वर्ग-3 की भूमि मछुआ समाज के लिए आरक्षित थी और उन्हें आसामी दर्ज प्राप्त था, क्योंकि समाज का 80% से अधिक हिस्सा भूमिहीन है। इसके बावजूद पूर्व सरकारों ने यह अधिकार समाप्त कर दिया। निषाद पार्टी की मांग है कि इस भूमि को पुनः समाज के लिए आरक्षित किया जाए, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका मिल सके।
विमुक्त जाति/जनजाति के अधिकारों की बहाली
भारत सरकार के आदेशानुसार मछुआ समाज की कई उपजातियों को, क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के पीड़ित होने के कारण, विमुक्त जाति एवं जनजाति के अधिकार प्राप्त थे। किन्तु वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा इन लाभों को समाप्त कर दिया गया। पार्टी की मांग है कि इन अधिकारों को पुनः लागू किया जाए, जिससे समाज को न्याय मिल सके।
ओबीसी से 9 प्रतिशत काटकर एससी में आरक्षण देने की मांग करेंगे
डा. संजय निषाद का कहना है कि दूसरे नाम से निषाद समाज को एससी का आरक्षण् मिलता है। चाहे जिस दल में हों, निषाद नेताओं से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए एकजुट हों। ओबीसी से 9 प्रतिशत काटकर एससी में जोड़ा जाए। जातीय जनगणना में अपनी जाति मझवार के रूप में एससी में दर्ज कराएं।
जानिए यूपी में कितने प्रभावी हैं निषाद – उत्तर प्रदेश में निषाद समाज का वोट लगभग 4.5 प्रतिशत है। 80 ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां उनकी संख्या 1 ला्ख के करीब है। – प्रदेश की लगभग 160 सीटों पर वे प्रभावी भूमिका में हैं। – निषाद समाज की सभी उपजातियों केा जोड़ दें तो उनकी संख्या लगभग 9 प्रतिशत हो जाएगी। -गोरखपुर, वारा्सी, आजमढ़, बलिया, मऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर, फतेहपुर आदि जिलों में निषद बड़ी संख्या में हैं। – 2022 विधानसभा चुनावों पर गौर करें तो एनडीए में निषाद पार्टी को 15 सीटें मिली थीं। इनमें से 9 पर जीत मिली थी। 6 निषाद पार्टी के सिंबल पर थे, बाकी भाजपा।